उसने मुझसे कहा, ‘मैं बस इसी काम के लिए बनी हूं’- द बीट्रेड गर्ल

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रॉकडेल की वह 14 वर्षीय मासूम आखिरकार बोल उठी. एशियन सेक्स गैंग्स यानी रिंग्स गैंग की चंगुल में आई मासूम को गैंग के तीन सदस्यों ने एक दिन अचानक रास्ते से उठा लिया था और रेजर ब्लेड की नोक पर उसके साथ कई बार रेप किया. ये मासूम उन 47 मासूम बच्चों में से एक थी, जिन्हें गैंग एक-एक करके अपनी हवस और वहशीपन का शिकार बना चुका था. हालांकि वर्ष 2012 में दोषियों को ब्रिटिश कोर्ट सजा सुना चुकी है. यह दर्दनाक मामला एक बार फिर सुर्खियों में इसलिए आ गया  है, क्योंकि गत 3 जुलाई को बीबीसी वन द्वारा प्रोड्युस द बीट्रेड गर्ल नामक एक डाक्युमेट्री टेलीकास्ट की गई. इस डाक्यूमेंट्री में दरिंदों की दरिंदगी की शिकार मासूमों की आपबीती है, जिसे सुनकर आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है.

                        मैं रॉकडेल स्थित अपने घर में थी. थोड़ी सी नशे थी शायद. तभी मैंने                               महसूस किया कि जैसे मेरा कमरा लॉक हो गया हो या किसी ने कमरे को                           लॉक कर दिया था. थोड़ी देर में ही वो मेरे कमरे में दाखिल हो गए थे और                           मुझे उठाकर पास पड़े बेड पर फेंक दिया था. वो हंस रहे थे.

                        एक आदमी के हाथ में रेजर ब्लेड था. वह मेरे करीब आकर बोला, मैं तुम्हें                         इस रेजर ब्लेड से काटने जा रहा हूं…बोलो क्या तुम चाहती हो कि मैं यह                           करूं? मैं बदहवास उसे देखे जा रही थी और वह रेजर ब्लेड मेरे गले के                               करीब ले आया था. इतने में एक दूसरा आदमी बोला, चुपचाप बेड पर लेट                           जाओ और मैं लेट गई.


                        रेजर ब्लेड वाला आदमी धीरे-धीरे मेरी ओर बढ़ा चला आ रहा था और रेजर                         ब्लेड को मेरे गले की सीध में टिका दिया. बोला कि अगर मैंने शोर मचाया                         अथवा विरोध किया तो वह मेरी गर्दन को काट देगा. यह कहकर वह हंसा.                         मेरे कमरे में उस समय तीन आदमी थे और तीनों के तीनों शिकारी की तरह                         मुझे देख रहे थे.

                       अब तीसरे आदमी की बारी थी शायद. वह मेरे करीब आया और खींचकर                            उसने मेरी पैंट उतार दी. मैं बीमार थी, लेकिन उन पर शायद हवस सवार                            था. वह नहीं माना और मेरे ऊपर सवार हो गया. जब तीसरा आदमी मेरा रेप                        कर रहा था तब भी रेजर ब्लेड वाला आदमी मेरे गले के पास खड़ा था ताकि                        मैं दर्द से चिल्ला न पाऊं. यह सिलसिला काफी देर तक चला और मैं बस दर्द                        ने कांपती रही.

                       जबकि दूसरा आदमी मेरा रेप होता चुपचाप किनारे खड़ा होकर देख रहा था.                        एकाएक वह उठा और रेजर ब्लेड संभाले हुए आदमी से बोला, रेजर को मेरे                          गर्दन के पास ही रखना और मेरे साथ ओरल सेक्स करने लगा. उस दौरान                          वह तीसरा आदमी लगातार मेरा रेप करता रहा और मुझे पूरी आशंका थी कि                        मेरा गला आज रेजर ब्लेड से कट कर ही रहेगा.

