VIDEO वायरल – दलालो के चहेते SDOP से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र विधायक राजवर्धन पूछ बैठे उनके दलालो के नाम…? देखिये, कैसे लग रहा है पुलिस की छवि पर बट्टा…..???

1040

दलालों के चहेते एसडीओपी से नाराज हुए बाबा साहब….
धरने पर बैठे बैठे ही एसडीओपी से पूछ बैठे कि कहां है तुम्हारा दलाल….?
राधौगढ़ एसडीओपी अनुराग पांडे अपनी पदस्थ ही के बाद से ही विवादों में घिरे रहे हैं। उनके वरदहस्तो को प्राप्त दलाली प्रथा के संरक्षण के चलते न केबल क्षेत्र में चर्चित होते जा रहे हैं बल्कि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के आगे भी चर्चाओं में आ गए हैं किंतु महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सब कुछ जानने और पहचानने के बाद भी पुलिस के आला अधिकारी कुछ भी कर पाने से गुरेज कर रहे हैं ।सिर्फ इतना ही नहीं दिग्विजय सिंह के पुत्र राजवर्धन सिंह उर्फ बाबा साहब विधायक राधौगढ़ ने भी अपने धरने के दौरान सीधे तौर पर एसडीओपी से यह तक पूछ डाला कि अपने दलाल का नाम जग जाहिर करें …!यह वीडियो भी आजकल सोशल मीडिया पर छाया हुआ है !
गौरतलब है कि बीते रोज पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के पुत्र एवं राधौगढ़ के विधायक बाबा साहब ने रेल रोको आंदोलन का प्रदर्शन किया जिसके तहत वे धरने पर बैठ गए। धरने पर बैठे बैठे ही उन्होंने वहां मौजूद एसडीओपी अनुराग पांडे से सीधे-सीधे लहजे में पूछ डाला कि कहां है तुम्हारा दलाल…..? उनके नाम सार्वजनिक करो…? गौरतलब है कि उक्त अधिकारी पूर्व से ही अपनी कार्यशैली व संरक्षण में फलने फूलने बाली दलाल प्रथा के चलते क्षेत्र में चर्चाओं का वायस बने रहे है।   इनके पुलिस सेवा के कार्यकाल में प्रशिक्षु पीरियड से लेकर s i और निरंतर दो बार टी आई रह चुके श्री पांडे आज एसडीओपी के पद पर भी राधौगढ़ में ही तैनात हैं।
सदैव से ही इनके कारनामों में बड़े कारोबारी एवं नज़दीकियों के गुप्त गठजोड़ क्षेत्र में जगजाहिर है जिसके चलते विभाग कहीं ना कहीं चुप्पी साधे हुए हैं ।बात यह भी है कि भारतीय संविधान के तहत देश की अंदरूनी व्यवस्था को सुचारु रुप से ठीक-ठाक रखने का पूरा जिम्मा पुलिस के कंधों पर है वही डीजीपी स्वयं प्रदेश में पुलिस की बिगड़ी व्यवस्था को व्यवस्थित करने के प्रयासों में लगे हैं किंतु दलालों के माध्यम से क्षेत्र में व्याप्त पुलिस के आला अधिकारियों का यह गठजोड़ कहीं ना कहीं पुलिस की छवि पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर रहा है ।
सूत्र बताते हैं कि विवादित अफसरशाही के इन कारनामो में कही न कही सरकार की भी छूट मिली है जो कोई कार्यवाही नहीं कर पा रही है ।सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि पूर्व में कई थानेदार इन पर परेशान करने और इनके मनमाफिक न चलने पर स्थान बदली करा देने तक से भी पीड़ित रहे हैं ।विधायक ममता मीणा भी क्षेत्र में खुले आम चल रहे जुआ-सट्टा के खिलाफ मुखर हो चुकी है जो खबरों की सुर्खियां भी बना।
आश्चर्यजनक पहलू यह है कि पुलिस महकमे में शिवराज सिंह की मनसा अनुरूप पुलिस की छवि को निखारने के प्रयासों में यदि कोई अधिकारी बट्टा लगाता है तो ऐसे अधिकारी को क्षेत्र की कमान एक लंबे समय से दी क्यों गई है …..?
विचारणीय प्रश्न यह भी है कि जहां के जनप्रतिनिधि सार्वजनिक स्थलों पर ऐसे अधिकारियों पर दलालों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हैं तो वहां क्या आम जन के मन में पुलिस की छवि दागदार नहीं होती ……?
यदि अधिकारी पर सार्वजनिक रूप से इस प्रकार के आरोप जनप्रतिनिधि लगाते है और पुलिस की छवि पर सवाल उठाते है तो क्या मज़बूरी है जो महकमा अचेतन्य हो जाता है…..?
देखना यह है कि इतना सब कुछ होने के बाद भी अंगद के पैर के समान अपना पैर बरसो से जमाये बैठे अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही होती है अथवा प्रदेश सरकार और पुलिस में आला अधिकारी इनके कद के आगे फिर बौने साबित होते हैं…..??