अयोध्या विवाद में बोले श्री श्री रविशंकर – अभी के माहोल में शाँती बहाली की आवश्यकता, बातचीत से निकले राम मंदिर निर्माण का रास्ता

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अयोध्या. बाबरी विवाद में मध्यस्थता के सवाल पर आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर ने कहा है कि हालात बदल गए हैं और अब लोग शांति चाहते हैं। उन्हाेंने कहा कि यह कोशिश 2003-04 में भी हुई थी, लेकिन अब माहौल ज्यादा पॉजिटिव है। उधर, बाबरी एक्शन कमेटी ने इस विवाद में श्रीश्री के दखल देने की खबरों का खंडन किया है। गुरुवार को मीडिया में खबरें आई थीं कि अयोध्या में विवादित स्थल को लेकर आर्ट ऑफ लिविंग के फाउंडर श्रीश्री रविशंकर मध्यस्थता कर सकते हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा था कि यह केस कोर्ट से बाहर सुलझाया जा सकता है। इस केस में अगली सुनवाई 5 दिसंबर को होनी है।

– न्यूज एजेंसी के मुताबिक, बाबरी एक्शन कमेटी के मेंबर हाजी महबूब ने कहा, “काफी पहले एक बार रविशंकर की ओर से बुलावा आया था। उन्होंने कहा था कि वे मुझसे मिलना चाहते हैं। मैंने इसका स्वागत किया था, लेकिन बाद में हमारी कोई बात नहीं हुई और न ही उनकी ओर से कोई मेसेज आया।”
– हालांकि, हाजी मेहबूब ने यह जरूर कहा कि अगर रविशंकर इस विवाद को सुलझाने के लिए हमसे बात करना चाहते हैं तो हमें कोई दिक्कत नहीं है।

कोर्ट से बाहर विवाद सुलझाने की थीं खबरें
– गुरुवार को मीडिया में आईं रिपोर्ट्स में कहा गया था कि बाबरी विवाद को कोर्ट से बाहर सुलझाने के लिए रविशंकर निजीतौर पर कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 6 अक्टूबर को बेंगलुरु में निर्मोही अखाड़ा और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के नुमाइंदों को बातचीत के लिए बुलाया था। उनकी दोनों पक्षों से काफी देर बात भी हुई। बातचीत के बाद श्रीश्री ने कहा कि दोनों पक्षों का कोर्ट से बाहर सेटलमेंट को लेकर पॉजिटिव रिस्पॉन्स है।

SC ने कहा था- सभी पक्ष आम राय बनाएं, बातचीत नाकाम होने पर हम दखल देंगे
– मार्च में इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस जेएस खेहर, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस एसके कौल की बेंच ने कहा था कि यह मुद्दा सेंसिटिव और सेंटिमेंटल है। बेहतर यही होगा कि इसका आपसी रजामंदी से हल निकले। इस विवाद का बातचीत के जरिए ऐसा हल निकालें, जिस पर सारे पिटीशनर्स और रिस्पॉन्डेंट्स राजी हों। अगर बातचीत नाकाम हो जाती है तो हम दखल देंगे।

मध्यस्थ पर क्या कहा था SC ने?
– सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्ष इस मसले को सुलझाने की नई कोशिशों के लिए मध्यस्थ को चुन लें। अगर जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट भी एक प्रिंसिपल मीडिएटर चुन सकता है।
– चीफ जस्टिस जेएस खेहर ने कहा था कि अगर सभी पक्ष ये चाहेंगे कि वे इस मुद्दे पर मीडिएट करें तो वे मध्यस्थ बनने को तैयार हैं। जरूरत पड़ने पर मेरे साथी जजों की भी मदद ली जा सकती है।

कांग्रेस ने किया स्वागत
– उधर, कांग्रेस ने श्रीश्री की मध्यस्थता का स्वागत किया है। पार्टी के सीनियर लीडर टॉम वडक्कन ने कहा, “कोर्ट ने कहा था कि यह केस कोर्ट के बाहर सुलझाया जा सकता है और अगर इसके लिए श्रीश्री रविशंकर ने कोशिश की है तो इसका स्वागत करना चाहिए।”

6 दिसंबर, 1992 को गिराया गया विवादित ढांचा
– इस मुद्दे ने 1989 के बाद तूल पकड़ा। इसकी वजह से तब देश में सांप्रदायिक तनाव फैला था। देश की राजनीति इस मुद्दे से प्रभावित होती रही है।
– हिंदू संगठनों का दावा है कि अयोध्या में भगवान राम की जन्मस्थली पर विवादित बाबरी ढांचा बना था।
– राम मंदिर आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में विवादित बाबरी ढांचा गिरा दिया गया था।