अगर सिंधिया गुना लोकसभा में लौटकर नही आये तो सिंधिया से जुडे नेताओ की राजनीति खतरे में

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जिस प्रकार प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन की सरकार चला रही है उसी प्रकार गुना लोकसभा क्षेत्र केे अंतर्गत आने बाली शिवपुरी जिले की 3 विधानसभाओ में से पिछोर को छोड दिया जाये तो शिवपुरी एवं कोलारस में राजनैतिक हालात कुछ ज्यादा ही खराब नजर आ रहे है। केन्द्र में भाजपा की सरकार तो प्रदेश में गठबंधन के साथ कांग्रेस की सरकार तथा शिवपुरी कोलारस में भाजपा के जनप्रतिनिधि होने के कारण राजनैतिक विषमता नजर आ रही है क्योकि स्थानी स्तर पर भाजपा नेताओ की बात को प्रशासन बजन नही दे रहा है तो वहीं सिंधिया के चुनाव हार जाने तथा प्रभारी मंत्री के कम आने के कारण कांग्रेसी भी जनता की मांग को हल कराने में विफल दिखाई दे रहे है। जिसके चलते राजनैतिक विशेषज्ञ यह मानकर चल रहे है कि सिंधिया का भविष्य तो कांग्रेस की राजनीति में उज्जवल है वह राज्यसभा सदस्य से लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री तक उनका नाम चल रहा है किन्तु महल की जो पॉलसी अभी तक रही है कि चुनाव हारने के बाद उस क्षेत्र में दुबारा न जाने की पॉलिसी यदि गुना लोकसभा में सिंधिया ने अपनाई और वह अगले लोकसभा में ग्वालियर चले गये या गुना की राजनीति में सिंधिया ने अपनी रूचि कम दिखाई तो सिंधिया की दम पर कांग्रेस की राजनीति करने बाले कांग्रेसियो के सामने आने बाले समय में विधानसभा का चुनाव जीतना तो दूर की बात है पार्षद का टिकिट एवं पंचायत से लेकर नगर निकाय तथा जिला पंचायत में सदस्य बनने तक की चुनौती भाजपा से लेकर कांग्रेस के वागी नेता पेश कर सकते है जिस प्रकार लोकसभा से लेकर विधानसभा के चुनावो में कांग्रेस के वागी नेताओ ने अपनी खिचडी पका कर कोलारस, गुना विधानसभा में कांग्रेस के उम्मीदवारो को विधानसभा के चुनाव में हराया उसी प्रकार लोकसभा के चुनाव में कांग्रेस के यादवी नेताओ ने समाजवाद की राजनीति करके आजाद भारत में पहली बार कोलारस विधानसभा से महल के उम्म्मीदवार को हराने का जो रिकॉर्ड बनाया है उस रिकॉर्ड के चलते यदि सिंधिया गुना लोकसभा से मोहभंग कर लेते है तो सिंधिया की दम पर कांग्रेस की राजनीति करने बाले नेताओ के सामने आने बाले समय में भाजपाई एवं कांग्रेस के वागी मिलकर बहुत बडी चुनौती पेश कर सकते है।
प्रशासनिक अधिकारियो की मनमर्जी का शिकार शिवपुरी, कोलारस की जनता

मध्य प्रदेश में भले ही कांग्रेस गठबंधन की सरकार हो किन्तु शिवपुरी जिले में प्रशासन पर अंकुश लगाने बाले नेताओ का मानो जैसे टोटा पड गया हो। प्रशासनिक अधिकारी अपनी मनमर्जी पर उतारू है जनता की मूलभूत समस्याओ को निपटाना तो दूर की बात है उनकी मांग उठाने बाला भी कोई नेता दूर-दूर तक नजर नही आ रहा है। बर्तमान में हालात इतने खराब हो चुके है कि शायद ही कभी रहे हो। मुख्य रूप से शिवपुरी जिले में शिवपुरी शहर तथा कोलारस विधानसभा की हम बात करें तो प्रदेश में कांगे्रस की सरकार तथा शिवपुरी कोलारस में भाजपा के विधायक एवं सांसद होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी न तो भाजपा नेताओ की बात मान रहे है और न ही कांग्रेस के नेताओ की क्यो कि सिंधिया के चुनाव हार जाने के बाद उनका शिवपुरी कोलारस से मोह कम हो चुका है। प्रभारी मंत्री महीने में एक चक्कर लगा कर चले जाते है प्रशासनिक अधिकारी जनता के साथ लूट खसोट करने में तथा मनमर्जी पर उतारू है। जिस प्रकार बिना मुखिया के परिवार के सदस्य मनमर्जी पर उतारू हो जाते है उसी प्रकार प्रदेश में कांग्रेस तथा शिवपुरी कोलारस में भाजपा के जनप्रतिनिधि होने के कारण प्रशासनिक अधिकारी अपनी मनमर्जी पर उतारू हो चुके है। जिन्हे न तो खस्ता हाल रोडे दिख रही है और न ही पीने के पानी से लेकर बार-बार होने बाली विद्युत की कटौती एवं किसानो को ऋण माफी से लेकर खाद, बीज, दवा की कोई समस्या दिखाई नही दे रही है।