MP- रिटायर्ड आईपीएस सरबजीत सिंह बने मानवाधिकार आयोग के सदस्य, फैसला मात्र पांच मिनट में……

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भोपाल. रिटायर्ड आईपीएस अफसर सरबजीत सिंह को मानवाधिकार आयोग में सदस्य बनाने का फैसला मात्र पांच मिनट में हो गया। नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने उनके (सरबजीत सिंह) के नाम का प्रस्ताव रखा। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल स्वीकृति देते हुए कहा- हो गया निर्णय! बैठक खत्म। पिछले माह रिटायर हुए सरबजीत सिंह की गिनती मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अफसरों में होती है। जब उन्हें आयोग में सदस्य बनाने का फैसला हुआ तब केवल चार में से तीन सदस्य ही बैठक में मौजूद रहे। दरअसल, एक सदस्य गृह मंत्री भूपेंद्र सिंह अस्वस्थ होने के कारण बैठक में नहीं पहुंचे।
विधानसभा में सुबह 11 बजे आयोग के सदस्यों की नियुक्ति के लिए आयोजित बैठक में शामिल होने के लिए नेता प्रतिपक्ष जब अध्यक्ष डॉ. सीतासरन शर्मा के कक्ष में पहुंचे तो वहां मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल मौजूद थे। सिंह ने विधानसभा अध्यक्ष से पूछा- कितने सदस्यों की नियुक्ति होना है? अध्यक्ष ने कहा- सिर्फ एक। क्योंकि कुछ माह पहले ही एक सदस्य की नियुक्ति हो चुकी है। इस पर सिंह ने सवाल किया- पिछले छह माह से मैं नेता प्रतिपक्ष हूं। कब हो गई नियुक्ति? तारीख बताएं। इस पर वर्णवाल ने फोन लगाकर पिछली नियुक्ति की डीटेल ली। इस बीच अध्यक्ष ने बताया कि जब बाला बच्चन प्रभारी नेता प्रतिपक्ष थे, तब हुई थी। एक सदस्य का चयन किया गया था। चूंकि नियम में प्रभारी नेता प्रतिपक्ष की सहमति लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अध्यक्ष की बात खत्म भी नहीं हुई कि मुख्यमंत्री आ गए। साथ में सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रभांशु कमल भी थे। सीएम ने कहा- बताइए… क्या बात चल रही है? तब सीएम को नेता प्रतिपक्ष का पूर्व में हुई नियुक्ति के बारे में मांगी गई जानकारी के बारे में बताया गया। सीएम ने भी वही जवाब दिया, जो विधानसभा अध्यक्ष ने बताया था। इसके बाद सीएम ने कहा- बैठक शुरू करते हैं… मैं एक प्रस्ताव रखना चाहता हूं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने बात काटते हुए कहा- पहले मेरा प्रस्ताव सुन लीजिए। फिर आप प्रस्ताव देना। इस पर सीएम ने हामी भर दी। तब नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मैं सरबजीत सिंह के नाम का प्रस्ताव करता हूं। इस पर सीएम ने कहा- ठीक है। हो गया निर्णय। बैठक खत्म।