नूतन ने पाई मुश्किलों पर फतह- पहले मां तो अब मिल रहा पति का भरपूर सहारा, कब इनायत होगी उत्तर प्रदेश सरकार की नजर

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नूतन ने पाई मुश्किलों पर फतह
पहले मां तो अब मिल रहा पति का भरपूर सहारा
कब इनायत होगी उत्तर प्रदेश सरकार की नजर
श्रीप्रकाश शुक्ला
भारत में बेटियों के लिए खेलना और खेल के क्षेत्र में करियर बनाना कभी आसान नहीं रहा। इसकी मुख्य वजह परिवार और समाज की दकियानूसी परम्पराएं तथा देश में खेल संस्कृति का अभाव माना जा सकता है। भारतीय बेटियां भी खेलना चाहती हैं। वह भी अंतरराष्ट्रीय फलक पर मादरेवतन का मान बढ़ाने का सपना देखती हैं लेकिन उनका सफर कभी आसान नहीं होता। खिलाड़ी बेटियों का सफर अगर बीच में ही थम जाए तो फिर वह सपनों में तब्दील हो जाता है। कानपुर की नूतन शुक्ला (अब दुबे) को ही देखें जिन्होंने अपने अधूरे सपनों को न केवल पंख दिये बल्कि अब उड़ान भी भर रही हैं। जिस उम्र में प्रायः एथलीट संन्यास ले लेते हैं उस उम्र में नूतन ने पारिवारिक जवाबदेही के बोझ की परवाह किए बिना उत्तर प्रदेश एथलेटिक्स मास्टर मीट में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर 21 से 25 फरवरी तक बेंगलूर में होने वाली नेशनल मास्टर एथलेटिक्स मीट के लिए क्वालीफाई किया है।