जानिए कैसे होता हैं राष्ट्रपति चुनाव, किसके वोट की कितनी वैल्यू

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देश का नया राष्ट्रपति कौन होगा, इसके लिए आज वोटिंग होगी. सत्ताधारी एनडीए की ओर से बिहार के पूर्व गर्वनर रामनाथ कोविंद और विपक्ष की ओर से लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार मैदान में हैं. सोमवार को वोटिंग के बाद 20 जुलाई को यह पता चल जाएगा कि राष्ट्रपति कौन बनेगा. आपको बता दें कि हमारे देश में राष्ट्रपति चुनाव किसी आम चुनाव की तरह नहीं होते हैं, जहां पर आम जनता वोट डालती हो. इसका फैसला विधायक, सांसद की वोटों के आधार पर होता है.

*इलेक्टोरल कॉलेज से होता है राष्ट्रपति का मतदान*

भारत के राष्ट्रपति निर्वाचन कॉलेज द्वारा चुने जाते हैं. संविधान के आर्टिकल 54 में इसका उल्लेख है. इसमें संसद के दोनों सदनों तथा राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं. दो केंद्रशासित प्रदेशों, दिल्ली और पुद्दुचेरी, के विधायक भी चुनाव में हिस्सा लेते हैं जिनकी अपनी विधानसभाएं हैं.

*जनता क्यों नहीं सीधा चुन सकती राष्ट्रपति*

साल 1848 में, लुई नेपोलियन को लोगों के सीधी मत से राज्य के प्रमुख के रूप में चुना गया था, लुई नेपोलियन ने फ्रेंच गणराज्य को उखाड़ फेंका और दावा किया कि उनको जनता ने सीधा चुना है, तो वो ही फ्रांस के राजा है. इस घटना को ध्यान में रखते हुए, भारत के राष्ट्रपति अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं.

आपको बता दें कि राष्ट्रपति चुनाव जिस विधि से होता है उसका नाम है– आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के आधार पर एकल हस्तांतरणीय मत द्वारा. सभी सांसदों और विधायकों के पास निश्चित संख्या में मत हैं, हालांकि, हर निर्वाचित विधायक और सांसद के वोटों के मूल्य की लंबी गणना होती हैं.

*विधायकों के वोट की ताकत*

राज्यों के विधायकों के मत की गणना के लिए उस राज्य की जनसंख्या देखी जाती है. साथ ही उस राज्य के विधानसभा सदस्यों की संख्या को भी देखा जाता है. वोट का अनुपात निकालने के लिए राज्य की कुल आबादी से चुने गए विधायकों की संख्या से विभाजित किया जाता है. इसके बाद जो अंक निकलता है, उसे फिर 1000 से भाग दिया जाता है. फिर जो अंक प्राप्त होता है, उसी से राज्य के एक विधायक के वोट का अनुपात निकलता है.

*सांसद के वोट की ताकत*

सांसदों के मतों के मूल्य करने का तरीका थोड़ा अलग है. सबसे पहले पूरे देश के सभी विधायकों के वोटों का मूल्य जोड़ा जाता है. जो लोकसभा और राज्यसभा में चुने हुए सांसदों की कुल संख्या से भाग दिया जाता है. फिर जो अंक प्राप्त होता है, उसी से राज्य के एक सांसद के वोट का मूल्य निकलता है. अगर इस तरह भाग देने पर शेष 0.5 से ज्यादा बचता हो तो वेटेज में एक का इजाफा हो जाता है.

 

वोटों की गिनतीराष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार की जीत सिर्फ सबसे ज्यादा वोट हासिल करने से नहीं होती, साथ ही उसे सांसदों और विधायकों के वोटों के कुल मूल्य का आधा से ज्यादा हिस्सा हासिल भी करना पड़ता है. आसान शब्दों में चुनाव से पहले तय हो जाता है कि जीतने के उम्मीदवार को कितना वोट या वेटेज हासिल करना होगा. उदाहरण के लिए, यदि 10,000 वैध वोट हैं, तो उम्मीदवार को (10,000 / 2) +1 की आवश्यकता होगी, जो कि 5001 मतों के बराबर है.

*क्या कहता है अंक गणित?*

राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 776 सांसदों के अलावा विधानसभाओं के 4120 विधायक वोट डालेंगे. यानी कुल 4896 लोग मिलकर नया राष्ट्रपति चुनेंगे. राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया के मुताबिक इन वोटों की कुल कीमत 10.98 लाख है.

*कोविंद की जीत तय!*

बता दें कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है, जिसके अगले दिन यानी 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति पदभार ग्रहण करेंगे. सियासी समीकरणों को देखें तो इस चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत पक्की मानी जा रही है. राष्ट्रपति चुनाव की दौड़ में शामिल दोनों उम्मीदवार रामनाथ कोविंद और मीरा कुमार दलित समुदाय से आते हैं और उन्होंने देशभर में घूम-घूम कर विधायकों का समर्थन हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की है.

 

आंकड़ों की बात की जाए तो बिहार के पूर्व राज्यपाल कोविंद की दावेदारी मजबूत नजर आ रही है, क्योंकि उन्हें एनडीए के अलावा जेडीयू और बीजू जनता दल (बीजेडी) जैसे विपक्षी दलों का भी समर्थन हासिल है. यहां जेडीयू के पास निर्वाचक मंडल का कुल 1.91 फीसदी वोट है, जबकि बीजेडी के पास 2.99 फीसदी वोट है. इसके अलावा तेलंगाना में सत्तारूढ़ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के पास 2%, ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) का एक गुट (5.39 %) और वाईएसआर कांग्रेस (1.53%) ने भी कोविंद के पक्ष में मतदान करने की घोषणा की है.