ऑनलाइन ठगीः झारखंड के 100 गांव के युवाओं ने ठगी को बना लिया है रोजगार,ATM बंद होने का देते हे झांसा …

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झारखंड प्रदेश आजकल साइबर अपराधियों की वजह सुर्खियों हैं. बात चाहे हम देवघर का करौं, आसनबनी, चितरा घोरमारा, धनबाद जिले का निरसा, गोविंदपुर व टुंडी, गिरिडीह जिले का बेंगाबाद, गांडेय ही नहीं, कालाझरिया, झिलुवा, कांसीटांड़, सियांटांड़, शीतलपुर, मोहनपुर, सिकरपुसनी वो गांव हैं, जहां दिन-ब-दिन युवाओं की लाइफ स्टाइल बदलती जा रही है. कल तक जिनके पास बाइक नहीं थी आज वो कार से चल रहे हैं. जूते से लेकर कपड़े पहनने तक में फर्क आ गया है. चेहरे पर सनग्लास भी ब्रांडेड होता है. काम के नाम पर ये युवा अपने पास एक लैपटॉप रखते हैं…

हाथ में 2-3 मोबाइल और बैग में दर्जनों सिम
इन साइबर चोरों की पहचान आसान है. इनके हाथ में दो-तीन मोबाइल होते हैं और बैग में दर्जनों सिम होती हैं. साथ ही होती है उन लोगों की लिस्ट जो किसी भी बैंक का एटीएम कार्ड इस्तेमाल कर रहे होते हैं. एक मायने में यही इनके बिजनेस की लागत पूंजी है. जी हां, हम बात कर रहे हैं उन साइबर अपराधियों की जो एक फोन कॉल कर आपके बैंक एटीएम कॉर्ड की जानकारी मांगते हैं. और जैसे ही आप कॉर्ड की जानकारी उन्हें देते है तो वो पलक झपकते ही आपके खाते से ऑनलाइन रकम उड़ा देते हैं. जिन गांवों के नाम हमने आपको ऊपर बताए हैं वो झारखण्ड के जामताड़ा, देवघर, धनबाद आदि जिलों से हैं.

22 राज्यों की पुलिस दर्ज करा चुकी है आमद


सूत्रों की मानें तो शायद ही कोई ऐसा दिन जाता होगा जिस दिन किसी दूसरे राज्य की पुलिस करमाटांड और नारायाणपुर थाने में अपनी आमद दर्ज न कराती हो. स्थानीय पुलिस से गांव में छापा मारने के लिए मदद न मांगती हो. लेकिन साइबर अपराधी इतने शातिर है कि कुछ ही मामलों में वह पुलिस के हाथ लगे हैं. लेकिन पकड़े जाने के बाद कुछ ही दिन में जमानत मिल जाती है और फिर से अपना पुराना धंधा फ्राड कर दूसरे के खाते से रुपया निकालने का काम करते हैं. हाल ही में कर्नाटक, हरियाणा, यूपी की पुलिस ने झारखण्ड की पुलिस से संपर्क कर साइबर अपराधियों को पकड़ने के लिए मदद मांगी थी. करीब पांच दिन पहले ही छह से सात अपराधी पकड़े गए हैं.

करमाटांड क्षेत्र के 150 में से 100 गांव में ठगी
जानकारों की मानें तो करमाटांड़ थाना क्षेत्र में करीब 150 गांव आते हैं. लेकिन 150 में से 100 गांव ऐसे हैं जहां के करीब एक हजार युवक इस ऑनलाइन ठगी का अपराध कर रहे हैं. पुलिस से जुड़े सूत्रों की मानें तो किसी भी एटीएम कॉर्ड का नम्बर और उसका पिन जानने के बाद महज तीन से पांच मिनट में ये खाते को खाली कर देते हैं. इस काम में हर गांव से आठ से दस लोग लगे हुए हैं.

अब तक पकड़े जा चुके हैं 200 युवक
यूपी एसटीएफ से जुड़े सूत्रों की मानें तो हर राज्य की पुलिस झारखण्ड से साइबर अपराधियों धरपकड़ कर चुकी है. यूपी पुलिस ने भी कई साइबर अपराधियों को पकड़ा है. अगर झारखण्ड पुलिस के आंकड़ों पर निगाह डालें तो अभी तक जामताड़ा, देवघर, धनबाद आदि जिलों से करीब 200 साइबर अपराधियों को विभिन्न राज्यों की पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है.

एटीएम ब्लॉक होने का दिखाते हैं डर
झारखण्ड के जामताड़ा के एक गांव में बैठकर कैसे ठग देश के किसी भी कोने में किसी को भी अपनी ठगी का आसानी से शिकार बना लेते हैं. जानकार बताते हैं कि इन ठगों के पास हजारों मोबाइल नम्बर होते हैं. एक-एक कर ये सभी नम्बरों पर फोन करते हैं.जब कोई फोन उठाता है तो ये अपने आप को एसबीआई या रिजर्व बैंक का बताकर कहते हैं कि एक-दो दिन में आपका एटीएम कॉर्ड ब्लॉक हो जाएगा.

ऑनलाइन वेरिफिकेशन के नाम पर ठगी
फोन की दूसरी छोर पर कॉल रिसीव करने वाले ग्राहक की हरकतों को भांप कर कॉलर कहता है कि एक वैरीफिकेशन कॉल है. अगर ग्राहक झांसे में आ गया तो ये लोग ग्राहक से उसका कॉर्ड नम्बर मांगते है और कॉर्ड के पीछे लिख सीवी नम्बर बताने को कहते है. आपको झांसे में लेकर आपका पिन नम्बर भी मांग लेंगे. जैसे ही आप ये नम्बर बताते हैं तो कुछ ही देर में आपके बैंक खाते से पैसा निकलना शुरु हो जाता है. अब जब तक आप बैंक को फोन करेंगे, कॉर्ड ब्लॉक करने के लिए कहेंगे तब तो ये लोग अपना काम करके निकल चुके होते हैं.

सेलीब्रेटीज को भी लगा चुके हैं चूना
कुछ समय पहले पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के एक इंस्पेक्टर जामताड़ा के करमाटांड़ थाने पहुंचे. वहां अपना परिचय देकर आने का मकसद बताया. इंस्पेक्टर से मकसद सुनते ही करमाटांड़ थाने को मानों करंट लग गया. आखिर मामला एक केन्द्रीय मंत्री और केरल के एक सांसद से ठगी का था. ठगों ने मंत्रीजी से करीब पौने दो लाख और सांसद से करीब डेढ़ लाख रुपये की ठगी की गई थी. आनन-फानन में दोनों राज्यों की पुलिस की एक टीम बनाई गई. करमाटांड़ में ही कई जगह छापा मारा गया.

गिरोह के दो सदस्य हो चुके हैं गिरफ्तार
छापेमारी के बाद आखिरकार ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्य पुलिस की गिरफ्तर में आ गए. जानकारी करने पर मालूम हुआ है कि ये लोग पहले ही इसी तरह की ठगी में जेल जा चुके हैं. सूत्रों की मानें तो जामताड़ा के ये ठग मुम्बई में एक बड़ी फिल्मी हस्ती को भी शिकार बना चुके हैं. जिसके चलते मुम्बई पुलिस कई दिनों तक झारखण्ड में डेरा डाले रही थी.