लावारिस शहर-29: नशे का कहर…! कुछ तो रहम करो श्रीमान….???(जिले भर में हालात बदतर, लेकिन थोथे गाल बजाने में जुटी पुलिस)

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लावारिस शहर-29-🎞
(बृजेश तोमर)
💉 नशे का कहर…! कुछ तो रहम करो श्रीमान….???💉
(जिले भर में हालात बदतर, लेकिन थोथे गाल बजाने में जुटी पुलिस….)

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💉 उफ..,नही..,अब सहन नही होता….!
में मर जाऊँगा,मुझे बचा लो,मुझे पैसे दे दो….
मेरा शरीर टूट रहा है,जगह-जगह के घावों में(जो खुद धारदार चीज से अपने शरीर को काटकर बनाये है)बहुत दर्द हो रहा है….
एक,बस एक,बस एक “टिकट (स्मेक की पुड़िया)..??💉💉
उफ….???

👉 उधर माँ….
बेहोशी की हालत में भी बार-बार चीखती है,चिल्लाती है..
मेरे लाल को बचा लो,मेरे लाल को बचा लो….??
🎞 यह किसी फिल्म की पटकथा या ड्रामा नही बल्कि हकीकत है,वह भी एक-दो नही अनगिनत परिवारों के उन बच्चो की जो महानगरों की तर्ज पर हाई प्रोफाइल “स्मेक”जैसे नशे के आदी हो चुके है….!

दुखद,बेहद दुखद….!!
युवा पीढ़ी “स्मेक”जैसे नशे की गिरफ्त में आकर बर्बाद होती जा रही है….
परिवार तबाह होते जा रहे है…
चोरी-चकारी के अतिरिक्त हत्याये -आत्महत्याएं जैसे जघन्य अपराध घटित होते जा रहे….
हालात बद से बदतर होते जा रहे है….
ओर कानून व्यवस्था का जिम्मा संभाले खाकी के कर्णधार चार क्वार्टर शराब,दो चार सौ रुपये का जुआ,सट्टा पकड़कर महिमामंडित होने व गाल बजाने में जुटे है…..?

वाह रे खाकी,वाह….!
ऐसा संरक्षण,ऐसी यारी…?
अरे हालात बड़े विषम है…
कुछ तो रहम करो श्रीमान….!!
कुछ तो नज़र करो कप्तान…!!

इस तथ्य को स्वीकारो कि पिछले कुछ समय मे में “सफेद पावडर के काले कारोबार” ने जिले भर में पैर पसार लिये है…..
बेरोजगारी का दंश झेल रही युवा पीढ़ी मानसिक अवसाद की स्थिति में इसका तेजी से शिकार होकर जीवन बर्बाद कर रही है(या सुनियोजित तरीके से कराई जा रही है..)
सेकड़ो परिवार तबाह हो चुके है और हज़ारो होने के कगार पर है….
नशे की यह बीमारी महामारी के रूप में तब्दील होती जा रही…।
“देश भक्ति- जन सेवा” के लिये बनाये गये “वातानुकूलित कक्ष “से बाहर झांककर देखिये,यह गोरखधंधा सहज-सुलभ,निर्वाध रूप से शहर भर में खूब फल-फूल रहा है,ओर चन्द सिक्को की खनक में आपका अधीनस्थ अमला उन सौदागरों के आगे अपना ईमान गिरवी रख चुका है….!
यकीन मानिए,सख्ती से पेश आकर बन्द कराकर देखिये इस काले धंधे को ….
रूह कांप जाएगी सामने आने बाली भयावहता की तस्वीर के दूसरे रूप को देखकर….
चीखते,बिलबिलाते,छटपटातेनशे के बुरी तरह आदी हो चुके देश के भावी भविष्य को बिलखता देखकर….!
उफ,दुखद….!
दुखद,बेहद शर्मनाक….!

सोचिये, क्या आप नही जानते कि आपके मातहतों की रजामंदी के विरुद्ध कोई भी काला कारोबार पैर पसार सकता है…!
खैर, जो हुआ सो हुआ,पर…
अब तो उठिये, रोकिये…,अन्यथा,
घर-घर लिखी होगी नशे से हुई बरबादी की दास्तान…..!
ओर यह भी तय है कि अछूते नही होंगे “खाकी” के वो पहरुए भी….
जिनकी शह पर पनपे सौदागरों के मोत के कारोबार को फैलाने में आपका अपना भी शामिल होगा, लेकिन तब शायद बहुत देर हो चुकी होगी….?????
उफ,सोचिये जरूर….!
खुदा खैर करे…..!!!
खुदा खैर करे…..!!!!

नाचीज- बृजेश सिंह तोमर
www.khabaraajkal. com

नोट-कलमकार खाकी के कर्णधारो से अपील करता है कि वर्दी पहनते वक्त ली गयी शपथ की चन्द लाइने यदि याद रह गयी हो तो इस ज्वलन्त विषय पर ध्यान आकर्षित करे…!युवा पीढ़ी के भविष्य को बचाये अन्यथा….???खुदा खैर करे…..!