Shivpuri-मंच पर आए बुआ-भतीजा, कयासों पर लगा विराम, राजधानी की राजनीति गर्माई

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सबका साथ-सबका विकास की राह पर शिवपुरी की राजनीति

शिवपुरी। देश के प्रधानमंत्री का नारा है कि सबका साथ-सबका विकास। शायद इसी नारे की तर्ज पर सोमवार की शाम उस समय शिवपुरी की राजनीति चल निकली, जब राजनीति के दोनों सितारे एक मंच पर आ गए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की भीड़ व दोनों दलों के कार्यकर्ताओं को भी ऐसा लग रहा था कि पीठ-पीछे होने वाले कटाक्ष, शायद आज मंच पर नजर आएं। लेकिन उद्बोधन के बाद मंच इतना भावुक हो गया कि राजनैतिक प्रतिद्वंदता बहुत पीछे छूट गई। शिवपुरी में क्या होने वाला है?, इस पर शिवपुरी ही नहीं बल्कि प्रदेश की राजधानी के लोगों की नजर रही। परिवार के नाम पर ही सही, लेकिन मंच साझा होने से भोपाल की राजनीति गर्मा गई।
प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही इस बात को मानकर चल रहे हैं कि इस बार विधानसभा चुनाव में उनका मुकाबला ज्योतिरादित्य सिंधिया से होगा। यही वजह है कि जब भी मुख्यमंत्री को कोई मंच मिला, तो उन्होंने सांसद सिंधिया को टारगेट करने के लिए उनके परिवार पर कटाक्ष करने से परहेज नहीं किया। प्रदेश के सीएम जिस शख्स को अपना प्रतिद्वंदी मान रहे हैं, उनके साथ, उनकी ही केबिनेट की मंत्री यदि मंच पर आ जाएं, तो माथे पर सिलवटें आना तय है। इतना ही नहीं पिछले दिनों में भोपाल आए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी मप्र की दो लोकसभा सीट शिवपुरी-गुना व छिंदबाड़ा को जीतने का जोश अपने कार्यकर्ताओं में भरने का प्रयास किया। इन हालातों के बीच राजनीति में एक-दूसरे पर कटाक्ष करने वाले दो धुरंधर जब एक मंच पर आ जाएं, तो फिर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म होना लाजमी है।

फिर जागी शिवपुरी को आस

एक तरफ राजनीति और दूसरी तरफ शिवपुरी शहर में रहने वाली जनता की मूलभूत सुविधाएं। न चलने को सड़क है और न पीने को साफ पानी। बिजली की लुकाछिपी भी अक्सर आमजन के लिए परेशानी खड़ी करती रहती है। अब जबकि सब कुछ छोड़कर राजनीति के दोनों धु्रव एक मंच पर आ गए, तो इन परिस्थितियों के बीच शहरवासियों को फिर उम्मीद जागी है कि अब पक्ष-विपक्ष ही एक हो गया, तो शहर में लंबित पड़े विकास कार्य जरूर तेजी से पूरे होंगे।