निर्मला सीतारमण ने संभाली रक्षा मंत्री की कमान, जेटली भी रहे मौजूद

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नई दिल्ली: नव नियुक्त रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यहां रक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभाल लिया। वह देश की पहली पूर्णकालिक महिला रक्षा मंत्री हैं। हांलाकि इससे पहले पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी रक्षा मंत्री रह चुकी हैं लेकिन उन्होंने बतौर प्रधानमंत्री रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अपने पास रखा था। सीतारमण सुबह साढ़े दस बजे साउथ ब्लॉक पहुंची और रक्षा मंत्रालय का कामकाज संभाला। इस मौके पर पूर्व रक्षा मंत्री अरूण जेटली भी मौजूद थे।

मोदी मंत्रिपरिषद के रविवार को हुए विस्तार एवं फेरबदल में सीतारमण को प्रोन्नत कर रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इससे पहले वह उद्योग एवं वाणिज्य राज्य मंत्री थी। उन्हें अरुण जेटली के स्थान पर रक्षा मंत्री बनाया गया है जो वित्त मंत्रालय के साथ साथ रक्षा मंत्रालय का भी काम देख रहे थे। मई 2014 में मोदी सरकार के गठन के समय जेटली को वित्त के साथ-साथ रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2014 में मंत्रिपरिषद के पहले फेरबदल में मनोहर पार्रिकर को रक्षा मंत्री की जिम्मेदारी दी गई। पार्रिकर को गत मार्च में गोवा का मुख्यमंत्री बनाए जाने के बाद रक्षा मंत्रालय का प्रभार एक बार फिर जेटली को सौंप दिया गया था।

चीन और पाकिस्तान से लगी सीमा पर पिछले कुछ समय से चल रहे घटनाक्रमों को देखते हुए भी सीतारमण की नियुक्ति को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मोदी सरकार के लगभग सभी नये मंत्रियों ने अपने अपने कार्यभार संभाल लिए हैं लेकिन जेटली के रक्षा मंत्री के तौर पर रविवार को ही जापान यात्रा पर जाने के कारण श्रीमती सीतारमण रक्षा मंत्रालय का कार्यभार नहीं संभाल सकी थी। जेटली कल शाम जापान से लौटे आए थे।

सीतारमण 2008 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुईं और उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारिणी में जगह दी गयी। उन्हें मार्च 2010 में पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया जहाँ से उनके करियर ने उड़ान भरी और मोदी सरकार के सत्ता में आते ही उन्हें बतौर राज्य मंत्री मंत्रिपरिषद में जगह दी गई। उनका जन्म तमिलनाडु के मदुरई जिले में 18 अगस्त 1959 को हुआ था। उन्होंने तिरुचिरापल्ली के सीतालक्ष्मी रामास्वामी कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक करने के बाद आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय में दाखिला लिया। उन्होंने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर और‘इंडो-यूरोपीयन टेक्सटाइल ट्रेड’विषय में पीएचडी की। कुछ समय के लिए उन्होंने अर्थशास्त्री के रूप में भी काम किया। वह लंदन के एग्रीकल्चरल इंजीनियरिंग एसोसिएशन में सहायक अर्थशास्त्री रहीं। इसके बाद लंदन में ही प्राइस वाटरहाउस में वरिष्ठ प्रबंधक (अनुसंधान एवं विश्लेषण) के रूप में काम किया और साथ ही साथ बीबीसी वर्ल्ड सर्विस में भी सेवाएँ देती रहीं। भारत लौटने पर वह हैदराबाद की सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी स्टडीज से जुड़ीं और ‘प्रणव’ नाम से एक स्कूल की स्थापना की। वर्ष 2003 से 2005 के बीच वह राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य भी रही।