किसानों का कर्ज माफ करे या कुर्सी छोड़े सरकार : सिंधिया

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सतना। यूपीए सरकार ने पूरे देश के किसानों के लिये 72 हजार करोड़ रूपये की माफी योजना लागू की। तो फिर आज इस सरकार को कर्ज माफी के लिये संकोच किस बात की है। संकोच इस बात की है कि ये सरकार सूटबूट वालों की सरकार है, इसलिये इस सरकार को खजाने की चिंता है किसानों की चिंता नहीं है।

उक्त बातें पूर्व केन्द्रीय मंत्री व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार सुबह सतना अल्प प्रवास के दौरान सर्किट हाऊस में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कहीं। उन्होंने कहा कि किसानों का कर्ज माफ करें या फिर ये सरकार को बर्खास्त किया जाए। सिंधिया ने केन्द्र व राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जब किसान कर्ज माफी की गुहार लगा रहा है तो सरकार कर्ज माफ करने की हिम्मत क्यूं नहीं जुटा पा रही । बेरोजगारी के मुद्दे पर कहा कि एक फीसदी लोगों को भी रोजगार दिला पाने में असफल रही है।

समर्थन मूल्य में नहीं हुआ इजाफा

सिंधिया ने कहा कि किसानों की लागत में जहां बढ़ोत्तरी हो रही है, वहीं पिछले तीन साल के मोदी कार्यकाल में सर्मथन मूल्य में एक भी इजाफा नहीं किया गया। जबकि यूपीए सरकार के कार्यकाल के आंकड़ों देखा जाए तो पता चल जायेगा कि कौन सी सरकार किसानों के कल्याण के लिये काम कर रही है। यूपीए सरकार के आखिरी तीन साल के कार्यकाल में कृषि का विकास दर 3.6 फीसदी रहा। जबकि इस सरकार में तीन साल का कार्यकाल देखे तो कृषि विकास दर सिर्फ 1.7 प्रतिशत तक सीमित है। इसी तरह से सूखा, ओलावृष्टि , अतिवृष्टि में कोई मुआवजा राशि किसानों को नहीं मिली।

क्यूं नहीं घटे डीजल के दाम

सिंधिया ने कहा कि पेट्रोलियम के क्षेत्र में जहां अंतराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम के दाम में 60 से 70 प्रतिशत गिरावट आई , लेकिन डीजल के दाम में कोई गिरावट नहीं आई। पहले भी 65 रूपये था और आज भी 65 रूपये है। जब पाकिस्तान में डीजल के दाम 52 रूपये है श्रीलंका मेें 42 रूपये है तो भारत में डीजल का भाव 65 रूपये क्यूं और मप्र में सबसे अधिक 28 प्र्रतिशत टैक्स क्यूं लगाया जा रहा है। इस तरह किसानों का गला घोंटने का काम किया जा रहा है और यही स्थिति होने की वजह से किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

ढोंग नौटंकी समाप्त

सिंधिया के अनुसार मुख्यमंत्री कल तक किसान को भगवान और खुद को पुजारी कहते थे आज वो मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि कर्ज माफी कोई मुद्दा नहीं है। जहां पूरे प्रदेश में किसान आत्महत्या कर रहे हैं और मंदसौर की घटना से तो सभी वाकिफ है। जिस सरकार को जिम्मा दिया जाता है लोगों की रक्षा के लिये , यदि वो सरकार लोगों की जान से खेले तो प्रजातंत्र रह ही नहींं जाता। अब मुख्यमंत्री माफी मांगने की बजाय उपवास में बैठ जाते हैं। ढोंग , नौटंकी करने का समय अब समाप्त हो चुका है। अब समय आ गया है या तो किसान को उसकी मेहनत का दाम दो या फिर सरकार को बर्खास्त करो।

रह गई होगी कमी

पिछले चुनावों मेें कांग्रेस को लगातार मिल रही हार के संबंध में पूछने पर उन्होंने कहा कि पार्टी के इतिहास में या सफर में उतार चढ़ाव लगा रहता है। कभी आदमी आसमान में चल रहा होता है तो कभी जमीन में चलता है। पिछले चुनावों के दौरान हो सकता है कि हमारी कुछ कमियां रही हैं, हम लोगों के आशाओ के अनुरूप हम अपनी सोच और विचार से लोगों को अवगत नहीं करा सके होंगे। जिसके चलते आज हम विपक्ष में बैठे हैं। लेकिन हमारी जिम्मेदारी है कि विपक्ष की भूमिका सही ढंग से निभाएं और लोगों का विश्वास जीत सके।