“लावारिस शहर -30″✒ ✒कालिख की कोठरी में बेदाग कैसे कलेक्टर साहिब…..??* *सूबा सदर का मातहतों के आगे “ईमानदारी-प्रमाण” प्रहसन..!”एक कप चाय के भी दागी नही है हम…..???*✍ (✒बृजेश तोमर✒)*✍🏻

80

✍✍✍ ✍✍✍✍✍✍✍✍✍

✒ *लावारिस शहर -30*✒

✒✒✒✒✒

*कालिख की कोठरी में बेदाग कैसे कलेक्टर साहिब…..??*

*सूबा सदर का मातहतों के आगे “ईमानदारी-प्रमाण” प्रहसन..!”एक कप चाय के भी दागी नही है हम…..???*

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻 ✍🏻 *(✒बृजेश तोमर✒)*✍🏻✍🏻
===================
*सूबा साहब…*
*राम -राम पहुचे…!*
*आश्चर्य* हुआ जानकर कि टी एल बैठक में
*”भ्रष्टाचारी शिष्टाचारों “* में आकंठ डूबे अपने मातहतों के आगे आपको अपनी ईमानदारी का सुबूत यह कहकर पेश करना पड़ा कि *”किसी की एक कप चाय के भी दागी नही है हम…”???*
*दरवार*,हजम नही हुई यह दलील….?
*आपकी* ईमानदारी पर शक लेशमात्र भी नही ( सिर्फ फिलहाल…)
*किन्तु* गौर फरमाइए,कि..
*सूबे* की मुखिया होकर *”गांधारी”* की तरह आंखों पर पट्टी बांधकर प्रमुख सिपहसालारों को *”कौरवों”* की तरह निरंकुश छोड़ देने से भला खुद का दामन साफ रह पायेगा क्या….??
*कालिख* की कोठरी में सफेद कपड़े पहन कर बेदाग रहा जायेगा क्या….??
*वातानुकूलित कक्ष से तनिक बाहर झाकिये, देखिये…*👁

*आपके*,मातृशक्ति प्रतिनिधित्व बाले *परिवहन विभाग* की पांचों उंगलियां घी में ओर सर कढ़ाई में है….

*खरई बेरियर* पर प्राइवेट कटरो खुला साम्राज्य,दफ्तर में दलालों की फैली सल्तनत,ठेठ गुंडई अंदाज में अधिकार के साथ जबरन बसूली जिसकी गूंज कई बार उठी मगर आपकी खामोशी…??

*फिर बेदाग.*…???

*खनिज विभाग* का खुला खेल…

*अवैध उत्खनन,सफेद रेत का काला कारोबार..?फिर बेदाग…??*

*नाक* के नीचे सरकारी,मंदिर माफी,कृषि,निजी जमीनों पर कटती अवैध कॉलोनियां ओर सरकारी गद्दी पर बैठे आपके विश्वस्त पहरुओं की सीधी हिस्सेदारी….???

*आपकी खामोशी…!*

*फिर बेदाग…??*

*”नरकपालिका”* में काबिज आपके जागीरदारो द्वारा जनता के खून-पसीने की गाढ़ी कमाई का खुला बंदरबाट,अखबारों की दैनिक सुर्खियां,ओर आपकी खामोशी.! *फिर बेदाग…??*

*”स्मेक”* के धुएं में उड़ती युवा पीढ़ी,गांव-गांव खुले “मदिरालय”अफीम,गांजा,डोंडा,चरस के जनसुविधा केंद्र..

“उड़ता पंजाब”की तर्ज पर अब *”उड़ती शिव की पुरी”*..

*फिर बेदाग…??*

*”दो मासूमो”* की ह्रदयविदारक हत्या के बाद खुली तमाम जमीनी दावों की कलई के बाद सिर्फ लीपा-पोती..! *फिर बेदाग…??*

*यह* सिर्फ बानिकी भर है, *लाल इमारत* के अंतःखानों में झाकिये तो जरा, *कालिख,कालिख,सिर्फ कालिख..*

*जायज* पर पहरेदारी, *नाजायज* से ईमानदारी..!

*फिर खामोशी…!*

*फिर बेदाग…??*

*यदि* इतने दाग लगने से भी सब कुछ अच्छा है तो साहेब,आप खूब मानिये हम तो नही….!

या तो नज़ीर सामने आये, या फिर वही खामोशी…??

*भली* करेगे राम…!!

*जय हो* हुक्मरानों की..!

*ओर जय हो* कद्रदानों की..!!

*खुदा खैर करे…!!!*

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍✍
*नाचीज- बृजेश सिंह तोमर*(संपादक)✒
*www.khabaraajkal. com*
✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
*नोट- नाचीज कलमकार रामायण की चौपाई “विनय न मानत जलधि जड़ गये तीन दिन बीत,बोले राम सकोप तब भय बिन होय न प्रीत”के गूढ़ अर्थ को समझने,समझाने व पुनः आत्मसात करने हेतु प्रयासरत है।खुदा खैर करे….!!*
✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻 *अनवरत…*✍🏻✍🏻