बिना ट्री कटिंग परमिशन पेड़ कटाई में ग्रामीण बने मोहरा।* 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 *लोक निर्माण बिभाग और आर के जैन कंपनी क्यों बनी मूकदर्शक?* 🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥🔥 *लोक निर्माण बिभाग और आर के जैन कंपनी ने अबैध पेड़ कटाई मामले पर क्यों साधी चुप्पी?*

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*शिबपुरी।* जिले के करैरा तहसील अंतर्गत करैरा से बामोरकला तक पी डब्लू डी के अंतर्गत सड़क चौडीकरण का कार्य किया जा रहा है जिसमे बामोर डामरोन से खेराई तक जो हजारो की तादाद में अबैध रूप से पेड़ काटे गए उसमे लोक निर्माण बिभाग ने आर के जैन कंपनी को बहुत हद तक रहमत बरसी है कंपनी को ज्यादा तकलीफ न हो इसलिए बिभाग ने कंपनी को एक स्कीम बताई जिससे बिना परमिशन सड़क चौडीकरण का कार्य भी हो जाये और सड़क में बाधक बन रहे हजारो पेड़ भी कट जाए मतलब *,सांप भी मर जाये और लाठी भी न टूटे,*
कंपनी द्वारा सड़क में भारी मात्रा में पेड़ बाधक बन हुए थे जिनको काटे बिना सड़क का चौडीकरण कार्य सम्भव नही था इसके लिए कंपनी को परमिशन लेनी होती जिसमे समय लगता पहले परमिशन लेनी होती फिर इन पेड़ों का ऑक्शन होता पिछोर और करैरा अनुबिभाग दोनों के अंतर्गत ऑक्शन होता फिर पेड़ो को काटने की प्रक्रिया होती इसके बाद सड़क का चौडीकरण का कार्य शुरु होता लेकिन ऐसा क्या हुआ कि बिभाग ने आर के जैन कंपनी को इस प्रक्रिया को पूरा न किये हुए ही सड़क चौडीकरण का कार्य शुरू करने की इजाजत दे दी।
*🔥ज्वलंत जांच के बिंदु:-🔥*

*जिन बृक्षों की परमिशन होना थी आखिर वो कैसे कट गए ?*

*इन बृक्षों के कटने से किसको लाभ हुआ ?*

*बृक्षों के कटने के तुरंत बाद ही सड़क का कार्य कैसे शुरु हो गया ?*

*जिन पेड़ो की परमिशन होना थी उन पेड़ो को आखिर किसने काटा ?*

*क्या सड़क में जो पेड़ बाधक बन रहे थे वो किसी की संपत्ति नही थी निगरानी बिभाग की या कंपनी की इन पेड़ों के रखरखाव की कोई जिम्मेदारी नही थी?*

*परमिशन की प्रक्रिया शुरू न होते हुए पेड़ अबैध रूप से कट गए तो निगरानी बिभाग और आर के जैन कंपनी ने इसके खिलाफ कोई कदम क्यों नही उठाया ?*

*आखिर शासकीय संपत्ति हरे भरे पेड़ काटने वालो के खिलाफ कोई ठोस कदम क्यों नही उठाया गया ?*

*आखिर हरे भरे पेड़ो को बिना परमिशन काटने वालो के खिलाफ कोई कार्यवाही क्यों नही की गई ?*

अबैध रूप से पेड़ कटाई के मामले में शिकायत उच्च स्तर पर पहुचने से बिबाग में हड़कंप पूर्णस्थिति हुई इससे आनन फानन में अनुबिभाग द्वारा सर्वे कराया गया पटवारियो को भेजा गया लेकिन जो नही होना था वही हुआ बेचारे गरीबो के सिर सारा मामला मड़ दिया गया अंततः मामला हुआ कि सड़क में बाधक बन हुए पेड़ ग्रामीणों ने काटे अब भला ग्रामीणों को इन पेड़ों को काटने की अनुमति किसने दी इतनी विशाल पेड़ ग्रामीण कैसे उखाड़ सकते है जो जड़ो सहित उखड़े हुए पड़े है अगर ग्रामीणों ने पेड़ काटे तो वो पेड़ काटते रहे और निगरानी बिभाग और कंपनी क्यों चुप रही क्यों उन्हें रोका नही गया कि इन पेड़ों की परमिशन होना है इनको न काटा जाए शासकीय संपत्ति की लूट खसोट क्यों मचाई गयी जब ग्रामीण पेड़ काटते रहे तो इसकी शिकायत कंपनी ने क्यों नही की बल्कि कंपनी ने तुरंत कटे हुए पेड़ो को किनारे करके सडक डालना शुरू कर दिया ।
मतलब साफ है कि सड़क कम्पनी और बिभाग ने ग्रामीणों को मोहरा बनाकर अपना काम निकाला है और निगरानी बिभाग ने अपने निज हित के लिए शासकीय संपत्ति को अबैध रूप से नुकशान पहुचाने में सहयोग प्रदान किया है ।
जब ग्रामीणों से बात की तो नाम न छापने की शर्त पर उनहोने बताया की कंपनी ने मशीन से पेड़ गिरा दिए और कह दिया कि जिस जिसके पेड़ हो ले जाओ
इस सम्पूर्ण मामले की सपथपत्रो और फोटोग्राफ के साथ उच्च स्तरीय शिकायत की जाएगी किसी भी हाल में ग्रामीणों को इनका मोहरा नही बनने दिया जाएगा।

*🖋संजीब पुरोहित🖋*