मप्र को लगातार 5वीं बार कृषि कर्मण अवाॅर्ड, पंजाब-हरियाणा को भी छोड़ा पीछे

366
भोपाल. मध्यप्रदेश को लगातार पांचवीं बार केंद्र सरकार ने कृषि कर्मण अवार्ड दिया है। यह वर्ष 2015-16 में गेहूं के उत्पादन की श्रेणी में मिला है। प्रदेश को ट्रॉफी, प्रशस्ति-पत्र और 2 करोड़ रु. नगद पुरस्कार मिलेगा। केंद्र में कृषि और उद्यानिकी आयुक्त डॉ. एसके मल्होत्रा ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में पुरस्कार मिलने की सूचना देते हुए बधाई दी।मप्र ने पंजाब-हरियाणा को भी गेहूं उत्पादन में पीछे छोड़ा
                    • – सीएम शिवराज ने किसानों, कृषि विभाग के सभी अधिकारियों और कृषि विकास से जुड़ी सभी संस्थाओं को आगे इसी तरह से काम करने के लिए शुभकामनाएं दीं।
                      – इस अवार्ड के मिलने के साथ ही मध्यप्रदेश कृषि उत्पादन के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बन गया है। इस वर्ष प्रदेश की कृषि विकास दर भी 25 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
                      – पारंपरिक रूप से सर्वाधिक गेहूं उत्पादन वाले हरियाणा और पंजाब को भी मध्यप्रदेश ने पीछे छोड़ दिया है।
                      – यहां बता दें कि कृषि में नए आयाम स्थापित करने के कारण ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से कहा है कि कृषि आय को दो गुना करने का रोडमैप बनाएं।
                      – दो दिन बाद 23 अप्रैल को दिल्ली में होने वाली नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री इसका प्रेजेंटेशन देंगे।
                      – मप्र ने शिवराज सिंह चौहान के शासन में कई ऐसी स्कीमें बनाई हैं, जिसका आने वाले समय में दूसरे राज्य अनुसरण करेंगे।
                      – मुख्यमंत्री ने पिछले दिनों राज्य के अधिकारियों एपीसी पीसी मीणा और प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा के साथ बैठक की है। एक-दो दिन में रोडमैप फाइनल कर लिया जाएगा।
                      – बहरहाल, कृषि अवार्ड मिलने की स्पष्ट वजह यह थी कि गेहूं उत्पादन में वर्ष 2014-15 के मुकाबले वर्ष 2015-16 में 7.64 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है।
                      – वर्ष 2014-15 में 171.03 लाख टन गेहूं उत्पादन हुआ था, जो 2015-16 में बढ़कर 184.10 लाख टन हो गया है। मुख्यमंत्री का मानना है कि किसानों की लगन और कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और कृषि विभाग के मैदानी अमले के सहयोग से यह उपलब्धि हासिल हुई है।
                      प्रति हैक्टेयर उत्पादन बढ़ा
                      – प्रदेश में गेहूं की उत्पादकता बढ़कर 3115 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर हो गई है। पिछले साल यह 2850 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर किसानों को कई प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।
                      – इनमें सिंचाई, विद्युत, तकनीकी परामर्श, ब्याज रहित ऋण, मंडी प्रांगण में उपार्जन की ई-सुविधा मुख्य रूप से परिवर्तनकारी साबित हुई है।
                      – कृषि कर्मण अवार्ड के साथ-साथ प्रदेश के कृषक समाज के प्रतिनिधि के रूप में प्रदेश के 2 सर्वश्रेष्ठ गेहूं उत्पादक कृषकों, एक पुरुष कृषक तथा एक महिला कृषक को भी पुरस्कार के रूप में सम्मान स्वरूप दो-दो लाख रुपए की नगद राशि का पुरस्कार एवं प्रशस्ति-पत्र मिलेगा।