शिवपुरी- डायलेसिस पर अस्पताल,अब ट्रोमा सेंटर बंद होने की कगार पर  -दर्जनों स्वास्थ्य कर्मचारी होंगे वेरोजगार 

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(राजकुमार शर्मा “राजू”)

शिवपुरी ब्यूरो। मानव सेवा के लिए समर्पित अम्मा महाराज विजया राजे सिंधिया ने महलों के सुख को त्याग अपना जीवन मानव सेवा के लिए समर्पित किया और हमेशा आगे रही। जिसका परिणाम यह है कि शिवपुरी जिला अस्पताल में स्वयं के विशेष सहयोग एवं स्थानीय लोगों की मांग पर आईसीयू का शुभारंभ कराया। जिसमें दिनेश शिवहरे, अजीत जैन खतौरा, मुकेश टोडरमल, समीर गांधी जैसी कई हस्थियों ने धन राशि देकर सहयोग प्रदान किया।  इसी कड़ी को आगे बढ़ाने का कार्य शिवपुरी की कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा किया गया। जिसका जीता जागता उदाहरण ट्रोमा सेंटर के रूप में जिला चिकित्सालय में  है। कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे के अथक प्रयासों से पूर्व  केन्द्र सरकार में केन्द्रीय मंत्री रही सुषमा स्वराज से मिलकर पांच जिलों में से एक ट्रोमा सेंटर शिवपुरी के लिए स्वीकृत कराया और उसको अमली जामा पहनाकर मरीजों की सेवा के लिए समर्पित किया और उसका नामकरण अम्मा महाराज विजया राजे सिंधिया के नाम से किया गया। कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया केमन में जो श्रद्धा थी कि अम्मा महाराज के मन की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अम्मा महाराज के नाम से शिवपुरी का ट्रोमा सेंटर संचालित हो। जिससे मानव सेवा होती रहे। गौर तलब तथ्य यह है कि जिस आईसीयू को अम्मा महाराज ने अपने हाथों से शुरू किया और दूसरा उनके नाम से संचालित ट्रोमा सेंटर को आज बंद होने की कगार पर हैं। शिवपुरी ही नहीं प्रदेश भर में संचालित होने वाले ट्रोमा सेंटर बंद होने की कगार पर है प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री रूस्तम सिंह के कार्यकाल में सबसे पहले चार चिकित्सकों द्वारा बी.आर.एस लेकर निजी सेवायें दे रहें हैं तथा आईसीयू में बिगत 6 माह से ताले पड़े हुए हैं। साथ ही जिला चिकित्सालय में संचालित ट्रोमा सेंटर में भी ताले पड़ने की संभावनायें बलबती हो रही है। इन सबके बबाजूद भी राज्य शासन एवं स्वास्थ्य मंत्री की चुप्पी साधे रहने पर सवालियां निशान खड़े होते हैं।

 

ट्रोमा सेंटर से इतने मरीजों को मिला लाभ

वर्ष 2008 में प्रारंभ हुए ट्रोमा सेंटर में ओपीडी के आंकड़ों पर यदि एक नजर दौड़ाई जाए, तो ट्रोमासेंटर के प्रारंभ होने से लेकर आज तक कुल 76509 लाभ प्राप्त कर सके। वहीं ट्रोमा सेंटर में 19736 फैक्चर बाले मरीजों के ऑपरेशन किए गए। साथ ही सर्जरी के 24604 रोगियों का उपचार किया गया। सिर की चोट खाए  10982 मरीजों का उपचार ट्रोमा सेंटर में किया गया वहीं 6660 की गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें ग्वालियर रैफर किया गया। जबकि 10223 मरीजों की सोनोग्राफी की गई। वहीं 23692 मरीजों की एमएलसी की गई। ट्रोमासेंटर वर्ष 2008 में इस उद्देश्य के साथ प्रारंभ किया गया था शिवपुरी से गुजरने वाले हाईवे पर होने वाली दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को तत्काल उपचार मुहैया हो सके।

 

