किस करवट बैठेगा लोकसभा चुनाव में राजनीति का ऊंट….?किसका है “राजयोग”,ओर किसे मिलेगी “मात”..!देश का अगला “सरताज” कौन…?किसकी राह में फूल और किसकी में कांटे…?क्या कहता है “ग्रहों का अंकगणित”..? देखिये,ज्योतिष के आईने से…..!!!

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(प.विकासदीप शर्मा)

7 मई 2019 से मंगल और राहु मिथुन राशि में अंगारक योग बना रहे हैं ।

2019 भारत के लिए महत्वपूर्ण वर्ष रहने वाला है। दुनियाभर की नजरें इस दौरान भारत और उसके महाचुनाव पर टिकी होगी। 2019 के ये आम चुनाव अभी से लोगों के दिलो-दिमाग पर छा गए हैं। कौन होगा अगला प्रधानमंत्री की बहस सत्ता के गलियारों से निकलकर आम शहरों के गली-मोहल्लों तक पहुंच गई है। वहीं लोकसभा चुनाव 2019 के समय आकाशीय ग्रहों की स्थिति एक बेहद अप्रत्याशित परिणामों की ओर इशारा कर रही है।

7 मार्च 2019 के दिन धनु राशि में शनि और केतु की युति होने वाली है। भारत में अप्रेल-मई के दौरान होने वाले आमचुनावों के लिए इस युति का अध्ययन करना जरूरी हो जाता है। शनि न्याय के अधिपति है। अनुशासन और जवाबदारी शनि के लिए महत्वपूर्ण है। वहीं, केतु उद्देश्यों को लेकर अपरंपरागत और अस्पष्ट है। दोनों ग्रहों को क्रूर ग्रहों की संज्ञा दी गई है। शनि लोकतंत्र का कारक है। जब भी शनि, केतु के साथ युति करता है, तो वह अत्यधिक अपरिपक्व हो जाता है। शनि अपना मूल तत्व छोड़कर एक अलग ही अप्रत्याशित काम करता है। 2019 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंदी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के लिए इस युति से आने वाला समय देखा जा सकता है। मार्च 2019 से होने वाली शनि-केतु की यह युति कुछ बहुत ही ड्रामाटिक या कहें नाटकीय या अप्रत्याशित परिवर्तन ला सकती है।
BJP को संघर्ष 2014 से अधिक है । मोदी जी का योग बढ़िया है ।
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को मेहसाना में वृश्चिक लग्न कर्क नवांश वृश्चिक राशि में हुआ। आपकी छवि ईमानदार होने के साथ-साथ कट्टर हिन्दूवादी नेता के रूप में है।

प्रधानमंत्री मोदी की कुंडली में बन रहा चंद्र-मंगल का नीच-भंग योग इनको जनता के एक बड़े वर्ग का अपार प्रेम और समर्थन दिला रहा है तो वहीं दूसरी ओर मंगल के शत्रु भाव का स्वामी होकर जनता के कारक चंद्र से युत होने के कारण उनको भारी विरोध का सामना भी करना होता है।
2019 वर्ष कुंडली बतती है कि अगले एक वर्ष में उनको अपने राजनीतिक जीवन में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा। चंद्र में शुक्र की विंशोत्तरी दशा सितंबर 2018 से मई 2020 तक रहेगी। सप्तमेश शुक्र वर्गोत्तम होकर सत्ता स्थान यानी दशम भाव में है जो कि उनको 2019 के आम चुनावों के बाद केंद्र की सत्ता में वापस लेकर आएगा किंतु अन्तर्दशा नाथ शुक्र के द्वादश यानी (हानि) भाव का स्वामी होने के कारण बड़ा राजनीतिक नुकसान झेलना पड़ सकता है। नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन में इस वर्ष पहली बार उनके विरोधी उन पर हावी होते दिखेंगे।
भाजपा और नरेंद्र मोदी की कुंडली की वर्तमान स्थिति बहुत मजबूत है।नरेंद्र मोदी का लग्न और राशि दोनो वृश्चिक है।भाजपा और मोदी दोनो का मंगल बहुत मजबूत है और गोचर वश भी वर्तमान में सत्ता देकर ही जाएगा। वहीं, देश की कुंडली में जब से चंद्रमा की महादशा प्रारम्भ हुई है तबसे भाजपा मजबूत हुई है।पराक्रमेश चंद्रमा ही भाजपा का मनोबल चरम पर किए हैं और भाजपा का दशम भाव का मजबूत होना इसे कर्म में परिणीत करता है।भाजपा बहुत ही मजबूत होगी और आने वाले दस वर्षों तक केंद्र में इसका शासन रहेगा।

