-लावारिस शहर -25 -क्यों न, ‘शिवपुरी’ को ‘बेचिराग’ घोषित कर दिया जाये……???

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-लावारिस शहर -25 –

क्यों न, ‘शिवपुरी’ को ‘बेचिराग’ घोषित कर दिया जाये……
आज अचानक मन में ख्याल आया कि,
क्यों ना शिवपुरी को बेचिराग गांव घोषित कर दिया जाए….!

सरकारी फरमान के तहत
सारी जमीनों को ,व्यापारों को
राजकीय संपत्ति घोषित किया जाए
और दयनीय हालत में ‘जीवन जीने के आदी हो चुके बाशिंदों’ को जबरन अंत गांव की ओर रवाना कर दिया जाए ……।
जो लोग इस धरती से प्रेम लगा बैठे हैं …
‌उन्हें सरकारी कानून का डर दिखाकर…
अलगांव धकेल दिया जाए …..!

नफा -नुकसान दोनों ही सामने होगा ….
क्योंकि बद से बदतर हालत में भी जीवन जीने के अभ्यस्त होते जा रहे निकृष्ट लोगों को
अब धकियाना ही अंतिम विकल्प नजर आ रहा है……!
ऐसा करना लाजमी भी है क्योंकि ….,
बेरोजगारी के अभिशाप से जूझ रही शिव की पुरी
काम धंधों के लिहाज से पहले से ही दयनीय हाल में है…
प्रकृति की मार झेल रहा अन्नदाता पिछले कई वर्षों की तरह इस बार भी आपदा का मारा नज़र आ रहा है…….!
एक-एक करके इंसान को जीने के लिए अति आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी छिनती जा रही हैं …!
सिंध जलावर्धन योजना राजनीति का शिकार होकर पिछले 8 साल से बहुप्रतीक्षित बनी हुई है ….!
अफसरशाही सुने चारागाह में हवस(भूख शब्द सूक्ष्म हे…) मिटा रही है….!
जयपुर -पेरिस बनने वाले शहर में सीवेज प्लान ने पुरातन सभ्यता की याद दिला दी हैं….!
कांच जैसी सड़के रोज बनने और रोज मिटने के कारण सपनों में नजर आने लगी है …!
स्वास्थ्य सेवाओं की फजीहत किसी से छुपी नही है……
6 महीने से खैराती अस्पताल की icu में ताले लटके हे,लोग हर रोज चोखट पर दम तोड़ रहे हे……
(सुना है कि सरकार ने रहम खाकर 8 डॉक्टर हालिया आदेश में पदस्थ किये है,ईश्वर करे वे लावारिस शहर के खैराती अस्पताल में शुभागमन करे…..)
मन को भाने बाली, जनहितैषी हर योजना मृग मारीचिका बन जाती है…….!
सब कुछ होता हैं ,ढोलक की थापे भी बजती हे,किन्तु कुछ भी नही होता हैं…….!
दुखद….! दिलचस्प…..!किन्तु…?

यह सब भी तब,जब……
माननीय,अति माननीय,अति विशिष्ठ माननीय…
वो सब,हमारे जिले की शीर्ष राजनीति का शीर्ष नेतृत्व करते हे…..!
प्रमुख दलों का विजय पताका सारे हिंदुस्तान में
(शिवपुरी को छोड़कर…..)
फहराते हैं…..!

बहुत सोचा,इस अवसरवादिता पर…..
बहुत सोचा पीढ़ियो पुराने पारिवारिक सम्बन्धो की दुहाई के जुमले पर…….
बहुत सोचा चुनावी गठबंधन की अठखेलियों के बारे में….
बहुत सोचा तत्समय भूले-बिसरे लोग बहुत याद आने के बारे में…
बहुत सोचा माननीयो के प्रभुत्व के कारण “गेरो” का इस अंचल को दूध में से मक्खी की तरह बाहर फेंक देने के बारे मे……
सब कुछ सोचा…,और फिर ,बस यही सोचा, कि…
बेबजह दोषारोपण करने से भला आज तक हासिल भी क्या हुआ,सो क्यू न……,
एक बार,यह फरमान ही जारी कर दिया जाये,कि….
बा अदब….,
बा मुलाहिजा…,
होशियार…..,
प्राकृतिक- नैसर्गिक सौंदर्यो बाले इस नगर के बाशिंदों को
“दिवास्वप्न योजनाओं को धरातल पर चाहने की प्रवर्ति, कथनी को करनी में बदलवाने की लालची नीति,अति विषम परिस्थियों में ताउम्र संघर्ष के बजाय अधिक चीखने-चिल्लाने की गन्दी आदतो सहित तमाम अन्य कारणों “से
नर -मुक्त,क्षेत्र -मुक्त …
और कभी खूबसूरत रहे इस नगर को “बेचिराग” घोषित किया जाता है…..?????

हुक्म की तामील हो $$$$$$$$

जय हो…..,जय जय हो……!!!

खेर ….
मन के भाव थे,सो कह बैठे…
खुदा खेर करे…..
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-नाचीज-बृजेश तोमर-
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नोट- नाचीज कलमकार उन तमाम स्वजनों का तहे दिल से आभारी हे जिन्होंने तकनीकी कारणों से “लावारिस शहर” के क्रम में आये व्यवधान पर मुझे निरंतर व्यक्तिगत प्रेरित किया…! क्षमा सहित इसी अनवरत प्रेम का ताउम्र अभिलाषी….!
लावारिस शहर-25 के रूप में अग्रिम कड़ी प्रस्तुत है…!उक्त मत कलमकार का व्यक्तिगत मत है जिससे हर खासो-आम का सहमत होना जरुरी नही है…….!
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