ट्रोमा सेंटर बंद होने से जिले के नागरिक होगे उपचार से वंचित

ट्रोमा सेंटर में लगभग एक लाख रोगियों को महज आठ साल में उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। इतनी बड़ी संख्या में रोगियों को मिलने वाली सुविधा से शासन वंचित करने का प्रयास कर रहा है। ट्रोमा सेंटर की इस महत्वाकांक्षी योजना को केन्द्र सरकार द्वारा चिकित्सालय भवन, चिकित्सक तथा उपयोग में आने वाली मशीनरी उपलब्ध करा दी गई। दो वर्ष के उपरांत केन्द्र सरकार इस योजना क्रियान्वयन राज्य शासन को करना था। लेकिन राज्य सरकार के उपेक्षा पूर्ण रवैये के चलते ट्रोमा सेंटर बंद होने की कगार पर पहुंच चुका है। ट्रोमासेंटर को अनवरत रूप से चालू रखने के लिए जिलाधीश द्वारा शासन से पत्राचार भी किया गया। लेकिन इसके बाबजूद भी राज्य शासन द्वारा इस ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया गया। शहर के नागरिकों की निगाहें क्षेत्रीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री यशोधरा राजे की ओर टकटकी लगाकर देख रहीं हैं।

 

नि:शुल्क सेवायें प्रदान करने सिविल सर्जन ने कर्मचारियों को थमाया पत्र

वर्ष 2008 में केन्द्र सरकार द्वारा प्रारंभ किए गए ट्रोमा सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों की भर्ती विधिवत निविदा के माध्यम से की गई थी। दो वर्ष के उपरांत ट्रोमासेंटर का रखरखाव एवं कर्मचारियों के वेतन का भुगतान राज्य शासन द्वारा किया जाना था। वर्तमान समय में ट्रोमा सेंटर में चिकित्सकों के अलावा 40 स्टाफ नर्स, 5 ओटी टेक्नीशियन, 4 एक्सरे कर्मचारी, 2 लैब टेक्नीशियन, 4 वार्ड वॉय तथा 15 स्वीपर कार्यरत हैं। जिनके वेतन का भुगतान राज्य शासन द्वारा किया जाना था। उक्त समस्या के निराकरण के लिए जिलाधीश द्वारा शासन को कई बार पत्र भी लिखे गए लेकिन राज्य शासन के उपेक्षा पूर्ण रवैये के चलते उक्त कर्मचारियों को वेतन तक के लाले पड़े हुए हैं। ट्रोमासेंटर में कार्यरत पांच दर्जन कर्मचारियों को विगत 6 माहों से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। जिस पर सिविल सर्जन श्री त्रिवेदिया द्वारा उक्त कर्मचारियों को नि:शुल्क सेवायें प्रदान करने के लिए पत्र थमा दिया गया है। ऐसी परिस्थिति में ट्रोमासेंटर में कार्यरत कर्मचारी कब तक नि:शुल्क सेवायें देते रहेंगे?

 

चिकित्सालय की रीड की हड्डी है ट्रोमा सेंटर

शिवपुरी जिला चिकित्सालय स्वच्छता के मामले में भले ही प्रदेश में नम्बर रहा हो लेकिन चिकित्सीय व्यवस्थाओं के मामले में लचर साबित हो रहा है। ट्रोमासेंटर का शुभारंभ बड़े ही जोरशोर से किया गया था। लेकिन आज ट्रोमा सेंटर बंद होने के कगार पहुंच चुका है। जबकि  चिकित्सालय में ओपीडी, आईसीयू, एक्सरे, लैब में की जाने वाली जांचें सहित अन्य प्रक्रियायें ट्रामा सेंटर के माध्यम से संपन्न कराई जा रही हैं। ऐसी परिस्थिति में यदि ट्रोमा सेंटर को बंद कर दिया जाता है तो शिवपुरी जिला चिकित्सालय पंगु नजर आयेगा।  क्योंकि यहां पर ट्रोमा सेंटर में उपलब्ध मशीनरी एवं कर्मचारी ही नहीं है। तब ऐसी विषम परिस्थितियों में जिले भर से आए आस लेकर आए रोगियों का उपचार होना असंभव ही नहीं नामुमकिन है। तब फिर जिले के रोगियों का इलाज कहां पर होगा?