!ताकि सनद रहे!! #सर_जी….,अगर हिंदुत्व अब भी_खतरे में_है तो आप इतिहास के सबसे विफल महानायक हैं..! #डॉ राकेश पाठक

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एडिटर इन चीफ़
#DNN न्यूज़ चैनल ,भोपाल

सबसे पहले नोट कीजिये कि जन्मना हिन्दू हूँ और इसके बावज़ूद सिर्फ़ मानव धर्म में विश्वास करता हूँ। किसी धर्म विशेष में जन्म लेने मात्र से किसी तरह का कोई अतिरिक्त गौरव या अहंकार न है और न कभी हो सकता है।)

अब आइये मुद्दे की बात करते हैं।

नरेंद्र मोदी सरकार को पांच साल पूरे हो गए हैं। एक साधारण नागरिक और पत्रकार दोनों ही रूप में अपने राम की राय यह है कि मोदी हर मोर्चे पर विफल रहे हैं।
लेकिन इस आलेख का विषय उनकी प्रशासनिक विफलता का खाका खींचना नहीं है। यहां उस सबसे महत्वपूर्ण विषय का विवेचन होगा जो पूरे देश को मथता रहता है।
वो है “हिंदुत्व को खतरा।”

● आप ही तो अलापते हैं- हिंदुत्व ख़तरे में है..

पिछले कुछ सालों में एक हव्वा खड़ा किया जा रहा है कि “हिंदुत्व ख़तरे में है”। एक खास विचारधारा विशेष से जुड़े लोग सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक यह ख़तरा बताते नहीं अघाते।
हालत ये हो गयी है कि एक पार्टी गोरखपुर,फूलपुर के चुनाव हार जाए तो तुरन्त हिदुत्व ख़तरे में आ जाता है…कर्नाटक में सरकार न बना पाए तो हिंदुत्व खतरे में। बिहार में उप चुनाव हार गए तो हिंदुत्व मिटता हुआ लगने लगता है।

किसी विश्वविद्यालय में अस्सी साल से धूल खा रही जिन्ना की फोटो सामने आ जाये तो हिंदुत्व खतरे में पड़ जाता है..!

सरकार और उसके नेता की रीति नीति को आलोचना की जाए तो हिंदुत्व खतरे में आ जाता है..! किसी सामूहिक ब्लात्कार में अगर आरोपी हिन्दू हैं तो हिंदुत्व ख़तरे में।।

प्रतिपक्ष के दर्जन भर नेता भी अगर किसी राजनैतिक आयोजन में इकट्ठा हो जायें तो ये एकजुटता आपको सकल हिंदुत्व के खिलाफ विधर्मियों, हिन्दूद्रोहियों, देशद्रोहियों का जमघट लगता है।
(उपरोक्त प्रत्येक घटना के बाद सोशल मीडिया पर हिंदुत्व को बचाने की पुरजोर दुहाई देने वाली पोस्ट्स की भरमार होती रही है। तस्दीक़ कर लीजियेगा )

कई पोस्ट में हिंदुओं को लानत भेजी जाती है जिसमें कहा गया है कि सैकड़ों साल मुगलों, अंग्रेजों और एक परिवार की गुलामी मंजूर रही और आज एक हिन्दू प्रधानमंत्री बर्दाश्त नहीं है।
खास बात यही है कि हिंदुत्व को ख़तरा जिन्हें ज्यादा दिखाई देता है उनमें से शत प्रतिशत “वी सपोर्ट मोदी”, “मंदिर वहीं बनाएंगे”, ‘अगली बार फिर मोदी सरकार” ‘जय जय हिन्दू राष्ट्र’…. आदि आदि आदि के नाम पर सोशल मीडिया पर मौजूद रहे हैं।

● अल्पसंख्यक हो जाने का बैसिरपैर का डर..

