वनवासियों के लोकजीवन में भारत के आत्मतत्व का वास है:पद्मश्री महेश शर्मा* *मंगलम में शहर की संस्थाओं ने किया समाजसेवी महेश शर्मा का अभिनंदन* *हलमा प्रथा से सैंकड़ो गांवो में लिखी ग्राम्य विकास की क्रांति*

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शिवपुरी/19 अप्रेल: व्यक्तिगत उत्कर्ष के लिये किया गया कार्य कर्म है और जब सामाजिक उत्थान को केंद्र में रखकर किये गए कर्म धर्म में तब्दील हो जाते है।इस बुनियादी धर्म की पालना ही भारत का असली धर्म है यही दुनिया को भारत का संदेश है।उक्त उदगार पद्मश्री महेश शर्मा ने आज मंगलम में आयोजित अपने अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।शिवगंगा के माध्यम से झाबुआ जिले में ग्रामीण विकास और जलसंग्रहण की क्रांति लाने वाले श्री शर्मा का आज मंगलम द्वारा आयोजित समारोह में शहर भर की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं ने स्वागत किया।।। श्री शर्मा ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहाकि शिवपुरी से उन्हें जो सामाजिक जीवन के संस्कार हासिल हुई उन्ही की दम पर उन्होंने झाबुआ जैसे जिले में समाजकार्य से लोगो को जोड़ने में सफलता प्राप्त की।उन्होंने बताया कि आज झाबुआ में “हलमा”अभियान के तहत जल संग्रहन औऱ ग्रामीण विकास पर जिस चरणबद्घ तरीके से काम हो रहा है उसे देखने और समझने के लिये प्रशासन, प्रबन्धन,औऱ नवाचार के सभी प्रमुख संस्थान से लोग आ रहे है।इस समय लगभग 300 आई आई टीयन शिवगंगा से जुड़े हुए है जिनमे से तमाम लोग इस समय आईएएस,आईपीएस,एवं अन्य सेवाओ के जरिये नियोजन में हलमा जैसे मॉडल पर काम कर रहे है।उन्होंने बताया कि हलमा झाबुआ की एक लोक परम्परा है जिसमे व्यक्ति जब अपने सामर्थ्य से अपने घर की रक्षा या पुननिर्माण नही कर पाता तब उसके आह्वान पर पूरा गांव एकत्रित होकर उस घर को खड़ा करते है। श्री शर्मा ने बताया कि जब वह झाबुआ में गये तब वहां पलायन सबसे बडी समस्या थी लोग 6-6 महीने के लिये घर छोड़कर काम के लिये चले जाते इसके मूल में पानी की समस्या थी गांवो में पानी नही था उन्होंने लोगो को समझाया कि जब हलमा के तहत हम पूरा गांव मदद के लिये जा सकते है तब गांव के संकट के लिये हम हलमा प्रथा का आह्वान क्यों नही कर सकते है?शुरुआती परेशानी के बाद इस हलमा प्रथा ने पूरे झाबुआ में व्यक्ति के स्थान पर सामूहिक रूप अखितयार कर लिया गांव के गांव हलमा के नए स्वरूप में साझीदार हो गए हजारो लोग गेंती फावड़े लेकर जल सरंचना बनाने में जुटे आज परिणामस्वरूप झाबुआ में हजारों जल सरंचना लबालब पानी से भरी है इस काम ने करीब 14 साल का लंबा समय लगा । श्री शर्मा ने बताया कि न केवल जलग्रहण बल्कि गांव के सकल विकास की अवधारणा को स्थानीय आवश्यकताओं औऱ उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप डिजायन किया जा रहा इसके तहत तीन विभिन्न श्रेणियों में गांवों को वर्गीकृत किया गया है।