 

                                                                                                      – पीड़िता की आपबीती

Crime, Crime in UK:

डाक्यूमेंट्री में दिखाई गई यह लड़की उन 47 मासूमों में से एक थी, जिन्हें पाकिस्तानी दरिंदों की दरिंदगी का सामना करना पड़ा था. रेप की शिकार मासूमों में कई मासूम की उम्र तो 10 से 11 वर्ष के बीच थी. यह घटना वर्ष 2005 के आस पास की है जबकि वर्ष 2012 में एशियन सेक्स गैंग के 9 दोषियों को कोर्ट द्वारा सजा सुनाई गई, जिनमें गैंग लीडर शबीर अहमद भी शामिल था. शबीर को रेप जैसे गंभीर अपराध के लिए 22 वर्ष की सजा सुना दी गई थी.

लेकिन जांच से जुड़े ग्रेटर मैनचेस्टर पुलिस और सोशल सर्विस की बड़ी कमियां भी उजागर हुईं, जो पिछले 8 वर्षों तक के लंबे अवधि तक मासूमों के साथ हो रहे हादसों और उनके सबूतों को सिरे नकारते आ रहे थे. एशियन सेक्स गैंग के सभी 9 दोषी सदस्य मुस्लिम थे. इनमें से 8 पाकिस्तानी और एक अफगानी था।

मेनचैस्टर पुलिस की नाकामी से शिकार हुए मासूम
वर्ष 2004 की शुरुआत में सबसे पहले रेप की शिकार हुईं मासूमों के केस को पंजीकृत करने वाली रॉकडेल क्राइसिस हस्तक्षेप दल की मैनेजर सराह रॉबॉथम ने बताया कि उन्होंने मेनचैस्टर पुलिस और सोशल सर्विस को तकरीबन 181 बार कॉल किया होगा, लेकिन मासूमों की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया. उन्होंने बताया कई बार तो दरिंदों की शिकार हुई डरी और बदहवास लड़कियों को पीड़ा में रातभर रात अकेले गुजारनी पड़ी और कई बार तो उन्हें पुलिस से मदद के लिए सुबह तक इंतजार करना पड़ा.

बकौल रॉबॉथम, दरिंदों की शिकार हुई 47 लड़कियों में से एक मासूम से रेप के बाद कीचड़ में फेंक दिया गया था और उसे घर तक पहुंचने के लिए लगभग 10 किलोमीटर पैदल चलकर जाना पड़ा था. उन्होंने मासूम को रेप के बाद चलती कार से कीचड़ में फेंक दिया था. उसके साथ एक से अधिक लोगों ने क्रूर तरीके से रेप किया था.

उन्होंने बताया, हमने हर बार पुलिस को कॉल करके बुलाने की कोशिश की, लेकिन हर बार हमसे कहा जाता कि पुलिस तब तक कुछ नहीं कर सकती है जब तक कोई पीड़ित सामने नहीं आती है और पुलिस तक पहुंची कोई पीड़ित अगर बयान देने को राजी होती है तभी इस केस में पुलिस कुछ आगे कार्रवाई कर सकती है. चूंकि ऐसे क्रूर हालात से गुजरी लड़कियां अक्सर कुछ कहने और सुनने की हालत में नहीं रहती हैं.

बीबीसी की डाक्यूमेंट्री द ब्रीटेड गर्ल को दिए एक चौकाऊ बयान में डेटेक्टिव कांस्टेबल मार्गरेट ओलिवर बताती हैं कि वर्ष 2005 में एशियन सेक्स गैंग के खिलाफ उन्होंने एक उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश की थी, जिसे ‘ऑपरेशन आगस्टा’ के नाम से जाना जाता है.

