रिस्ते ओर ग्रह

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खराब ग्रह और बिगड़ते रिश्ते

प्रकृति ने हमे सब कुछ दिया, उसका आनन्द हम सब अपने अपने अनुसार ले रहे हैं । लेकिन प्रकृति के द्वारा दिये गए सम्बन्धो को हम कितना निभा रहे ये हमारे ऊपर निभर्र करता है ।

ज्योतिषी शास्त्र मैं किसी भी समस्या को दूर करने के हजारों उपाय बताए गए है, किसी वस्तु का दान से लेकर, उसे किसी जानवर को खिलाने और बहाने तक । पर इन सबके साथ ज्योतिष शास्त्र ये भी कहता है कि हम जब पारिवारिक रिश्तों की अवहेलना करते हैं तो सब उपाय भी कर ले तो भी जब तक आप उन रिश्तो का सम्मान नही करोगे तब तक कोई ग्रह आपकी पूजा,पाठ, हवन, दान आदि स्वीकार नही करेगा ।

सारे नवग्रह हमारे इर्द गिर्द हमारे रिश्तेदारों की भूमिका मैं हैं। लेकिन हम उनसे अपने काम के समय या स्वार्थवश ही बात करते हैं ।

अक्सर हम अपने रिश्तेदारों पर बेवजह का दोषारोपण करते हैं, कई महिलाओं को देखा कि ससुराल मैं सास, ससुर, ननद, देवर, किसी से नही बनती सुबह से शाम उनकी बुराई करती और कुछ समय बाद बीमारी, डिप्रेशन, आदि समस्याओं से घिर जाती है।

बात सम्मान की आती हैं तो हम भी आजकल बढ़ो का सम्मान करना तकरीबन भूल से गये, सम्मान की परिभाषा ये नही की आप उनको भोजन करवाकर कोई अहसान कर रहे हों ।

किसी भी रिश्ते के गहरे होने की पहली शर्त होती है सम्मान। सिर्फ पति-पत्नी ही नहीं, तमाम रिश्तों से लेकर यारी-दोस्ती तक में एक-दूसरे के प्रति सम्मान बेहद अहम् है। हम जब रिश्तो मैं अहंकारवश, मोह, मद, लोभ आदि के कारण सम्मान भूल जाते तब ऐसी स्थिति मैं उन रिश्तेदारों से सम्बंधित ग्रह अपना बुरा असर हमारे जीवन पर डालना शुरू कर देते हैं ।

अब यंहा एक सोचने वाली बात है कि आप कहोगे की हम तो सब अच्छा करते हैं, सामने वाला रिश्तेदार ही हमारे साथ गलत करता है तो यदि आप किसी के चाचा हो तो कोई आपका भतीजा भी होगा, अब चाचा हेतु और भतीजे हेतु अलग अलग ग्रह होते हैं।

जब हम बेवजह अपनो को मानसिक, शारीरिक पीड़ा देते हैं तो ऐसी स्थिति मैं अपनो की निकली आह, टीस या बद्दुआ का असर ग्रहों तक पहुचता हैं और फिर धीरे धीरे उसका असर हम तक पहुच कर जीवन के उस सुख को वंचित कर देता हैं कुंडली के जिस घर मैं वह ग्रह विराजित हैं।

हमारे जीवन के कौन से रिश्तेदार किस ग्रह की भूमिका निभाते है ।

1. सूर्य : पिता, ताऊ और पूर्वज।
2. चंद्र : माता और मौसी।
3. मंगल : भाई और मित्र।
4. बुध : बहन, बुआ, बेटी, साली और ननिहाल पक्ष।
5. गुरु : पिता, दादा, गुरु, देवता। स्त्री की कुंडली में इसे पति का प्रतिनिधित्व प्राप्त है।
6. शुक्र : पत्नि या स्त्री।
7.शनि : काका, मामा, सेवक और नौकर।
8. राहु : साला और ससुर। हालाँकि राहु को दादा का प्रतिनि‍धित्व प्राप्त है।
9. केतु : संतान और बच्चे। हालाँकि केतु को नाना का प्रतिनि‍धी माना जाता है।

अब आप समझ ले कि यदि आपकी जन्म पत्रिका मैं बुध नीच स्थिति मैं है, कमजोर है या पीढ़ीत हैं तब ऐसी स्थिति मैं आपको ज्योतिष पन्ना पहनने की सलाह या श्री गणेश जी या देवी पूजा हेतु सलाह दी जाती है । लेकिन आपने बुध कारक रिश्तेदार याने बहन, बेटी, बुआ और साली से सम्बन्ध खराब किये या उनसे कोई छल कपट किया, दुख तकलीफ दी या अपमान किया तो कितने ही जप, तप, हवन, दान करवाले स्थिति पूर्ण रुप से नही सुधर सकती है।
???जय माई जय गुरुदेव ???