इतिहास के झरोखे से / * इंदिरा गांधी-जन्म शती * !! भिंड में इंदिरा गांधी से दस्यु सरगना मानसिंह की पत्नी की मुलाकात..! ० डॉ राकेश पाठक

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/ इतिहास के झरोखे से / * इंदिरा गांधी-जन्म शती *

!! भिंड में इंदिरा गांधी से दस्यु सरगना
मानसिंह की पत्नी की मुलाकात..!

० डॉ राकेश पाठक

बात करीब साठ साल से भी ज्यादा पहले की है। तब इंदिरा गांधी युवक कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष थीं। वे अपने देशव्यापी दौरे के तहत सन 1954 में भिंड आयीं थीं।

भिंड में तब हरकिशनदास जाधवजी भूता कांग्रेस के बेहद कद्दावर नेता थे। पंडित जवाहरलाल नेहरू से भूता जी का सीधा संपर्क था। जब इंदिरा गांधी भिंड आयीं तो भूता जी के अलावा तब के दिग्गज नेता नरसिंह राव दीक्षित, युवक कांग्रेस ग्वालियर के जिला अध्यक्ष कीर्तिदेव शुक्ल और जिला उपाध्यक्ष राजेन्द्र सिंह उनके साथ थे।
(कीर्तिदेव बाद में पत्रकार रहे और राजेंद्र सिंह श्यामाचरण शुक्ल के मंत्रिमंडल में मंत्री बने)

भिंड के परेड चौराहे पर इंदिरा गांधी की सभा हुई जिसमें दूर दूर से ग्रामीण भी आये। सभा के बाद इंदिरा जी हरकिशनदास भूता की कोठी पर चाय पान के लिए गईं। यहां उनसे तमाम लोग मिले लेकिन एक ऐसी महिला उनसे मिल कर चली गयी जिसके बारे में सिर्फ चंद लोगों को ख़बर थी।
दरसअल वो चम्बल में डकैतों के आतंक का चरम दौर था। दस्यु सरगना मान सिंह की धमक दिल्ली तक गूंज रही थी। वो ‘दस्यु सम्राट’ और ‘चम्बल का रोबिन हुड’ कहलाता था।

उसी मानसिंह की पत्नी को इंदिरा जी से मिलवाया गया। बताया गया कि ये महिला मानसिंह की रिश्तेदार है। उस महिला ने इंदिरा गांधी से अनुरोध किया कि उसके जो रिश्तेदार बागी हैं वो समर्पण करना चाहते हैं आप कुछ मदद कीजिये। इंदिरा गांधी ने उसकी बात सुनी और भूता जी से कहा कि इन्हें आचार्य बिनोबा भावे से मिलवा दीजिये, वे ही समर्पण के लिए जुटे हैं।

वो महिला आश्वासन मिलने के बाद भूता कोठी से चली गयी।किसी को पता नहीं लगा कि वो मानसिंह की पत्नी थी। ये बात सिर्फ भूता जी और राजेंद्र सिंह को मालूम थी।(यद्यपि मानसिंह समर्पण नहीं कर सका और पुलिस मुठभेड़ में मारा गया)

इंदिरा जी सन 1959 में भी भिंड आयीं थीं। तब वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की अध्यक्ष बन चुकीं थीं। तब तक हरकिशन भूता के पुत्र नवीनचंद्र भूता सक्रिय राजनीति में आ चुके थे और बाद में विधायक भी रहे। इस दफा इंदिरा जी भूता जी की कोठी में ही रुकीं थीं।
० हरिकिशन दास जाधवजी भूता की कहानी फिर कभी । फिलहाल इतना जान लीजिए उस दौर में भिंड मेले की स्थापना सहित तमाम विकास उनकी ही पहल का नतीजा था।

प्रसंगवश: खाकसार इन्हीं भूता जी के स्कूल “भूता बाल वाड़ी” में
कक्षा एक में भर्ती हुआ था। नवीन भूता के पुत्र संजय और अनुराधा सहपाठी रहे हैं।
Sanjay Bhuta Anuradha Bhuta Shah