कोर्ट में भी सुस्त एमपी पुलिस, समीक्षा बैठक में चौंकाने वाले खुलासे

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मध्यप्रदेश पुलिस हाईकोर्ट की पैरवी करने में फिसड्डी साबित हो रही है. पुलिस से जुड़े मामलों में ठीक तरीके से पैरवी नहीं होने के चलते कोर्ट में पुलिस को मुंह की खानी पड़ती है. पुलिस मुख्यालय की लचर सिस्टम की वजह से कोर्ट में लंबित केसों की संख्या बढ़ती जा रही है.

हाल ही में पुलिस मुख्यालय में प्रदेश की हाईकोर्ट में पुलिस से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा की गई. इस समीक्षा में लंबित केसों से जुड़े प्रभारी पुलिस अधिकारी भी शामिल हुए थे.

बैठक में खुलासा हुआ कि हाईकोर्ट में चल रहे केसों में ठीक तरीके से पैरवी नहीं होने के कारण प्रभारी अधिकारियों को मुंह की खाना पड़ रही है. पुलिस मुख्यालय की लापरवाही का ही नतीजा है कि जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर में दस से ज्यादा अवमानना के केस चल रहे हैं.

समीक्षा में विधि, लेखा विभाग, कार्मिक और सीआईडी के अधिकारियों ने पुलिस के प्रभारियों अफसरों को पेंडिंग केस में होने वाली त्रुटि और उसके समाधान की जानकारी भी दी. लेकिन पुलिस सिस्टम की सुस्त पैरवी के चलते हर साल लंबित मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है.

प्रदेश की अलग-अलग हाईकोर्ट में पुलिस से जुड़े लंबित केस पर नजर डालें, तो पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली ही सामने आ रही है. आंकड़ों के अनुसार इस साल 2017 में जून तक करीब 100 मामले जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर हाईकोर्ट में लंबित हैं. ये आंकड़ा पांच महीने के हैं.

जबलपुर हाईकोर्ट में पेंडिंग केस

-विभागीय जांच, निलंबन केस – 20
-भुगतान से संबंधित केस – 16
-पदोन्नति के केस- 3
-स्थानांतरण के केस- 2

ग्वालियर हाईकोर्ट में पेंडिंग केस

-अनुकंपा नियुक्ति केस – 1
-विभागीय जांच, निलंबन केस – 13
-भुगतान संबंधित केस – 3
-पदोन्नति के केस – 1

इंदौर हाईकोर्ट में पेंडिंग केस

-विभागीय जांच, निलंबन केस – 15
-भुगतान संबंधित केस – 5
-जाति प्रमाण पत्र केस – 1
-पदोन्नति केस – 5
-अनुकंपा नियुक्ति केस – 3
-आवास संबंधित केस – 2
-जन्म दिनांक से संबंधित केस – 1
-पुलिस सेवा से जुड़े दूसरे केस – 4

(1 जुलाई 2017 तक के ताजा आंकड़े)

प्रदेश की सबसे बड़ी अदालत में पुलिस का ये हाल है, तो दूसरी अदालतों में चल रहे मामलों की स्थिति का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है.