कांग्रेस की कुंडली मीन लग्न की है। गुरु में शुक्र की विषोंतरी दशा सितंबर 2019 तक कांग्रेस का नुकसान ही करेगी।राहुल गांधी की कुंडली का पंचम गुरु ही इनको अपनी पार्टी का मुखिया बनाता है। मिथुन लग्न और वृश्चिक राशि की है।शनि का गोचर चंद्र कुंडली से द्वितीय भाव में और वर्तमान मंगल का गोचर इनको चुनाव में असफलता दिलाएगा।नवम का राहु भाग्य बाधा उत्पन्न करता है।चंद्रमा की महादशा 2008 से 2018 तक कई बार इनको सफलता भी दी लेकिन 2018 से 2022 तक का समय इनका बहुत बेहतर नहीं है।

वृषभ लग्न की वर्ष कुंडली के दशम भाव को देख रहे गुरु, शनि और बुध उनको केंद्र की सत्ता में वापस आने का ज्योतिषीय संकेत तो दे रहे हैं किन्तु उनकी राजनीतिक पकड़ अब ढीली होती जाएगी। पूर्ण बहुमत की सरकार चालने के अभयस्त नरेंद्र मोदी को 2019 में जोड़-तोड़ की सरकार का मुखिया बनकर कदम-कदम पर मानसिक कष्ट का सामना करना पड़ सकता है।

2019 वर्ष का प्रवेश कन्या लग्न व तुला राशि में हुआ है। कन्या लग्न जो कि मोदी जी की राशि से नौंवा है। यह मोदी जी के लिये भाग्यवर्धक हो सकता है।

मोदी जी की राशि से वर्ष राशि 12वीं है जो कि मोदी जी की कुंडली में व्यय भावको दर्शाती है। देश के प्रधानमंत्री होने के नाते नरेंद्र मोदी से कुछ और कड़े फैसले देखने को मिल सकते हैं जो कि प्रारंभ में काफी परेशानी वाले रह सकते हैं। दूरदर्शिता के हिसाब से यह फैसले प्रधानमंत्री मोदी के आत्म सम्मान को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।

कुल मिलाकर देखा जाये तो 2019 में मार्च की शुरुआत से लेकर वर्ष के अगस्त के उतर्राध तक का समय इनके लिये मिला जुले परिणाम लेकर आयेगा। एक और राहू इनकी राशि से भाग्य स्थान से परिवर्तन कर अष्टम भाव में चले जायेंगें वहीं केतु धन भाव में शनि के साथ आ जायेंगें। नरेंद्र मोदी को इस समय फाइनेंशियली काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। उनके खर्चों में भी बढ़ोतरी की संभावनाएं इस साल बन रही हैं। बतौर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय कार्यरत हैं ऐसे में उनके द्वारा लिये गये फैसले आर्थिक तौर पर हो सकता है सफलता लाने वाले साबित न हों। अतीत में लिये फैसलों का नुक्सान भी इस समय उभर कर सामने आ सकता है।

कुल मिलाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिये आने वाला समय उपलब्धियों भरा रहने के आसार हैं।

शनि केतु का योग 1996 : में शनि-केतु ने करवाया बड़ा फेरबदल
शनि-केतु की इस युति का इस चुनाव पर असर जानने के लिए हमें इस युति में हुए अन्य चुनावों को समझना होगा। 1996 में अप्रेल-मई में चुनाव के दौरान शनि-केतु की यह युति मीन राशि में थी। उस समय किसी भी पार्टी को पूरा बहुमत नहीं मिला और भारतीय जनता पार्टी ने अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में महज13 दिन की सरकार बनाई