Good news- यहां कचरे के ढेर में फेंकी गई थी, नसीब ने उसे पहुंचाया सात समंदर पार…।नीमच के वात्सल्य गृह में पली बिटिया को अपनाया अमेरिकन दंपत्ति ने।
न्यायालय के माध्यम से गोद लेने की औपचारिकताएं पूरी।

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नीमच। जिस मां ने अपनी कोख से पैदा हुई बच्ची को 24 घंटे की उम्र में ही कचरे के ढेर में रोता बिलखता छोड दिया, उसकी तकदीर देखिये की वह अब अमेरिका के परिवार की रानी बिटिया बनने जा रही है। नीमच से यह बिटिया अमेरिका के परिवार के हाथों में पहुंची है।
दरअसल करीब 22 माह पूर्व मंदसौर के एक सुनसान इलाके में कचरे के ढेर में पडी मासूम के रोने की आवाज सुन राहगिरों का दिल पसीज गया। पुलिस को सूचना हुई और अबोध बालिका को आसरा मिला। तब बालिका मरणासन्न अवस्था में थी, लेकिन अस्पताल में हुई देखरेख से वह फिर से जी उठी। वहां से इस बिटिया को नीमच के इंदिरा नगर स्थित वात्सल्य गृह को सौंप दिया। जहां पर निराश्रित अनाथ बच्चों को पोषित किया जाता है।
बच्ची के साथ एक और समस्या थी िकवह कुपोषण का शिकार थी। बीते महीनो में इस बिटिया के बारे में अमेरिका के दंपत्ति को भारत सरकार की वेबसाइट कारा के जरिये पता चला। इस पर उन्होने संपर्क कर बिटिया को गोद लेने की मंशा जताई। बात आगे बढी और एक माह पूर्व उन्हें नीमच बुलाया गया। यहां आकर उन्होने बिटिया को देखा और गोद लेने की जरुरी औपचारिकताओं के लिए आवेदन किया। इस प्रक्रिया में उन्हें एक माह बाद पुनः नीमच आने का समय दिया गया।
इस बिटिया को अपनाने वाले दंपत्ति हैं अमेरिका के मिसिसिपी के निवासी माइकल कोरी हेंकाॅक और एरिना मेगन। दोनो गुरुवार को नीमच पहुंचे, जहां पर न्यायालयीन प्रक्रिया के बाद उन्हें वात्सल्य गृह की प्रभारी उषा गुप्ता द्वारा गोद सौंप दिया गया। जब यह प्रक्रिया चल रही थी उस दौरान वहां मौजूद हरेक की आंखें नम थी।


माइकल कोरी हेंकाॅक, बच्ची को गोद लेने वाले पिता

एरिना मेगन हेंकाॅक, बच्ची को गोद लेने वाली माता