रेप मामले में पूर्व मंत्री समेत 17 को राहत, विक्टिम ने लगाए थे संगीन आरोप

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जयपुर. महानगर की एडीजे कोर्ट (7) ने शनिवार को पूर्व केन्द्रीय मंत्री निहाल चंद मेघवाल व पूर्व मंत्री जोगेश्वर सहित 17 के खिलाफ रेप के आरोप केस में हरियाणा के सिरसा निवासी विक्टिम की निगरानी याचिका खारिज कर दी। निगरानी याचिका में विक्टिम ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री निहाल चंद मेघवाल, पूर्व मंत्री जोगेश्वर गर्ग के अलावा राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंन्द्र भारद्वाज, प्रकाश पुंज गर्ग, ओमप्रकाश, राधेराम गोदारा, सतीश सिंगोदिया, विवेकानंद, विकास अग्रवाल, अनिल राव आरिफ, हरीश, कुलदीप हुंदल, भगवान, मनीष, पिन्टू व कुलदीप को पक्षकार बनाया था। विक्टिम ने लगाए थे ये आरोप…
– मामले में विक्टिम का आरोप था कि उसकी शादी 20 दिसंबर 2010 को हनुमानगढ़ जिला निवासी ओमप्रकाश से हुई थी। फरवरी 2011 में वह उसे जयपुर लाया और वैशाली नगर में रखा।
– वह उसे खाने-पीने की चीजों में नशीला पदार्थ मिलाकर दूसरों को सौंप देता और वे उसके साथ रेप करते। उसे कई जगह रखकर उसके रेप किया। उसने इस्तगासा से वैशाली नगर थाने में एफआईआर दर्ज कराई, लेकिन पुलिस ने एफआर लगा दी ।
कोर्ट ने कहा- एक अपराध के दो जगह केस नहीं चल सकते
– कोर्ट ने कहा कि इस मामले में डबवाली पुलिस थाने में भी मामला दर्ज है और एक ही अपराध को लेकर दो जगह मामला नहीं चल सकता। साथ ही घटना को लेकर मेडिकल में भी यह साबित नहीं हो पाया है कि विक्टिम को नियमित नशा दिया जाता था। ऐसे में विक्टिम की निगरानी याचिका चलने योग्य नहीं है।
– विक्टिम ने निगरानी याचिका में महानगर मजिस्ट्रेट कोर्ट (11) के 10 फरवरी 2014 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कोर्ट ने वैशाली नगर पुलिस की एफआर को स्वीकार कर विक्टिम की प्रोटेस्ट पिटिशन खारिज कर दी थी।
– कोर्ट के फैसले पर राजस्थान कांग्रेस कमेटी पर्यावरण प्रकोष्ठ व राजस्थान यूनिवर्सिटी के पूर्व अध्यक्ष पुष्पेंन्द्र भारद्वाज ने कहा कि वे इस केस के जरिए उन पर झूठे आरोप लगाने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे जिससे की ऐसे लोगाें को सजा मिल सके। आगे चल कर यह इस मामले में मिसाल बने।