संत आसाराम बापू के धीमे ट्रायल से सुप्रीम कोर्ट नाराज़

365

नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। जेल में बंद दुष्कर्म के आरोपी कथावाचक आसाराम के गुजरात में लंबित मामले के धीमे ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने फटकार लगाते हुए गुजरात सरकार से पूछा कि अभी तक पीड़िता का बयान क्यों नहीं दर्ज हुआ। गुजरात सरकार से मामले की स्थिति रिपोर्ट मांगते हुए कोर्ट ने सुनवाई दिवाली बाद तक के लिए टाल दी।

ये आदेश न्यायमूर्ति एनवी रमना व न्यायमूर्ति अमिताव राव की पीठ ने आसाराम की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान दिये। आसाराम सितंबर 2013 से जेल में है। आसाराम पर गुजरात के अलावा राजस्थान में भी नाबालिग से दुष्कर्म का मामला लंबित है। आसाराम फिलहाल राजस्थान के जोधपुर जेल में बंद हैं।

सोमवार को मामले पर सुनवाई के दौरान पीठ ने गुजरात सरकार के वकील से पूछा कि जब कोर्ट ने स्पष्ट तौर पर त्वरित सुनवाई के आदेश दे रखे है तो फिर ट्रायल की रफ्तार इतनी धीमी क्यों। क्यों अभी तक पीडि़ता के बयान भी दर्ज हुए, जबकि वह मामले में सबसे अहम गवाह है। गुजरात सरकार की ओर से पेश एडीशनल सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि गवाहियां जल्दी पूरी करने का आदेश कोर्ट ने अप्रैल में दिया था। उन्होंने बताया कि हमले में दो महत्वपूर्ण गवाह मारे गये, एक अन्य गायब है और बाकी के 17 घायल हुए हैं। उन्होंने कहा कि कोर्ट पीडि़ता के बयान, उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के बाद दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि मामले में 92 अहम गवाहों में से 45 से ज्यादा के बयान दर्ज हो चुके हैं।

उधर दूसरी ओर आसाराम के वकील ने धीमे ट्रायल का आरोप लगाते हुए कहा कि वे पीडि़ता के बयान दर्ज होने के बाद ही जमानत याचिका पर जोर दे सकते हैं। जबकि पीडि़ता की ओर से पेश वकील ने त्वरित ट्रायल की मांग करते हुए कहा कि कोर्ट 23 सितंबर से पहले पीडि़ता के बयान दर्ज करने के निर्देश दे। 23 अप्रैल को निचली अदालत में सुनवाई होनी है।

गत 12 अप्रैल को सुप्रीमकोर्ट ने गुजरात सरकार को कोर्ट में गवाहों के जल्दी बयान कराने का निर्देश दिया था। उस समय कोर्ट ने आसाराम की जमानत पर तत्काल सुनवाई करने की मांग यह कह कर टाल दी थी कि जमानत अर्जी पर गवाहों के बयान होने के बाद विचार किया जाएगा।