कसौटी पर चढ़ती सियासत.. ..@ राकेश अचल

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एक पखवाड़े बाद देश की सियासत का नया चेहरा दुनिया के सामने होगा .बुंदेलखंड में एक कहावत है कि-‘मौ दूर कई थापर ‘यानि प्रतीक्षा की घड़ियां ज्यादा दूर नहीं है ,इसलिए ज्यादा उतावला होने की जरूरत नहीं है.देश की सियासत कसौटी पर चढ़ चुकी है ,केवल परिणाम आना शेष है .
वर्ष 2019 की चिलचिलाती धूप और गरमी में हुए आम चुनाव देश की दिशा और दशा तय करने के साथ ही ममौजूदा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता कि हकीकत भी ब्यान करेंगे .पांच वर्ष पूर्व मोदी जी एक आंधी की तरह राजनीति में उभरे थे और 2 सीटों से शुरू हुई भाजपा को 282 सीटों के आंकड़े तक ले आये थे .इन पांच सालों में श्री मोदी जी ने देश के साथ डंकिया में भी कथित रुप से अपनी लोकप्रियता का डंका पीटा है इसलिए इस चुनानव में उनके नेतृत्व में भाजपा गत चुनाव के मुकाबले 282 के आंक पर ही कज्दी दिखाई दे जाये तो ये उनकी कामयाबी होगी और यदि 283 भी हो गयी तो उनकी लोकप्रियता का नया कीर्तिमान माना जाएगा .
लोकसभा में सबसे अधिक 404 सीटेंकांग्रेस ने 1984 के चुनाव में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जीतीं थीं जो एक कीर्तिमान था लेकिन अगले ही चुनाव में वे अपनी लोकप्रियता खो बैठे ,उनके नेतृत्व में कांग्रेस को 197 सीटें ही मिलीं .ये तब हुआ जब वीपी सिंह कांग्रेस से निकल भागे थे .वीपी सिंह और उनके बाद चंद्रशेखर की सरकारों को इतिहास में कोई जगह नहीं मिली ,लेकिन 1991 के आम चुनाव में कांग्रेस ने राजीव गांधी को गँवा कर 244 सीटें जीतीं और पीव्ही नरसिम्हाराव को प्रधानमंत्री बनाया .1996 के आम चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 161 सीटें जीत कर सरकार तो बना ली लेकिन एक पखवाड़े में ही भाजपा की सरकार बहुमत के अभाव में गिर गयी.बाद में बिना चुनाव के एचडी देवगौड़ा और इंद्रकुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री बने .
वर्ष 1998 के आम चुनाव में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने 182 सीटें जीत कर एक बार श्री अटल बिहारी बाजपेयी की सरकार तो बना ली लेकिन ये सरकार भी 13 महीने में गिर गयी और फिर 1999 के आम चुनाव में भाजपा गठबंधन ने फिर यथा स्थिति कायम रखते हुए अटल जी को दोबारा प्रधानमंत्री बनवा लिया इस चुनाव में कांग्रेस के पास कुल 114 सीटें बची थीं .2004 के चुनाव में कांग्रेस गठबंधन फिर 145 सीटें जीत कर फिर सरकार बनाने में कामयाब हो गयी थी इस चुनाव में भाजपा गठबंधन को केवल १३८ सीटें मिलीं थीं .2009 में भी कांग्रेस 206 सीटें जीतकर सरकार बनाने में कामयाब रही .
कांग्रेस की लोकप्रियता को 2014 के चुनाव में करारा झटका लगा.इस चुनाव में भाजपा गठबंधन ने नरेंद्र मोदी की अगुवाई में 336 [भाजपा 282 ]सीटें जीत कर सरकार बनाने में कामयाब रही अब 2019 में मोदी को भाजपा गठबंधन को 336 और भाजपा को 282 के आंकड़े के आगे ले जाना है. इस आंकड़े में कमी के बावजूद भाजपा के गठबंधन की सरकार तो बन सकती है किन्तु प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता को बट्टा लग सकता है .
मोदी जी से पहले एक दशक तक देश की सरकार चलाने डॉ मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार को दूसरे
चुनाव में 145 के मुकाबले 206 सीटें मिली थीं ,ये लोकप्रियता डॉ मनमोहन सिंह की नहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की नेता सोनिया गांधी की थी .सोनिया अपनी दूसरी अग्निपरीक्षा में कामयाब रहीं थीं ,ऐसी ही परीक्षा भाजपा गठबंधन के नेता के रूप में इस बार नरेंद्र मोदी को देना है .मोदी ने अपनी स्थिति बनाये रखने के लिए ऐडही-छोटी का जोर लगाया है लेकिन हालात तेजी से बदले हैं .तमाम संवैधानिक संस्थाओं के अघोषित समर्थन के बावजूद मोदी जी 2014 को दोहराने की स्थिति में नहीं हैं ,फिर भी करिश्मे उनके साथ चलते आये हैं ,इसलिए 23 मई 2019 के बाद क्या होगा कहना कठिन है.चौकीदार के दामन पर लगा चोरी का दाग धूल भी सकता है और गहरा भी हो सकता है .अब बस तेल देखिये और तेल की धार ,इसलिए बेसिर-पेअर की बातें मत कीजिये .
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@-राकेश अचल