ओलिवर ने बताया कि उन्होंने इस मामले पर एक रिपोर्ट भी तैयार की थी, लेकिन आश्चर्यनजक रुप से जांच को बंद कर दिया गया.ओलिवर ने अपनी उक्त रिपोर्ट 13 वर्षीय एक पीड़िता विक्टोरिया अगोलिया के पत्र मिलने के बाद तैयार की थी, जो यौन उत्पीड़न और हेराइन के ओवरडोज के कारण मारी गई थी.

ओलिवर के मुताबिक उन्हें भरोसा ही नहीं हुआ, क्योंकि यह एक तरह से संगठित सेक्सुअल क्राइम था, क्योंकि दरिंदे मासूमों को टारगेट करके उठाते थे. लेकिन मेनचैस्टर पुलिस ने यह जानने की कभी कोशिश ही नहीं की कि वहां कुछ अपराध हो रहा है और केस को बंद कर दिया. उन्होंने बताया कि केस से जु़ड़े 9 दरिंदों की गिरफ्तारी और उन्हें दोषी ठहराए जाने के बाद भी मेनचैस्टर पुलिस के डाटाबेस से एक पीड़िता द्वारा दिए कई साक्षात्कार गायब कर दिए गए.

बकौल ओलिवर, जब एक मासूम ने पुलिस को बताया कि उसके साथ करीब 30 लोगों ने रेप किया है, तो मेनचैस्टर पुलिस ने उसके आरोपों को दर्ज करना भी मुनासिब नहीं समझा, जो कि घोर लापरवाही थी जबकि एक पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी होती है कि वह हर एक सबूत को दर्ज करे. भले ही वह जरूरी हो या नहीं?


                   उनमें से एक ने कहा कि मैं इसी काम के लिए ही बनी हूं और मुझसे कहता कि                    थोड़ी सी कोशिश करने पर मुझे भी इसमें रुचि हो जाएगी और ऐसा महसूस                        करने लगूंगी कि जैसे मैं खुद ऐसा ही चाहती थी.वह मुझे लंदन, हडर्सफील्ड,                        ब्रॉडफोर्ड और बर्मिंघम जैसे जगहों पर लेकर गया और एक दिन मेरी आंख खुली                    तो मैं एक खंडहर जैसे घर में थी, जिसमें एक बेड पड़ा हुआ था. जब मैं सोकर                      उठी तो मुझे नहीं पता था कि मैं कहां थी अथवा वह मुझे कहां लेकर आ गया                      था. मेरे बदन पर कोई कपड़ा नहीं था, जमा देने वाली ठंड में दूर-दूर तक कोई                      नहीं दिख रहा था.

 

                                                                                                               -13 वर्षीय पीड़ित

डाक्यूमेंट्री इस बात का भी खुलासा करती है कि ब्रिटेन में हो रहे ऐसे अपराधों को छुपाया गया और जब काइले की सांसद एन क्रीयर ने उक्त मामले को उठाने की कोशिश की तो उन्हें रेसिस्ट की तरह पेश किया गया. एक अनाम पीड़ित के पिता ने बताया कि वह बेहद सदमे और गुस्से से भर गया जब ठोस सबूत के बादजूद उसकी बेटी के साथ हुए रेप के कई केस को जबरन बंद कर दिया गया.

पिता के मुताबिक जब उसकी बेटी ने मेनचैस्टर पुलिस को उसके साथ हुए रेप के बार में बताया तो पुलिसवाले का जबाव चौकाने वाला था, क्योंकि उसको मेरी पीड़ित बेटी के बयान पर बिल्कुल भरोसा नहीं हुआ. मैं पुलिसवाले के व्यवहार से चकित था, क्योंकि कोई और तरीका नहीं था, जिससे उसे समझाया जा सके. मैंने कोशिश की थी कि पुलिस हमारी बातों पर भरोसा करे, लेकिन हम फेल हो चुके थे.

