सिर्फ ब्लू व्हेल ही नहीं, इन खतरनाक जानलेवा वेबसाइट्स पर भी लगनी चाहिए रोक……

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खुदकुशी के लिए उकसाने वाली ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल चैलेंज को भारत सरकार प्रतिबंधित कर चुकी है। देश में किसी ऑनलाइन गेम को प्रतिबंधित करने का ऐसा मामला भले ही पहली बार सुनने में आया हो, लेकिन इंटरनेट पर ऐसे कई गेम हैं जिन्हें समय-समय पर विभिन्न देशों ने प्रतिबंधित किया है। भारत को भी ऐसे तमाम खतरनाक गेम को प्रतिबंधित करने पर विचार करना चाहिए।

एरोसोल चैलेंज
साल 2014 में चर्चा में आए इस गेम में किशोर अपनी त्वचा पर एक खास स्प्रे छिड़ककर खुद को नुकसान पहुंचा रहे थे। इसमें  कुछ बच्चे गंभीर रूप से जल गए थे।

फायर चैलेंज
इसमें लोग एक ज्वलनशील तरल से खुद को नुकसान पहुंचा रहे थे।

पास-आउट चैलेंज 
इस गेम में युवा अपने अजीबोगरीब कारनामों की रिकॉर्डिंग कर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे थे। साथ ही वैसा करने की चुनौती अपने मित्रों को दे रहे थे।

नेक्नोमिनेट 
यह एक ड्रिकिंग गेम था जिससे कई मौतें हुई थीं।

रेपले 
इसे महिला विरोधी अपराधों को बढ़ावा देने वाला गेम माना गया। इसके रिलीज होने के तुरंत बाद अर्जेंटीना, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड ने इस पर रोक लगा दी थी। मैनहंट 2, पोस्टल 2, थ्री सिस्टर स्टोरी, बुलाय और रिजरवॉयर डोग्स जैसे हिंसात्मक गेम पर भी विभिन्न देशों में पाबंदी है।

सुसाइड वेबसाइट और डेथ ग्रुप का जाल

सुजैन गोंजेल्स का मामला:
उन्नीस वर्षीय सुजैन गोंजेल्स अवसादग्रस्त थी। उसने ऑनलाइन मैसेजिंग ग्रुप पर लिखा, मैं बेवजह रोती हूं। इसमें मैं कुछ नहीं कर सकती, लेकिन मुझे लगता है कि मैं अपने शिकायती स्वभाव से दूसरों को भी तंग कर रही हूं। मुझे माफ करना। अच्छा रहेगा कि मैं दूर चली जाऊं।

खुदकुशी का उकसावा: 
गोंजेल्स खुदकुशी के लिए उकसाने वाली एक वेबसाइट के संपर्क में थी। वहां उसे बताया गया कि खुदकुशी कोई आपत्तिजनक चीज नहीं है। उसे खुदकुशी के तरीके भी बताए गए। कुछ ही दिनों बाद गोंजेल्स ने एक होटल में जहर खाकर खुदकुशी कर ली। यह 2003 का मामला है।

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आत्मघात का मंच :
ऐसी वेबसाइटों के यूजर खुदकुशी को लेकर चर्चा करते हैं
खुदकुशी के कदम-दर-कदम विभिन्न तरीके प्रस्तुत करते हैं
किसी यूजर की खुदकुशी को समूह की सफलता बताते हैं
नकारात्मक माहौल बनाकर खुदकुशी के लिए प्रेरित करते हैं
खुदकुशी को अपना नागरिक अधिकार समझते हैं
ऐसे समूह अपनी असल पहचान जाहिर नहीं करते

ऑनलाइन डेथ ग्रुप कैसे काम करते हैं
ऐसी वेबसाइट प्राय: सहानुभूति, समुदाय या विद्रोही फोरम के रूप में काम करती हैं
इनको लेकर ज्यादा जानकारी नहीं है अत: कोई एक निष्कर्ष निकालना कठिन है

चार साल में तीन गुना इजाफा
विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक वर्ष 2014 से 2017 के बीच ऐसी वेबसाइट, ब्लॉग और डिस्कशन फोरम की संख्या में तीन गुना इजाफा हुआ, जो युवाओं को खुदकुशी के विभिन्न तरीकों की जानकारी देती हैं।