आज गांवो में स्वावलंबन औऱ स्वाभिमान की अलख जगी है जो भारत की मूल आत्म की अभिव्यक्ति ही है। पद्मश्री शर्मा ने बताया कि झाबुआ के भील समाज के संस्कार तथाकथित आधुनिक औऱ सभ्य समाज से कहीं बेहतर और सुसंस्कर्त है उन्होंने बताया कि आदिवासी वर्ग में अतिथि सत्कार की भावना अद्धभुत है जो समर्पण की पराकाष्ठा का अहसास कराती है उन्होंने बताया कि भगौरिया पर्व वयस्को का एक उन्मुक्त महोत्सव लेकिन उसमें वासना का तत्व अंश भर भी नही होता है यह सभ्य समाज के लिये सीखने की बात है। श्री शर्मा ने बताया कि भील समाज की महिलाओं में अद्धभुत कौशल और साहस होता है जो आज पढ़ी लिखी बेटियों में भी नही हो सकता।उन्होंन बताया कि झाबुआ का वनवासी वर्ग लोककल्याण का हामी है क्योंकि हमारे सभी धार्मिक अनुष्ठान, उपक्रम खुद या परिवार के कल्याण की कामना से अनुप्राणित रहते है पर भील समाज की सभी धार्मिक क्रियाओ,प्रार्थना,अनुष्ठान में कही भी खुद के लिये कुछ नही रहता है।। श्री शर्मा ने बताया कि सज्जन शक्ति का सदुपयोग ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है इसके आगे सभी सरकारी नियोजन निष्प्रभावी है इसलिये हमे जनभागीदारी की बुनियादी अवधारणा पर जोर देना होगा।उन्होंने शिवपुरी के सभी समाजसेवीयो से आग्रह किया कि वे झाबुआ आकर ग्राम्य विकास के इन प्रकल्पों का अध्ययन करें और आवश्यकतानुसार अपने समाज मे इसे लागू करने का प्रयास करें।। इससे पूर्व मंगलम संस्था के सचिव इं राजेंद्र मजेजी ने स्वागत वक्तव्य देते हुए कहाकि इंसान जो किताबों में पढ़ता है वह तो सिर्फ सूचनाओं का समुच्चय है वास्तविक ज्ञान तो जीवन जीने से अर्जित होता है पद्मश्री महेश शर्मा किताबी नही धरातली ज्ञानी है उन्होंने बिखरी हुई समाज की शक्तियों को एकत्रित कर बदलाब की क्रांति लाने का काम किया है।। श्री शर्मा का इस समारोह में शहर की विभिन्न संस्थाओं ने शॉल श्रीफल ऒर माला पहनाकर अभिनन्दन किया।समारोह में मंगलम की ऒर से ई राजेंद्र मजेजी, डॉ गोविंद सिंह,दीपक गोयल,राजू बाथम,प्रमोद भार्गव,ने अभिनंदन किया इसी प्रकार लायंस क्लब के डॉ शेलेन्द्र गुप्ता,रोटरी क्लब के राजेश गोयल,भाविप के उमेश मित्तल,सरला वर्मा,संघ के जिला चालक विपिन शर्मा,पेंशनर संघ से डॉ बीके शर्मा,पब्लिक पार्लियामेंट से प्रमोद मिश्रा, धुर्व उपमन्यु, प्रेस क्लब से वीरेंद्र भुल्ले, संजीव बाँझल,प्रमोद श्रीवास्तव, लालू शर्मा,राजू शर्मा,संजीव शर्मा,नरेंद्र शर्मा,जल संसाधन विभाग के रिटायर्ड एसडीओ एमपी पांडे,जिला परियोजना अधिकारी वाटरशेड अजय सिंह परिहार, सर्वाइकल सेवक भरत अग्रवाल,महेश शर्मा,रेडक्रास से डॉ सीपी गोयल,ग्रामीण बैंक समाजसेवा समिति एस के एस चौहान,नपा के पूर्व उपाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह चौहान, लेखक दिनेश वशिष्ठ, पूर्व विधायक प्रहलाद भारती, आईएमए के डॉ राजेन्द्र गुप्ता,रीता गुप्ता,सँस्कृत भारती के पुरूषोतम गौतम,सुरेश शर्मा,केशव कॉलेज की संचालिका श्रीमती सुषमा पांडे,श्री मति उमा मिश्रा, गोपाल सिंघल,पार्षद हरिओम नरवरिया,शिक्षाविद गोकुल दुबे,प्रेम शंकर पाराशर,भानू दुबे,सुरेंद्र शर्मा,संजीव भार्गव,मोतीसिंह परिहार,सुरेंद्र यादव,आदि ने शॉल श्री फल भेंट कर श्री शर्मा का अभिनंदन किया। इस अवसर पर लेखक पत्रकार प्रमोद भार्गव ने अपनी नवीन रचना दशावतार की प्रति भी महेश शर्मा को भेंट की शहर की ओर से प्रतीक चिन्ह मंगलम संचालक राजू बाथम ने भेंट किया।समारोह का संचालन डॉ अजय खेमरिया ने किया आभार प्रदर्शन की रस्म मंगलम के उपाध्यक्ष डॉ गोविंद सिंह ने पूरी की।