                   एक बार मैं ओल्डेम स्थित अपने घर में अकेली थी और शराब पी रही थी. थोड़ी                    देर में ही होशो-हवाश में नहीं रह गई थी और जब होश में आया तो मुझे नहीं                        मालूम था कि मैं कहां हूं, मैं इधर-उधर घूम नहीं पा रही थी. मैं एक सिंगल बेड                    पर थी और मेरे बगल में डबल बेड लगा हुआ था.

                   तभी कुछ हलचल हुई और कुछ लोग उस कमरे में दाखिल हुए, जहां मुझे बेड से                    बांध कर छोड़ा गया था. शायद वो मेरे होश में आने का इंतजार कर रहे थे.                          इसके बाद जो हुआ एक नर्क से भी बदतर था. एक के बाद एक कमरे में आए                      कईयों ने मेरे साथ बारी-बारी से रेप किया. रेप के दौरान वो जोक कर रहे थे,                        जोर-जोर से हंस रहे थे. मैं बेड से बंधी हुई थी और हिल-डुल भी नहीं पा रही थी.                    उनके लिए मैं महज एक मांस का टुकड़ा भर थी और सिर्फ रहम की भीख मांग                      सकती थी.

                   उस कमरे में जो कुछ हो रहा था या मेरे साथ जो कुछ हो रहा था मैं उसे महसूस                    कर पा रही थी. मैंने देखा दो लोग एक लड़की के साथ कमरे में दाखिल हुए.                        ऐसा लगा जैसे वह लड़की खुद वहां चलकर आई हो. उसने मुझे पलटकर देखा                      और बोली, तुम्हें इसकी आदत पड़ जाएगी, हम सब यह करते हैं

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                                                                                                                  – पीड़ित A 

वर्ष 2010 में जब केस को दोबारा खोला गया तो जांच का जिम्मा एक बार फिर मार्गरेट ओलिवर को सौंपा गया. उनसे कहा गया था कि वो पीड़ितों को बयान देने के लिए आगे लाएं और यह आश्वासन दिया गया था कि उनकी बातें सुनी जाएंगी. लेकिन एक बार ओलिवर के हाथ हताशा लगी जब एक और बार पीड़िता की गवाही रद्द कर दी गई.

बकौल ओलिवर, मैंने उन बच्चों को न्याय दिलाने के लिए अपना सब कुछ झोंक दिया था और उन्हें और उनके परिवारों को आश्वासन दिया था कि जो ऑपरेशन आगस्टा के दौरान हुआ वह दोबारा नहीं होगा, लेकिन एक बार फिर मैं हार गई थी. मैं इस फैसले से बेहद निराश हुई थी.

                    जब मैं 14 वर्ष की रही हूंगी तब मेरा यौन उत्पीड़न शुरू हुआ और यह पूरे 4                       वर्ष तक चला. मुझे ठीक से याद नहीं है, लेकिन तकरीबन 50 से अधिक लोगों                     ने मेरे साथ जबर्दस्ती की होगी. मुझे खुद से घृणा हो रही थी कि मेरे साथ इतने                     लोगों ने सेक्स किया. इस दुर्घटना के बाद मैं एक बाक्स में बंद सी हो गई और                     मेरे लिए उस बॉक्स से निकलकर किसी को कुछ भी बताना बहुत ही मुश्किल                       काम था.

 

                                                                                                           -पीडि़त M

मार्गरेट का मानना है कि अभी भी सैकड़ों लोग एशियन सेक्स गैंग को संचालित कर रहे हैं, वो जो वर्ष 2005 में सक्रिय थे. उन्होंने आगे कहा कि अगर मेनचैस्टर पुलिस वर्ष 2005 में हुए अपराधों का संज्ञान समय रहते ले लेती तो निश्चित रुप से एशियन सेक्स गैंग की सक्रियता को काबू में किया जा सकता था. क्योंकि एक समुदाय और एक देश के रुप में हम एक ऐसे अपराध से निपटने की कोशिश कर रहे थे, जो एक भयानक महामारी की तरह व्यापक रुप ले चुकी थी.