विवादों से घिरी वार्डन ,तो एपीसी पर लगाया मिथ्या आरोप…! वार्डन  गंभीर अनियमितता के आरोप से गिरी तो जांच टीम को लिया निशाने पर…!!

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शिवपुरी- जिले में शिक्षा विभाग भी भ्रष्टाचार से अछूता नहीं रहा लंबे समय से विभाग के विभिन्न कर्मचारी अलग-अलग स्थानों पर प्रतिनियुक्ति पर डटे हुए हैं सबसे अधिक भयावह स्थिति हॉस्टलों की बनी हुई है यहां पदस्थ वॉर्डन लंबे समय से हॉस्टल में छात्राओं के लिए आ रहे पैसे का दोहन कर रही है।
 अगर इस  पैसे व्यवस्था को लेकर जब जब जांच की जाती है। तो वॉर्डन पहले तो अपने स्तर पर जांच को निपटाने की तैयारी करती है और फिर भी ना निपटी तो किसी भी स्तर तक जाकर मिथ्या आरोप लगाकर मामले को दबाने के लिए तैयार हो जाती है इधर जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार इन दिनों जिला शिक्षा कार्यालय सख्त कार्रवाई के मूड में है जिसे लेकर शिक्षा महकमे के कर्मचारी इन दिनों हाई टेंशन में नजर आ रहे हैं और जब मामला सही तरह से नहीं सुलझता तो अपने ही वरिष्ठौं पर अनर्गल अनियमित आरोप लगा दिए जाते हैं।
ऐसा ही एक मामला करैरा अनुभाग के दिनारा कस्बे का आया है,जहां राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के अंतर्गत छात्रा-वास संचालित है। इस छात्रा-वास की पूर्व वॉर्डन जिन्हें गंभीर अनियमितताओं के चलते जब हटा दिया गया तो इन्होंने जिला प्रशासन द्वारा गठित जांच टीम पर ही आरोप लगा डाले, जिससे विभाग में गलत कार्य करने वालों के हौसले बुलंद हो रहे हैं। इस संदर्भ में हमारे संवाददाता द्वारा स्वयं जानकारी एकत्रित की गई तो कई चौकाने वाले बिंदु सामने आए जिनमें प्रमुख आरोप यह है कि छात्रा-वास हमेशा ही गंभीर आरोपों से घिरा रहा, यहां छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जाता रहा,जब इस संदर्भ में जांच हेतु मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत द्वारा 3 सदस्यीय  समिति को गठित कर दिनांक 12/9/2019 को आर.एम.एस.ए छात्रावास का निरीक्षण करने भेजा गया तो वहां गंभीर अनियमितताए भी मिली जिस पर समिति ने अपनी रिपोर्ट दिनांक 13/9/2019 को जिला पंचायत सीईओ को सौंप दी, सीईओ जिला पंचायत द्वारा जिला कलेक्टर से आदेश अनुमोदन के उपरांत तत्कालीन वार्डन को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया जिसका जवाब वार्डन द्वारा नहीं दिया गया जवाब ना देने एवं गंभीर अनियमित आरोपों से घिरी छात्रावास दिनारा की वार्डन की संपूर्ण कार्यकाल की जांच के साथ ही 8/11/2019 को वार्डन पद से हटा दिया गया, हटाये गये जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के पत्र क्रमांक 12266 दिनांक 8/11/19 में यह स्पष्ट उल्लेखित था कि शा.उ.मा.वि. दिनारा में उच्च माध्यमिक शिक्षक पर पदस्थ को जो अतिरिक्त प्रभार वार्डन का था,वह अपने दायित्वों का निर्वहन नियमानुसार नहीं कर सकी एवं कारण बताओ नोटिस का जवाब नहीं दिया गया। इस कारण वार्डन पद से पृथक किया जाता है। यह सब कुछ जिला प्रशासन की कार्यवाही अनुसार हुआ। परंतु वार्डन पद छिनते ही बौखलाकर तत्कालीन वार्डन के निशाने पर वह टीम आ गई जिसने उनकी गंभीर अनियमितताओं को उजागर किया।
 बस यही से मामले को फिर से अपने पक्ष में करने के लिए वार्डन ने डीपीसी कार्यालय के एपीसी जेंडर ब्त्सराज राठौर और प्राथमिक विद्यालय ढांड  स्कूल के सहायक शिक्षक अखिलेश गुप्ता पर मिथ्या अनर्गल आरोप लगा डाले, श्री राठौर और उनके साथ आई छात्रावास का सत्यापन करने वाली टीम का दोष  इतना भर था कि वह जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी महोदय द्वारा गठित टीम के एक प्रमुख सदस्य थे जिन्होंने बिना लोभ लालच के जिला प्रशासन के निर्देशों के क्रम में सही जांच कर प्रस्तुत की  जिससे बौखलाकर 14 नवंबर 2019 की जनसुनवाई में कलेक्टर महोदय को जिला प्रशासन द्वारा गठित टीम के विरुद्ध ही जांच करने के लिए आवेदन दिया गया,जिसमें टीम के सदस्यों पर अमर्यादित आरोप लगाए गए। विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है, कि अगर ऐसे मिथ्या आरोप लगाकर जांच अधिकारी पर दबाव बनाया गया तो कभी भी निष्पक्ष जांच सामने नहीं आ पाएगी और वर्षों से हॉस्टल एवं अन्य स्थानों पर बैठे लोग इसी प्रभार विभाग का दोहन करते रहेंगे इनका कहना है-  शिकायत बौखलाहट का नतीजा है-राठौर  इस संदर्भ में हमने जब एपीसी बत्सराज सिंह राठौर का पक्ष जाना तो उन्होंने कहा कि हम तो जांच टीम का एक हिस्सा है, जो अनियमितता जांच मे सामने आई उसका ही प्रतिवेदन हमने दिया है चूंकि  संबंधित वार्डन को 8/1/19 को वार्डन पद से मुक्त कर दिया गया है,इससे बौखला कर उनके द्वारा झूठी निराधार शिकायत की जा रही है