एक और बेसिरपैर का ख़तरा बढ़ा चढ़ा कर बताया जाता है वो है जनसंख्या का। बार बार डराया जाता है कि देखना एक दिन मुसलमान बहुसंख्यक हो जाएंगे और हिन्दू अल्पसंख्यक।
इस बहाने भयावह काल्पनिक तस्वीर का ख़ाका खींचा जाता है।
विडम्बना यह कि पढ़े लिखे लोग भी सामान्य गणित नहीं लगाते कि जनसंख्या के वर्तमान आंकडे बताते हैं कि ऐसा कभी सम्भव नहीं है।
(बस इतना सोच लीजिये- हिन्दू अगर अगले कई सौ साल बच्चे पैदा नहीं करेंगे तब भी शायद यह सम्भव नहीं होगा)

अच्छा चलिये थोड़ा इतिहास में झांक लिया जाए..हिंदुत्व को ऐसा ख़तरा क्या पहले कभी किसी ने बताया था..?

● इतिहास में कभी ऐसा ख़तरा नहीं बताया गया..

सन 712 में मुहम्मद बिन क़ासिम के हमले के बाद अगले हज़ार साल से अधिक का इतिहास विदेशी आक्रांताओं के आक्रमणों और अंततः उनके शासन का ही रहा। ईस्वी सन 1000 में मेहमूद गजनवी , 1175 में मुहम्मद गौरी और उसके बाद क्रमशः गुलाम वंश, खिलजी,तुगलक,सैयद, लोधी और अंततः मुगलों का शासन।
मुगलों ने सबसे ज्यादा राज किया।

इस बीच 1498 में पुर्तगाली,1600 में डच, 1602 में अंग्रेज और 1664 में फ्रांसीसी भी आये।
अंग्रजों ने 1947 तक राज किया।

इतिहास के इतने विशाल कालखंड में हिंदुत्व को ख़तरे की ऐसी “रोआपीटी” कभी पढ़ने सुनने को मिली……???
नहीं कभी नहीं..।
तमाम मुस्लिम राजवंशों के सैकड़ों साल लंबे राज में भी कोई ऐसा प्रमाण नहीं मिलता कि हिंदुत्व के नाम पर दूसरे धर्म के प्रति ऐसी नफ़रत फैलाने का कोई संगठित आंदोलन चला हो।

मुसलमान शासकों के अत्याचार के दौर में भी “भक्ति आंदोलन” पुष्पित पल्लवित हुआ। इस आंदोलन ने हिन्दू मुस्लिम संघर्ष को कम करने में अपनी भूमिका निभाई। शंकराचार्य,चैतन्य महाप्रभु से लेकर नानक,तुकाराम,नामदेव,तुलसी,कबीर,सूर सब इसी काल में सर्वधर्म समभाव का अलख जगा रहे थे।

● जंंगे-आज़ादी मेंं किसी ने हिंदुत्व का राग नहीं अलापा

देश के इतिहास के सबसे गौरवशाली कालखंड स्वतंत्रता संग्राम में भी कभी हिंदुत्व को ख़तरे के नाम पर देश को न डराया गया न आंदोलित किया गया।
पहले संग्राम 1857 की क्रांति में अंग्रज़ों से लड़ते हुए किसी लक्ष्मीबाई ने,तात्या टोपे ने,नाना साहब ने या कुंवर सिंह ने नहीं कहा कि हिंदुत्व ख़तरे में इसलिए ये जंग हो रही है।
और तो और इन रणबांकुरो ने एक बूढ़े मुस्लिम बादशाह बहादुरशाह जफर को क्रांति का मुखिया और अपना कमांडर इन चीफ बनाया था।ईस्ट इंडिया कम्पनी के बाद ब्रिटिश राज में दशकों तक आज़ादी का आंदोलन चला। फिरंगियों से लोहा लेते किसी गांधी,किसी लाल-बाल-पाल या किसी सुभाषचंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद या भगत सिंह ने नहीं कहा कि अंग्रेजों से हिंदुत्व को खतरा है…! वे देश की आज़ादी के लिये लड़े और जान न्योछावर कर दी…!
इसलिए नहीं कि आने वाली पीढियां धर्म के नाम पर झूठ का तूमार बांधें और नफ़रत की फसल उगायें।

● पूरा नक्शा भगवा कर लिया फिर भी ख़तरा..?

