राष्ट्रपति चुनावः जानिए , दुनिया के पांच बड़े देशों में केसे चुने जाते हैं राष्ट्रपति…..

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चीन: राष्ट्रपति का चुनाव नेशनल पीपुल्स कांग्रेस (संसद की तरह प्रतिनिधि सभा) करती है। हालांकि कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना का महासचिव ही राष्ट्रपति बनता है। राष्ट्रपति के पास एग्जीक्यूटिव में सबसे ज्यादा ताकत होती है। मालूम हो, चीन में एक पार्टी राज है। यानी वहां केवल कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना ही सरकार बनाती है। इस तरह पार्टी के ही पदाधिकारी सरकार में बने रहते हैं। पार्टी महासचिव के लिए कम्युनिस्ट पार्टी राष्ट्रपति पद आरक्षित रखती है।

रूस

राष्ट्रपति को दो राउंड में चुना जाता है। यहां राष्ट्रपति पहले 4 साल के लिए चुना जाता था, लेकिन 2012 में संशोधन कर कार्यकाल को 6 साल कर दिया गया। हालांकि वहां लगातार 2 टर्म से ज्यादा बार एक ही आदमी प्रेसीडेंट नहीं चुना जा सकता है। यानी अगर कोई 2012 में चुनाव जीता है तो वह 2018 में भी जीतकर राष्ट्रपति बन सकता है। लेकिन 2024 में उसे लड़ने की अनुमति नहीं होगी। चुनाव लड़ने के लिए उसे 2030 का इंतजार करना होगा।

जर्मनी

भारत की तरह जर्मनी में भी राष्ट्रपति “औपचारिक प्रमुख” ही होता है। एग्जीक्यूटिव की वास्तविक शक्ति “चांसलर” के पास होती है। यहां जनता सीधे तौर पर चुनाव में हिस्सा नहीं लेती। राष्ट्रपति का चुनाव फेडरल कन्वेंशन करती है। फेडरल कन्वेंशन में संसद (बंडस्टेग) के सदस्य और प्रांतों की विधानसभा द्वारा चुने गए सदस्य होते हैं। बंडस्टेग से 539 सदस्य होते हैं। वहीं 16 प्रांतों की विधानसभाएं उनकी आबादी के अनुपात में बंडस्टेग के बराबर सदस्यों को चुनती हैं। खास बात यह है कि विधानसभा द्वारा चुने गए फेडरल कन्वेंशन के सदस्यों का प्रांतीय विधानसभा का सदस्य होना जरूरी नहीं होता।

अमेरिका

राष्ट्रपति चुनाव अप्रत्यक्ष तरीके से इलेक्टोरल कॉलेज के जरिए होता है। इलेक्टोरल कॉलेज में इलेक्टर्स वोट करते हैं। इलेक्टोरल कॉलेज में हर राज्य से अलग-अलग संख्या में इलेक्टर्स शामिल होते हैं। राज्यों से इलेक्टर्स की संख्या संसद (कांग्रेस) के दोनों सदनों (हॉउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव और सीनेट) में उस राज्य के प्रतिनिधियों की संख्या के बराबर होती है। यही इलेक्टोरल राष्ट्रपति का चुनाव करता है। ज्यादातर राज्य अपने राज्य में बहुमत पाने वाले प्रत्याशी को पूरे इलेक्टोरल देने की पॉलिसी अपनाते हैं।

फ्रांस

जनता सीधे राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालती है। राष्ट्रपति दो राउंड की वोटिंग से चुना जाता है लेकिन राष्ट्रपति बनने के लिए पूर्ण बहुमत जरूरी है। यानी सिर्फ सबसे ज्यादा वोट पाने से काम नहीं बनेगा। पूर्ण बहुमत के लिए 51% वोट लाने होते हैं। अगर पहले राउंड में किसी को इतने वोट नहीं मिलते तो दूसरे राउंड की वोटिंग होती है लेकिन इनमें वो कैंडिडेट शामिल नहीं होते, जिन्हें पहले राउंड में 12.5% से कम वोट मिलते हैं। दूसरे राउंड में दोबारा वोटिंग होती है। इनमें वोटर्स अपना वोट दोबारा बदल भी सकते हैं। फिर इनके जरिए प्रेसीडेंट का चुनाव होता है।