सेंट्रल बैंक भोपाल के मैनेजर को भ्रष्टाचार के 15वें मामले में सज़ा

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भोपाल : सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की अरेरा हिल्स ब्रांच भोपाल में वर्ष 2006 -2009 के दौरान हुए करीब 32 लाख 78 हजार 700 रुपए के ऋण घोटाले के मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने तत्कालीन बैंक मैनेजर केके चौरसिया और तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर बसंत पावसे सहित शालीमार कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स के बादशाह खान और दलाल राजेन्द्र प्रसाद तिवारी को दोषी ठहराते हुए तीन- तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 12- 12 हजार रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई है।

सीबीआई के विशेष न्यायाधीश रवीन्द्र कुमार भद्रसेन ने यह फैसला सुनाया है। मामले के अनुसार अभियुक्त कमलेश कुमार चौरसिया सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के अरेरा हिल्स शाखा भोपाल में 12 जून 2006 से 2 सितंबर 2009 की अवधि के बीच में ब्रांच मैनेजर के पद पर पदस्थ था . कमलेश कुमार चौरसिया ने अपनी पद स्थापना के दौरान सहअभियुक्त और तत्कालीन असिस्टेंट मैनेजर वसंत पावसे के साथ मिलकर अपने पद का दुरुपयोग करते हुए सहअभियुक्त राजेंद्र प्रसाद तिवारी एवं बादशाह खान के दस्तावेजों की जांच किए बिना उन्हें करीब 32 लाख 78 हजार 700 रुपए से अधिक के लोन स्वीकृत कर दिए थे ।

सीबीआई ने मामले की शिकायत मिलने पर आरोपियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच के बाद सीबीआई की विशेष अदालत में चालान पेश किया था। मामले की खास बात यह है कि चौरसिया-बसंत पावसे को भ्रष्टाचार के 15 वें मामले में सजा सुनाई गई है। दोनों ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दलालों-बिल्डरों की मिली भगत से नियम विरूद्ध तरीके से लोन बांटे थे।

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