ग्वालियर मेडिकल कॉलेज का डीन बनने एलएलबी की डिग्री…?*
एक महिला के आगे साष्टांग हुआ मप्र का चिकित्सा शिक्षा विभाग
*शिवपुरी मेडिकल कॉलेजों के भृष्टाचार पर अफसरशाही की पर्देदारी
*क्यों मजबूर है कमलनाथ सरकार??

1021

शिवपुरी- मेडिकल कॉलेज के मुखिया यानी डीन बनने के लिये एमसीआई ने लगता है एक नई पात्रता निर्धारित कर दी है।यह है कानून यानी एलएलबी की डिग्री.आपको सुनकर थोड़ा अजीब लग रहा होगा न ।लेकिन यह तथ्य है यकीन न हो तो ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में डीन के लिये जारी किए गए इश्तहार पर नजर दौड़ा लीजिये।जिसमें साफ लिखा हुआ है कि उस अभ्यर्थी को प्राथमिकता दी जायेगी जिसके पास एलएलबी की डिग्री हो।मप्र ही नही शायद देश भर में किसी मेडिकल कॉलेज में डीन के चयन हेतु इस तरह की पात्रता शर्त सामने आने का यह पहला मामला होगा।असल में मामला एक अभ्यर्थी को चयनित करने की सुनियोजित रास्ते भर का है जिसके ऊपर मप्र के आला अफसरान इस कदर फिदा है कि हर कीमत पर इस महिला डॉक्टर को जीआरएमसी की कमान सौंपना चाहते है।अभी यह मोहतरिमा मप्र के एक बड़े मेडिकल कॉलेज में पदस्थ है और शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में हुए भर्ती घोटाले के संगीन आरोप इनके ऊपर लगे हुए है।इनकी धमक का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते है कि मप्र के बड़े अफ़सरसाहब इन्हें अपने साथ ग्वालियर मेडिकल कॉलेज की समीक्षा बैठक में अलग से आमंत्रित कर ग्वालियर के कॉलेज को भी अपनी ज्योति से आलोकित करने का आग्रह करते है।मोहतरिमा के लिये मप्र का चिकित्सा शिक्षा महकमा कैसे जाजम बिछाए हुए है इसका नमूना यह नया विज्ञापन है क्योंकि एलएलबी की डिग्री मप्र में शायद ही किसी चिकित्सा शिक्षक के पास हो। सिवाय इन मेडम को छोड़कर ।शिवपुरी मेडिकल कॉलेज में व्यापमं से भी बड़ा भर्ती घोटाला हुआ है मप्र विधानसभा में पूर्व मंत्री केपी सिंह और श्रीमती यशोधरा राजे सिंधिया जैसे ताकतवर नेता दो सत्रों में इस मामले को उठा रहे है लेकिन सर्वोच्च लोकसदन में अफसर जलेबी औऱ इमरती की तरह तथ्यों को घुमाकर असल आरोपियों को बचाने में लगे है।दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि इस महकमे की कमान एक एमबीबीएस डॉक्टर मंत्री पर है लेकिन वे भी उन आइएएस अफसरों और इन मेडिकल माफियाओं के आगे बेबस नजर आ रही है।सवाल मप्र में बदले निजाम के इकबाल का भी खड़ा हो गया है क्योंकि शिवपुरी मेडिकल कॉलेज का भर्ती कांड मौजूदा सरकार के कार्यकाल का नही है लेकिन जिस प्रतिबद्धता के साथ कमलनाथ सरकार इस महाघोटाले को दबाने में लगी है उससे साबित हो रहा है कि अफसरशाही किस हद दर्जे तक शासन तंत्र पर हावी है।न केवल शिवपुरी बल्कि नए खोले गए सभी 7 मेडिकल कॉलेजों में अरबों रुपए का भृष्टाचार हुआ है।हर कॉलेज में औसत एक हजार पद है और भर्तियां जिस मनमानी से हुई है उसके आगे बदनाम व्यापमं की कोई औकात नजर नही आएगी।मप्र विधानसभा में पूर्व मंत्री केपी सिंह के प्रमाणित आरोपों पर सरकार ने विधानसभा जांच कमेटी बनाई पर मार्च 2019 से अब तक इस कमेटी के तीन अध्यक्ष और सदस्य बदल बदल कर नियुक्त हो चुके है ।नतीजा सिफर है क्योंकि मेडिकल कॉलेजों के अथाह भ्रष्टाचार में सभी नहाए हुए है।जिस तरह से जीआरएमसी डीन का इश्तहार ग्वालियर आयुक्त के दफ्तर ने निकाला है उसकी सुनियोजित इबारत को समझिए ग्वालियर डीन शिवपुरी के घोटाले को सरंक्षित करेगी।फिर गुना और श्योपुर के नए स्वीकृत कॉलेजों में इनकी अदभुत प्रशासन ज्योति से पारदर्शिता और गुणवत्ता की मिसाल पेश की जाएगी।

डिस्क्लेमर दावे से कहा जा सकता है कि इस घोटालागिरोह में कोई नेता शामिल नही है।

यह चिकित्सा शिक्षा विभाग और कुछ कलंकित चरित्र के आपवादिक डॉक्टरों का गिरोह है जो सिर्फ पैसे के लिये आने वाली पीढ़ियों के लिये नाकाबिल डॉक्टरों की फ़ौज खड़ी करके चले जायेंगे

कमलनाथ जी आपके ऊपर तो लक्ष्मी की कालजयी कृपा है आप ही अगर इस नेक्सस को नही तोड़ेंगे तो मप्र के मुखिया के नाते आने वाला वक्त आपको भी माफ नही करेगा।

मुख्यमंत्री जी आपकी निजी ईमानदारी और सम्पन्नता का तकाजा है मप्र के अफसरशाही गिरोहों को नेस्तानाबूद कीजिये।