क्यों परेशान है युवा पीढ़ी ( पं विकास दीप )

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क्यों परेशान है आज की युवा पीढ़ी :– पं विकास दीप शर्मा मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी 9425137382

हमारे पूर्वजो के नियमो को पालन न करने का परिणाम आज हम भुगत रहे है ।। प्राचीन समय मे जो नियम हमारे पूर्वज करते चले आ रहे थे आज हम उनको छोड़ चूके है जिनके कारण आज परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है । हर घर मे कोई न कोई उलझन कष्ट रोग बीमारी , मांगलिक उत्सव में रुकावट इत्यादि ।।

सीधा का दान ::– हमारे पूर्वज नित्य शनिवार मंगल मंदिरों पर अधिकतर घरो से सीधे का दान निकाला करते थे। जिसमें नवग्रहों का दान भी हो जाता था साथ ही मंदिर के पुजारी की आजीविका के लिए भोजन व्यवस्था भी होती थी । ओर नवग्रहों की शांति का कार्य भी इस रूप में हो जाया करता था ।।
जैसे :- नवग्रहों के रूप में गुड़, ओर गेहूं
सूर्य से सम्बन्धित , , चन्द्रमा के लिए पर चावल, आटा ,मंगल के लिये मसूर की दाल , बुध के लिए हरी मूंग की दाल ,गुरु के दान में घी , शुक्र के लिए शक्कर , शनि के लिए तेल और राहु के लिए काले उर्द का दान लिया जाता था। ।

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सत्यनारायण कथा का महत्व:- हमारे परिवारों में पहले नियम से अमावस पूर्णिमा घर मे सत्यनारायण की कथा होती थी ब्राह्मण भोजन हुआ करता था वो कोई कार्य नही बल्कि पूर्ण भावना से घर मे उत्सव स्वरूप मनाया जाता था फलस्वरूप घरो में कोई रोग कष्ट इतने नही हुआ करते थे जो आज के युग मे हम सब भोग रहे है ।।

सत्य नारायण भगवान् की पूजा का हिन्दू धर्म में बहुत अधिक महत्व होता हैं। किसी भी विशेष कार्य जैसे गृह प्रवेश, संतान उत्पत्ति, मुंडन, शादी के वक्त, जन्मदिन आदि शुभ कार्यो में सत्यनारायण की पूजा एवम कथा करायी अथवा स्वयं की जाती हैं। मनोकामना पूरी करने हेतु सत्यनारायण की कथा को कई लोग साल में कई बार विधि विधान से करवाते हैं। गरीबों एवं ब्राह्मणों को दान दक्षिणा देते हैं। कई लोग मानता के स्वरूप में भी सत्यनारायण की पूजा एवं कथा करते हैं और कई भगवान को धन्यवाद देने के लिए भी सत्यनारायण की पूजा करते हैं।


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गाय की सेवा :— गौ सेवा जो हमारे पूर्वज नियमित करते थे पर आज के काल मे गौ हत्या और गौ का संरक्षण भी सही नही हो पाता । अधिकतर लोग गाय को पाल रहे है लेकिन जब वो दूध देना बंद कर देती है तो रोडो पर खुला छोड़ देते है जिसके परिणाम सभी अच्छे से जानते है ।।
शास्त्र में कहा गया है कि
।।त्वं माता सर्वदेवानां त्वं च यज्ञस्य कारणम्।

त्वं तीर्थं सर्वतीर्थानां नमस्तेऽस्तु सदानघे।।

according तो science अगर गौ सेवा अच्छे से की जाये तो दूध, दही, घी तथा अन्य कई तत्त्वों का उत्पादन भी अच्छा होगा।
कहा जाता है की गाय के गोबर में ऐसे तत्व पाए जाते है जिससे कीटाणुओं का नाश होता है। इसलिए आज भी मिट्टी के घरो को गाय के गोबरो से लीपा जाता है ।
चर्म रोग व कीटाणुओं द्वारा होने वाली अन्य कई सारी बीमारीयों को गौ मूत्र से ठीक किया जाता है ।
गौ सेवा करने से ग्रह-नक्षत्र उचित हो जाते हैं।
जो लोग गौ की रक्षा व गौ सेवा करते है उनकी कभी भी अकाल मृत्यु (Premature death) नहीं होती है ।
और सबसे बड़ी बात यह है की किसी भी जिव की सेवा या उसे खाना खिलने से आपको अन्दर से अच्छा लगेगा |
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पित्र पूजा और तर्पण :– हमारे पूर्वज नित्य नेमित्य अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण ओर उनके लिये अमावस का दान नियमित समय समय पर उनको याद करके अपने कुल की रक्षा और सुख सम्पन्नता का आशिर्बाद लेते थे ।। पर आज के युग मे नई पीढ़ी के लोग इन सभी कार्यों को भुलाकर आधुनिकता की ओर जा रहे है ।। जिसके परिणाम स्वरूप वंश वृद्धि रुकना ओर घरो में मांगलिक उत्सव में बाधा आती जा रही है ।।

हमारा जीवन हमारे माता पिता का दिया हुआ जीवन है| हमारी आत्मा ने हमारे पिता के वीर्य में शरण लिया, माता के गर्भ मेंस्थापित हुआ और गर्भवास पूरा होने पर शरीर के रूप में आत्मा इस धरती पर जीवन के प्राराब्ध को पूर्ण करने के लिए प्रकट हुई|

हमारे माता पिता ने हमारे दादा नाना दादी नानी आदि के द्वारा इस धरती पर जन्म लिया| इसी तरह हमारे दादा दादी नाना नानी आदि, हमारे पड़ दादा पड़ दादी पड़ नाना पड़ नानी आदि से अवतरित हुई| यही है वंश परंपरा और यही हैं हमारे पूर्वज, ancestors और हम इनके वंशज| हम अपनी वंश परंपरा के आज की कड़ी हैं जिसे हमारे बच्चे आगे बढ़ाएंगे|

हम अपने माता पिता और पूर्वजों के ऋणी हैं जो हमारे साथ किसी न किसी कर्मानुबंधन से जुड़े हैं| अपने माता पिता और पूर्वजों के पूर्व जन्मों के कुछ कर्म हमसे जुड़े हैं| Scientifically भी देखें तो हमारे parents के genes ने हमारा निर्माण किया और हमारे parents का उनके parents ने| पं विकास दीप शर्मा मंशापूर्ण ज्योतिष शिवपुरी 9425137382 , 9993462153

पितृ कौन हैं?

पितृ एक अत्यधिक विकसित पूर्वज अस्तित्व हैं जो धार्मिक रूप से इतने उच्च हैं की वे अपने वंशज के आत्मा के उत्थान का काम करते हैं| जीवन की समस्त खुशियों और शुभ फलों के लिये पितरों के आशीर्वाद की आवश्यकता रहती है| अपने पूर्वजों को कृतज्ञता से याद करना और उनकी मुक्ति के लिये कर्म करने से हम उनके ऋणों से मुक्त हो सकते हैं और जिस कर्मानुबंधन से जुड़े हैं, उससे मुक्त हो सकते हैं|