सपूतों के पांव पालने में…. @ राकेश अचल की त्वरित टिप्पड़ी

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भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव श्री कैलाश विजयवर्गीय के विधायक बेटे आकाश विजयवर्गीय का नगरनिगम अमले के साथ मारपीट के आरोप में जेल जाना ‘पूत के पाँव पालने में दिखाई देते हैं’जैसी कहावत को चरितार्थ करता है ।आकाश जनसेवक हैं और शायद उन्होंने जनसेवा करते हुए ही नगर निगम के अमले के अमले को क्रिकेट के बल्ले से धुनक दिया ।उनकी जनसेवा एक नजीर बन सकती है ।
बाबाअ तुलसी दास ने सम्वत सोलह सौ अस्सी में ही लिख दिया था कि-नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं प्रभुता पाई जाहि मद नाहीं ।अर्थात संसार में ऐसा कोई नहीं है जिसको प्रभुता पाकर घमंड न हुआ हो ,बेचारे आकाश विजयवर्गीय फिर किस खेत की मूली हैं ?उन्हें पहली बार विधायकी मिली है और उनकी पार्टी में उनके पिता महासचिव हैं इसलिए उनका आप से बाहर हो जाना स्वाभाविक है ।उनके खिलाफ निगम अमले को पुलिस में नहीं जाना चाहिए था ,पुलिस को भी आनन-फानन में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं करना चाहिए था ,ऐसी हलफुलाहट आखिर किस काम की ?
प्रभुता पाकर मद के शिकार होने वाले आकाश विजयवर्गीय पहले आदमी नहीं हैं।कांग्रेस के जमाने में भी ऐसे सपूतों की लम्बी फेहरिश्त होती थी ,लेकिन आज चूंकि भाजपा सत्ता में है इसलिए उन्हीं का जिक्र ज्यादा हो रहा है। आकाश से पहले केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल के बेटे प्रबल पटेल और भतीजे मोनू पटेल को 18 जून को कुछ व्यक्तियों पर गोली चलाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था ।प्रदेश में जब भाजपा की सरकार थी तब मंत्री रहे कमल पटेल के बेटे का इतिहास सबसे ज्यादा चर्चित था ।इस सूची में आप भी अपने इलाके के प्रभुता प्राप्त लोगों के नाम शुमार कर सकते हैं ।
मुझे तो संतोष है कि हमारे पंत प्रधान के घर में न पालना है और न सपूत अन्यथा मुमकिन था कि उनका नाम भी इस बदनाम सूची में दर्ज हो जाता ।पिता-पुत्र का डीएनए समान होता है ,इसलिए सपूत के हर कर्म-कुकर्म के लिए पिता को भी दोषी माना जाना चाहिए ।लेकिन हमारे क़ानून में इसका प्रावधान नहीं है ।अब देखिये न आकाश जी के पिताजी बंगाल में ममता बनर्जी के साथ सियासी छेड़छाड़ में लगे हैं ,लेकिन उन्हें रोकने के बजाय ऊपर से संरक्षण मिल रहा है।आकाश का दुर्भाग्य है कि माध्य्प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है ,इसलिए उनके खिलाफ मामला दर्ज हो गया,मामा की सरकार होती तो शायद पुलिस इतनी हिमाकत न दिखाती ।
इंदौर की जनता को स्थानीय अदालत का शुक्रगुजार होना चाहिए कि उसने आकाश जी को 14 दिन के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया अन्यथा उनकी बड़ी बदनामी होती ,वैसे भी जनसेवा के लिए जेल यात्रा किये बिना जनसेवा का कोर्स पूरा नहीं होता ।जो लोग जेल नहीं जाते उन्हें आज भी न सच्चा देशभक्त माना जाता है और न जनसेवक ।जेल गए ढाई सौ से ज्यादा लोग सत्रहवीं लोकसभा का हिस्सा हैं ,लेकिन उनकी निंदा कोई नहीं कर सकता ,क्योंकि उन्होंने हर जेल यात्रा जनता की सेवा के लिए की ,उनके खिलाफ मुकदमे तो राजनितिक दुश्मनी के कारण दर्ज किये गए हैं
पूत के पाँव पालने में देखने के लिए एक दिव्यदृष्टि की आवश्यकता होती है।कभी-कभी पूत के पांव तभी दिखाई देते हैं जब वो विधायक या सांसद बन जाता है ।आम आदमी के पूत भले ही सपूत क्यों न हों उनके पाँव पालने में दिखाई ही नहीं देते।दिखाई दे भी नहीं सकते क्योंकि उनके पास तो पालना ही नहीं होता ।आम आदमी के बच्चे तो अपनी माँ की धोती या घर की किसी मैली चादर के बने पालने में पड़े रहकर बड़े होते हैं ।वैसे इस विषय पर हम जैसे पत्रकार कम साहित्यकार ज्यादा प्रकाश दाल सकते हैं ।हमारे मित्र प्रकाश हिन्दुस्तानी आकाश के ही शहर के हैं ,मौक़ा मिला तो मै इस बारे में उनसे ही ज्ञान अर्जित करूंगा ।फिलहाल मेरी एक नेक सलाह है कि यदि आपके शहर में आकाश जैसा कोई सपूत हो तो उसका नाम हमारी इस फेहरिश्त में निसंकोच शुमार करा दीजिये,हम ये काम निशुल्क करते हैं।जय-जय श्रीराम
@ राकेश अचल