मिलावट करने वालों के लिए रासुका भी कम…. @ राकेश अचल

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प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट यदि अपने कॉल पर कायम रहें तो प्रदेश में मिलावटी दूध बेचने वालों के खिलाफ असरदार कार्रवाई हो सकती है। सिलावट ने मिलावटखोरों के खिलाफ रासुका के इस्तेमाल की बात कही है ।दूध में मीलावत एक सामाजिक अपराध है साथ ही किसी की हत्या के प्रयास जैसा संगीन भी इसलिए इसके खिलाफ सख्त से सख्त क़ानून और कार्रवाई की जरूरत है
फ़ूड सेफ्टी ऐंड स्टेंडर्ड अथार्टी आफ इंडिया की रपट ने प्रदेश सरकार को एक साल पहले ही आगाह कर दिया था की मध्यप्रदेश के कम से कम 15 जिलों में मिलावटी दूध का कारोबार किया जा रहा है। रपट के मुताबिक़ प्रदेश में बिकने और संग्रहित होने वाले 65 फीसदी दूध में मिलावट है और ये कारोबार अकेले मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं है बल्कि इसकी जड़ें सीमावर्ती पांच राज्यों में फैली हुई हैं ।
प्रदेश को जितना दूध चाहिए उसका आधा ही पैदा होता है लेकिन आपूर्ति पूरी होती है इसका साफ़ अर्थ है की शेष पचास फीसदी दूध नकली और मिलावटी बनाया और बेचा जा रहा है ।मिलावटी दूध में यूरिया,फार्मलीन,अमोनिया ,कास्टिक सोडा और कपड़े धोने का पावडर इस्तेमाल किया जाता है,ये सभी घटक जानलेवा हैं और इस मिलावटी दूध का सबसे बुरा असर दुधमुंहे बच्चों और नौनिहालों के जीवन पर पड़ता है ,लेलकन लालची लोग इस कारोबार को अपराध न मानकर आमदनी का जरिया माने बैठे हैं
दुर्भाग्य ये है की भारत में और खासकर मध्यप्रदेश में हमारे पास दूध का कोई मानक ही नहीं है ,इसका फायदा उठाकर मिलावटखोर दूध में वे सब तत्व मिला तहे हैं जो कैंसर जैसी घातक बीमारियों की जनक हैं ,लेकिन किसी को कोई फर्क ही नहीं पड़ता ।हमारा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग और स्वास्थ्य विभाग इस मिलावट के धंधे में अघोषित रूप से शामिल है,ऐसे में मिलावटखोरों के खिलाफ कार्रावाई करे कौन ? सबको मुनाफे से मतलब है ,हमारे यहां पहले से दुधारू पशुओं पर अधिक दूध निकालने के लिए प्रतिबंधित दवाओं का इस्तेमाल खुलेआम किया जाता है ।लालची व्यापारी गाय,भैंस के स्तन से दूध की आखरी बूँद तक निकाल लेना चाहते हैं ।
आपको जानकार हैरानी होगी की दूध में मिलावट करने के मामले में मध्यप्रदेश तीसरे नंबर पर है। मध्यप्रदेश दूध में ही नहीं देशी घी में मिलावट के मामले में भी नंबर एक रहा है। एक समय में आकाश त्रिपाठी जैसे युवा और उत्साही आईएएस अफसरों ने कलेक्टर की हैसियत से मिलावट के कारोबार के खिलाफ प्रभावी मुहीम चलाई भी थी लेकिन उनके हटते ही ये काला कारोबार फिर शुरू हो गया ,नकली घी और दूध का कारोबार करने वालों को सरकारी महकमों के अलावा राजनीतिक नेताओं का भी खुला संरक्षण मिलता रहता है प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट और नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रद्युमन सिंह तोमर ने मिलावटखोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही है लेकिन राज्य सरकार इस मुद्दे पर अपने मंत्रियों का कितना साथ देती है ये कहना अभी कठिन है ।
मुझे हैरानी होती है की हमारे देश में जहां गाय को पूजा जाता है,लड़कियों की पूजा की जाती है,भगवान की पूजा और नेवैद्य में घी–दूध का जमकर प्रयोग होता है उस देश में घी-दूध में मिलावट करने वाले कौन सा कलेजा रखते हैं ?मै अपने अमेरिका प्रवास में ये देखकर हतप्रभ रहता हूँ की यहां दूध न केवल शुद्ध मिलता है बल्कि गाय-भैंस के अलावा बकरी,भेड़ और ऊँट का भी डिब्बाबंद,प्रामाणिक दूध आसानी से मिलता है ,यहां खानपान के सामान में मिलावट के बारे में कोई सोच भी नहीं सकता लेकिन हम धर्मभीरु लोग मिलावट कर अपने ही नौनिहालों की हत्या के अपराध में धड़ल्ले से शामिल हो रहे हैं ।मेरे हिसाब से तो मिलावट के लिए कम से कम आजीवन कारावास की सजा तो होना ही चाहिए ।भारत में भी इस सामाजिक अपराध के खिलाफ कोई सख्त से सख्त क़ानून बनाया जाना चाहिए ।