MPPSC । लोक सेवा आयोग में बरसी जाति विशेष पर कृपा…! व्यापम के बाद एमपीपीएससी परीक्षा विवादों में…..

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जैन लोक सेवा आयोग में बरसी जाति विशेष पर कृपा
व्यापम के बाद एमपीपीएससी परीक्षा विवादों में

(श्रीप्रकाश शुक्ल)
भोपाल। प्रशासनिक सेवा के लिए की गई रात-दिन की मेहनत आखिर अकारथ चली गई। मेहनती अभ्यर्थियों की रो-रोकर आंखें पथरा गई हैं लेकिन जवाबदेह लोगों पर पाप-बोध होने की बजाय जातीय मुलम्मा चढ़ा हुआ है। व्यापम का पाप अभी धुला भी नहीं था कि मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में जाति विशेष पर बरसी जवाबदेहों की कृपा ने शिवराज सरकार को फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। इस परीक्षा में गड़बड़झाले की शिकायत न केवल अभ्यर्थियों ने की है बल्कि सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भी कई जायज सवाल उठाए हैं।
बता दें कि मध्यप्रदेश लोकसेवा आयोग की मुख्य परीक्षा के नियंत्रक दिनेश जैन और प्रभारी परीक्षा नियंत्रक मदनलाल गोखरू जैन हैं। आरोप है कि मध्यप्रदेश के कई दूसरे जिलों के निवासी जैन छात्रों ने आगर मालवा स्थित एक परीक्षा केंद्र की मांग की और उन्हें वही केंद्र आवंटित कर गड़बड़झाले की जमीन तैयार कर दी गई। जानकर आश्चर्य होगा कि इस केंद्र के सर्वेसर्वा भी जैन ही रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस केन्द्र से परीक्षा देने वाले 80 फीसदी से ज्यादा जैन सफल हुए हैं। पीएससी अभ्यर्थी शिवनारायण बघेल द्वारा भेजे गई कुछ दस्तावेज चीख-चीख कर बता रहे हैं कि बड़े पैमाने पर गड़बड़झाला हुआ है। जवाबदेह लोगों का कहना है कि जैन समुदाय के लोग साक्षर होते हैं तो सवाल यह उठता है कि क्या सरस्वती उन्हीं की बपौती है।
लोक सेवा आयोग के बारे में यह प्रचारित है कि इस तरह की आपराधिक जालसाजी आसान नहीं होती, परन्तु इस बार मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा ने इसे झुठला दिया और एक नया कीर्तिमान रच दिया है। मध्य प्रदेश सरकार पहले ही व्यापम महाघोटाले से पूरे देश में चर्चा में है और इस नए घोटाले ने उसे फिर से कटघरे में खड़ा कर दिया है। लिखित परीक्षा के घोषित परिणामों में शुरू के पन्नों में कुछ समझ नहीं आएगा लेकिन आखिरी पन्ना देखिए तो इसमें अगाध-अद्भुत जैन सेवा परवान चढ़ती दिख रही है। आखिरी के पेज में 24 में से 18 जैन सफलता के ऊंट पर सवार हुए हैं। आश्चर्यजनक रूप से इन सारे जैन उम्मीदवारों को एक ही सेंटर अलॉट किया गया था।
केन्द्र का शहर कैंडीडेट को चूज करना पड़ता है फिर आयोग उसी शहर में सेंटर अपनी मर्जी से अलॉट करता है। इन सब ने अलग जिले का होते हुए भी आगर मालवा जोकि एक छोटा सा जिला है उसे ही अपना परीक्षा केन्द्र क्यूँ चुना आसानी से समझा जा सकता है। परीक्षा नियंत्रक दिनेश जैन और प्रभारी परीक्षा नियंत्रक मदनलाल गोखरू जैन के कृपा से जब जैन अभ्यर्थी मुख्य लिखित परीक्षा में पास हो गए तो फिर इंटरव्यू में उन्हें कौन रोक लेगा। इस बार जो हुआ उसे देखते हुए तो मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग को जैन लोक सेवा आयोग कहें तो उपयुक्त होगा।
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश शासन ने प्रदेश में एक दर्जन से ज्यादा पदनामों को एमपीपीएससी के माध्यम से भरने के लिए 507 पद निकाले थे। इसके लिए फरवरी 2017 में आयोजित की गई प्रारंभिक परीक्षा में दो लाख से ज्यादा अभ्यर्थियों ने सेंटरों पर पहुंचकर परीक्षा दी थी। अप्रैल माह में इस परीक्षा का रिजल्ट घोषित होने के बाद 8556 आवेदकों का चयन मुख्य परीक्षा के लिए हुआ। यह परीक्षा जून 2017 में आयोजित की गई और इसका रिजल्ट गत 29 सितम्बर को आयोग की वेबसाइट पर अपलोड किया गया जिसमें 1528 आवेदकों को पास घोषित किया गया। इस सूची में शामिल होने से वंचित हुए कुछ आवेदकों ने जब पूरी रिजल्ट शीट देखी तो उनके होश उड़ गये और उनकी आंखों से आंसू टपकने लगे। इस गड़बड़झाले पर डिप्टी सेक्रेटरी एमपीपीएससी वंदना वैद्य कहती हैं कि चूंकि सारी प्रक्रिया कम्प्यूटराइज्ड होती है लिहाजा मेरा मानना है कि इसमें कहीं भी कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जो भी हो यदि मध्य प्रदेश में ऐसे ही रावण राज चलता रहा तो मेधावी प्रतिभाएं घुट-घुट कर दम तोड़ देंगी।