स्पेशल स्टोरी – “देशभक्ति के ज़ज्बे से लबरेज एक गांव ऐसा जहाँ की मिट्टी दिलाती है हर समय शहीदों की याद….!अमर शहीदो के नाम पर है गांव से गुजरने बाली हर छोटी-बड़ी सड़क-पगडंडी का नाम…! आजाद हिंद फौज के कर्नल ढिल्लन को अपनी गोद मे चिरनिंद्रा में सुलाकर अमर हो गया ग्राम “हातोद…! विस्तार से पढिये,खबर आजकल डॉट कॉम की खास खबर….!

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शिवपुरी। यूं तो शिव की नगरी शिवपुरी में प्राकृतिक ओर पौराणिक संपदा बिखरी पड़ी है किंतु ऐतिहासिक संपदा में भी पीछे नहीं है। शहर हो या गांव यहां के लोगों के मन में हिंदुस्तान बसता है ।एक गांव तो ऐसा है जहाँ के हर सड़क किसी न किसी शहीद के नाम पर होकर आज़ादी के तराने छेड़ती है।

शिवपुरी से महज 10 किमी दूर माधव नेशनल पार्क की गोद में बसा एक गांव, हातौद जिसकी पहचान आजाद हिंद फौज के स्वतंत्रता संग्राम सैनानी स्वर्गीय कर्नल ढिल्लन के नाम पर है। इस गांव की की कुल आबादी महज 2200 के आसपास ही है। लेकिन देश भक्ति का जज्बा ऐसा कूट-कूट कर भरा है कि गांव की छोटी-से छोटी पग डंडी और सड़कें शहीदों के नाम पर रख दी हैं। यहां हर मोड़ पर जहां भी गांव के इंटरनल रोड बने हैं वहां की सड़कों के नाम ईतिहास में शहीद हुए शहीदों के नाम पर ही रखे गए हैं। खास बात ये है कि सड़कों में इस बात का ध्यान रखा गया है कि इसमें हर जाति,धर्म के शहीदों को जगह मिल सके। ये जज्बा भी उस स्थिति में है जब इस गांव से एक अब तक कोई भी व्यक्ति शहीद नहीं हुआ है।

शहीद बांके जाटव मार्ग

 

सड़क नंबर 01- हाथी गढ़ा रोड: शहीद बाकें जाटव (चमार ) यहां चमार शब्द का उल्लेख इसलिए है,क्यों कि हिस्ट्री में इन्हें इसी नाम से जाना जाता है। ये सड़क गांव की इंटरनल रोड है।
जानिए बांके चमार के बारे में।
ये उप्र के जोनपुर गांव के रहने वाले थे। सन्1857 की क्रांती में इनका योगदान मुख्य था। जिस जमाने में एक आना-दो आने की कीमत हुआ करती थी, उस जमाने में अंग्रेजों ने इन्हें पकड़ने के लिए 50 हजार रुपए का ईनाम रखा था। इसी लालच में आकर इनके एक साथी ने इन्हें पकड़वा दिया और अंग्रेजों ने फांसी देदी। इन्हीं के नाम पर सड़क का नाम पड़ा है।

शहीद करतार सिंह सराभा

 

सड़क नंबर 02– छोटी हातौद: ये भी गांव की इंटरनल रोड है। यहां शहीद करतार सिहं सराभा के नाम का साइन बोर्ड लगाया है। ये शहीद भगत सिहं के गुरु थे। शहीद भगत सिहं जिस भी नए काम की शुरुआत करते थे। उससे पहले अपने गुरु की पूजा करते थे।

शहीद उधम सिंह मार्ग

 

सड़क नंबर 03- शहीद उधम सिहं मार्ग: चिली बार बसाहट के लिए ये एक रास्ता जाता है। यहां कई किसानों के खेत हैं। जो इसी सड़क से होकर गुजारता है।ये जगह मर्च की खेती के लिए भी मशहूर है।

ग्रुप कैप्टन चरणजीत सिंह मार्ग

 

सड़क नं 04- जंगल सराय मार्ग। ये सड़क ग्रुप केप्टन चरणजीत सिंह के नाम पर बनी है। 1971 की भरत पाकिस्तान की लड़ाई में इनका अहम रोल था। यहां इस पंचायत में एक जंगल सफारी होटल् भी बना है। यहां इस होटल् पर जाने के लिए जिस सड़क का उपयोग किया जाता है

शहीद धन सिंह गुर्जर मार्ग

 

सड़क नंबर 05, अर्जुन गवां मार्ग: ये सड़क गांव से दूसरे गांव अर्जुन गांव को जाती है। इस सड़क का नाम करण शहीद धन सिहं गुर्जर के नाम पर किया है। गुर्जर जाति के बड़े शहीदों के रुप में इन्हें याद किया जाता है।

शहीद तिलकामांझी मार्ग

 

 

सड़क नंबर 06: इस सड़क का नामकरण देश के पहले आदिवासी शहीद बाबा तिल्खा मांझी के नाम पर किया गया है। ये देश के पहले आदिवासी शहीद थे। 1857 की क्रांती से भी 100 साल पहले ये शहीद हुए थे।

हरि सिंह नलवा खेल मैदान

 

सड़क नंबर 07- ग्राम की सरपंच का कहना है कि हमने ऐसा इसलिए किया क्यों कि किसी सरकार, रसूखदार व्यक्ति के नाम पर नामकरण करने से किसी एक व्यक्ति की पॉवर प्रर्दशित होती है ऐसे में हमने राष्ट्रीय एकता के मद्देनजर एकसा किया। प्रेरणा ऐसे मिली की गांव में खेल मैदान सरकार की ओर बनने के लिए आया था। जिसके नामकरण फिर हमने शहीद हरीसिहं नलवा के नाम से किया।

आजाद हिंद पार्क

 

गांव की पहचान है स्वतंत्रता संग्राम सैनाम आजाद हिंद फौज के कर्नन ढिल्लन के नाम पर:
इस गांव में पहले ही आजाद हिंद फौज के सिपाही और स्वतंत्रता संग्राम सैनानी कर्नल ढिल्लन का पार्क बना है। इस गांव को हातौद के नाम से जाना है। कर्नल ढिल्लन के परिजन आज भी इस गांव में निवास करते हैं। सरकार की ओर से इस गांव में समय-समय पर सरकारी कार्यक्रम आयोजित होते हैं।

ये हैं गांव का जनसंख्या घनत्व
2100 के करीब कुल आबादी
सिक्ख धर्म 40 प्रतिशत के आसपास
40 प्रतिशत आदिवासी ,20 प्रतिशत में गुर्जर, ,जाटव एवं अन्य समाज निवास करता है।

ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती प्रवीण मेहरोत्रा

हमारा सभी धर्मो और समाजों में विश्वास:
इस गांव में सड़कों के नाम अन्य सभी समाजों के शहीदों के नाम पर इसलिए रखे गए हैं क्यों कि ये वो शहीद हैं जो पिछड़ी जातियों से थे लेकिन इनका काम इन्हें बहुत आगे ले गया। इन्हें बहुत कम लोग ही जानते हैं लेकिन हमारे गांव में आदिवासी भी हैं गुर्जर भी और सरदार भी इसलिए हमने समरसता रखने की कोशिश की है।
श्रीमति परवीन मेहरोत्रा,ग्राम सरपंच, गा्रम पंचायत हातौद