ब्रह्मलीन संत श्री भेरौदास जी की वर्षीय कल मनाई जाएगी ( पं विकास दीप )

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ब्रह्मलीन संत श्री श्री 1008 भेरौदास जी महाराज के जीवन के कुछ महत्वपूर्ण बातें जो मेने अपने दिल से अनुभव की है ।। ऐसे परम संत को सादर नमन ।।

30 अगस्त 2015 का दुःखद दिन हम कभी जीवन मे नही भूल सकते ।। हमारे गुरुदेव परम सिद्ध श्री श्री 1008 ब्रह्मलीन संत श्री भेरौदास जी सरकार भूलोक से ब्रह्मलोक की ओर प्रस्थान कर गए ।। उनकी जीवन यात्रा में कई लोक हित ओर जन कल्याण के लिए किए गए ऐसे कार्य जिनको हम कभी भुला नही सकते ।। गुरुदेव ने अपने जीवन मे कई वर्षों स्नान नही किया और उनके तप के प्रभाव से कभी ऐसा नही लगा कि सरकार ने वर्षो से स्नानः नही किया है । गुरु के स्थान से कभी कोई भूँखा नही आया ।। गुरु की बांसुरी की धुन से प्रकृति ने भी उनका कहा माना है । गुरु जिस स्थान पर रहे वहां कभी खेती में कमी नही आई । करह धाम से जुड़े गुरुओ की कृपा सदैव उनके ऊपर रही है ।। गुरु के देह त्यागने के कुछ दिन पूर्व ही सरकार को करह धाम पर गुरु का चोला प्राप्त भी हुआ था । मेरे अपने अनुभव से ऐसी परम शक्तियां किसी अवतार के रूप में ही जन्म लेकर अपना जीवन लक्ष्य पूरा करके प्रभु के परम धाम को चले जाते है । खेरे वाले हनुमान जी पर लगातार 7 बार लाखो लोगो को भण्डारे कराने के लिए कभी उन्होंने अपने जीवन काल मे किसी के घर कुछ मांगने के लिए नही गए । उनके भक्त और शिष्य स्वतः ही गुरु के सेवा में लग जाते रहे है । ग्वालियर सतन बाड़ा हाइवे से निकलने वाले साधु संत , यात्रा के लोग ओर जितने भी धर्म प्रेमी आश्रम पर आते थे उनको कभी गुरुदेव ने बिना भोजन के नही जाने दिया ।। गुरु की अपनी एक औरा थी जिसके प्रभाव से उनके शरण मे आये लोगो के दर्शन मात्र से मनोकामना पूरी होती रही है ।। सरकार की अपनी एक मौज थी ।। दुनिया को खीर मालपुआ खिलाकर स्वयं अंत मे पापड़ हाथ मे लेकर बड़े चाव से खाते थे । भूलोक से जाने के एक दिन पूर्व उन्होंने लोगो को आगाह कर दिया था कि आप खेरे वाले स्थान पर ही करह आश्रम की तरह भंडारे हुआ करेंगे । साथ ही मेरी मूर्ति भी मेरे सामने लगवा कर स्थापना करा दी जाए ।। पर हम भौतिक जीवन जीने वाले इस बात को नही समझ सके कि उनका ईशारा परम लोक की ओर ब्रह्मलोक की ओर जाने का था।
ऐसे कई मंदिर मस्जिदों पर रहकर अपना तप देकर उन धर्म स्थानों को जाग्रत किया ।। गुरुदेव ने सर्व धर्म को एक मानकर सबसे बड़ी मिसाल जब दी ।। जब उन्होंने अपने सबसे सुंदर भजन को लाखो की भीड़ में जब गाया ।।I

भजन :–
मक्का को हम हज कहते है -तीरथ कहते काशी को
पुण्य भूमि दोनों के दर्शन -काटत लख चोराषी को |
राम रहीम में अंतर नाही – एक है वो हम सबका साईं
राम रहीम में अंतर नाही ||
अपने प्रभु का नाम तू जप ले – अपने खुदा को याद तू कर ले |
सारा जग उसकी परछाई – राम रहीम में अंतर नाही ||
जीवन को संगीत बना ले – हर गम को एक गीत बना ले |
मेरी अंखिया अंखियाँ क्यों भर आयी -राम रहीम में अंतर नाही |
दूर खड़ा है तू किस डर से . मांग ले तू दाता के दर से
सबने मुरादे पूरी पाई , राम रहीम में अंतर नाही |

उन्होंने अपना पूरा जीवन ईश्वर भजन ओर लोक कल्याण में समर्पित किया ।। ऐसे परम दिव्य स्वरूप गुरु देव को सादर चरण वंदन , नमन ओर सादर श्रद्धांजलि आज हम उनकी याद में समर्पित करते है ।।

गुमनामी के अंधेरे में था
पहचान बना दिया
दुनिया के गम से मुझे
अनजान बना दिया
उनकी ऐसी कृपा हुई
गुरू ने मुझे एक अच्छा
इंसान बना दिया ।

गुरू बिना ज्ञान कहाँ,
उसके ज्ञान का आदि न अंत यहाँ।
गुरू ने दी शिक्षा जहाँ,
उठी शिष्टाचार की मूरत वहाँ।

अज्ञानता को दूर करके ज्ञान की ज्योत जलाई है,
गुरुवर के चरणों में रहकर हमने शिक्षा पाई है,
गलत राह पर भटके जब हम,
तो गुरुवर ने राह दिखाई है.।

गुरूदेव के श्रीचरणों में
श्रद्धा सुमन संग वंदन
जिनके कृपा नीर से
जीवन हुआ चंदन
धरती कहती, अंबर कहते
कहती यही तराना
गुरू आप ही वो पावन नूर हैं
जिनसे रौशन हुआ जमाना

जय गुरुदेव जय हो सरकार की ।।