सन 2014 से शुरू हुआ आपका अश्वमेध अब लगभग पूरे देश को भगवा कर चुका है। आप ही लोग भारत का नक्शा हर दो चार रोज में वायरल करते हैं जिसमें बित्ते भर की जगह छोड़ कर पूरे नक्शे पर भगवा ध्वज लहराता दिखता है।
(हाल ही में तीन राज्यों में हारने के बाद कुछ भूभाग मुक्त हुआ है)

इतिहास का सर्वशक्तिमान प्रधानमंत्री (ईश्वर का वरदान,अवतार आदि आदि), चाणक्य के अवतार पार्टी अध्यक्ष,बीस राज्यों में सरकार (ये भी आपका दावा है हक़ीक़त कुछ और है), सबसे ज्यादा सांसद, विधायक,पंच, सरपंच ,विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के करोड़ों कार्यकर्ता,संघ के असंख्य स्वयंसेवक।
और फिर भी हिंदुत्व ख़तरे में….?

तब तो मानना ही पड़ेगा कि जिस महामानव को आपने हिंदुत्व का ध्वज वाहक बनाया है वह पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
क्योंकि इससे पहले कभी किसी सरकार में हिंदुत्व इतने ख़तरे में नहीं था जितना आज है।
(ख़तरा है… ये हम नहीं आप ही तो प्रतिदिन बता रहे हैं)

● सुनिये ..हिंदुत्व ‘छुई मुई’ नहीं है कि मुरझा जाएगा

अच्छा एक बात और सुनिये… ये जो आप दिन रात हिंदुत्व को खतरा बताते हैं इससे साफ पता लगता है कि आप हिंदुत्व को तो जानते भी नहीं हैं। असली हिंदुत्व तो वो है जो वसुधा को कुटम्ब मानने को कहता है और आप हैं कि पड़ोसी को भी अपना मानने को तैयार नहीं बल्कि उसके खिलाफ़ नफरत को खाद पानी देते रहते हैं।
हिंदुत्व कोई छुई मुई नहीं है कि आपकी राजनैतिक हार भर से मुरझा जाए..! ये एक जीवन पद्धति है जिसका कोई बाल बांका आज तक नही कर सका। (सुप्रीम कोर्ट कह चुका है हिंदुत्व धर्म नहीं जीवन शैली है)
और ये आपका वाला हिंदुत्व नहीं है…आपका तो सिर्फ राजनीति की रोटियां सेंकने का चूल्हा भर है जिस पर आपकी काठ की हांडी चढ़ चुकी है।
हाँ हमें मालूम था कि 2019 आते आते इस चूल्हे में फूंकनी से और जोर से फूं फां की जाएगी। सो आप कर ही रहे हैं।

● आपके पुरखों को तो कभी ऐसा नहीं लगा…

एक छोटा सा काम और कीजिये..घर में माता पिता,दादा दादी, नाना नानी होंगे ही…।
उनसे पूछिये कि क्या उन्हें इन चार पांच सालों से पहले कभी लगा कि हिंदुत्व ख़तरे में है..? सात गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हो लिये इस देश में.. अटलबिहारी बाजपेयी जैसे लोकप्रिय भी।
क्या उनके राज में कभी किसी ने ये डर दिखाया कि हिंदुत्व ख़तरे में..?
तो फिर आज ये डर क्यों बिठाया जा रहा है??
जवाब सीधा और सरल है—सत्ताधारी दल और उसका समर्थक विचार समूह यह समझ गया है कि मुसलमानों से हिंदुत्व को खतरा दिखा कर ही वोट कबाड़े जा सकते हैं..। सरकार चलाने की असली ज़िम्मेदारी में पूरी तरह विफल नेता और उनके समर्थक अब उसी ख़तरे का शोर और बढ़ाएंगे ये तय है।

● भाग्यविधाता नरेंद्र मोदी तो ज़िम्मेदार भी वे ही…

इस समूचे अभियान के केंद्र में सिर्फ और सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। क्योंकि वे न सिर्फ दल बल्कि विचारधारा के ध्वजवाहक हैं…ये तमाम ताकतें अपने अभियान में मोदी को भाग्यविधाता, उद्धारक ,अवतार,वरदान आदि आदि बना कर उनकी “लार्जर देन लाइफ ” छवि गढ़ कर हिन्दू राष्ट्र का सपना परोसती रहतीं हैं। इसीलिए अगर उनके रहते भी आप लगातार हिंदुत्व को ख़तरे का राग अलापते रहते हैं तो सिर्फ़ और सिर्फ़ नरेंद्र मोदी ही विफल महानायक कहलायेंगे ना।
इति।