मतदाता_जागरूकता_अभियान_की_वैशाखी_से 21वी #सदी_के_भारत_का_निर्माण!!!!

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विश्व की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला लोकतांत्रिक देश #सोच_बदलो_देश_बदलेगा के नारे के साथ अखण्ड भारत का सपना सँजोये तैयार खड़ा है!! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
तकनीकी युग का आरंभ नॉनिहालों के परिश्रम से,जिनके पाठ्यक्रम में शायद संविधान का (स) भी न आया हो ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
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सरकार को स्वीकारना होगा कि समस्या केवल मतदान में कमी या मतदाताओं की उदासीनता की नहीं है बल्कि चुनाव-प्रणाली में बड़े परिवर्तन की भी है। वर्ष 2013 में सम्पन्न हुए पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों में ‘नोटा‘ (None of the Above) अर्थात् ‘उपर्युक्त में से कोई नहीं‘ के आँकड़ों ने यह सन्देश दे दिया है कि यदि राजनीतिक दल साफ़-सुथरी छवि वाले जन-प्रतिनिधियों की अनदेखी करेंगे तो मतदाता उसे नहीं स्वीकारेंगे। जनता राजनीतिक सुधार चाहती है। देश की सत्ता की बाग़डोर सम्भालने वालों के लिए कुछ बाध्यकारी नियम चाहती है। ऐसा नियम तो होना ही चाहिए कि किसी भी प्रकार के आपराधिक मामलों में संलिप्त व्यक्ति चुनाव में उम्मीदवार न बन सके। उनके लिए भी उम्र, शिक्षा एवं अन्य अर्हताएँ निर्धारित हों। दो से अधिक सन्तान वाले तथा रोगग्रस्त व्यक्ति चुनाव-प्रत्याशी न बन सकें। दल-बदल पूर्णतः प्रतिबन्धित हो। आजीवन राजनीति की पारी खेलने पर भी प्रतिबन्ध हो ताकि नये नेता सामने आ सकें! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
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जिन देशों में मतदान अनिवार्य है, वे हैं- अर्जेन्टीना, आस्ट्रिया, स्विट्ज़रलैंड, इटली, तुर्की, आस्ट्रेलिया, ब्राज़ील, बेल्ज़ियम, चिली, कांगो, इक्वेडोर, फिजी, पेरू, सिंगापुर, थाइलैंड, फिलीपीन्स,मैक्सिको,उरुग्वे, दक्षिण अफ्रीका, बोलीविया और मिस्र. इनमें से कई देशों में १६ से १८ वर्ष की उम्र और ७० वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए छूट का प्रावधान है. मिस्र में केवल पुरुषों के लिए मतदान अनिवार्य है. नीदरलैंड में १९६७ के बाद मतदान की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई. इसके बाद वहाँ मतदान में बीस फ़ीसदी कमी आई. इसी तरह १९९३ में वेनेजुएला में अनिवार्य मतदान समाप्त होने के बाद मतदान में 30% कमी आई! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
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भारत जैसे देश में निष्पक्ष चुनाव करवाना ही एक चुनौती है तो अनिवार्य मतदान कैसे सम्भव होगा? अलबत्ता, मतदान को संविधान के अनुच्छेद 51 ए में मूल कर्तव्यों की सूची में सम्मिलित कर लिया जाए तो मतदाता देश के प्रति अपने इस कर्तव्य के पालन हेतु अवश्य प्रेरित होगा। अनिवार्य मतदान को व्यावहारिक रूप देना भारत में अत्यन्त कठिन है। ज़ुर्माना वसूलना अथवा अन्य प्रकार से दण्ड देना भी एक बड़ी क़वायद होगी, जिसमें बहुत धन और श्रम व्यय होगा। इसलिए ऐसे उपाय किये जाने चाहिए जिनसे मतदान में वृद्धि सुनिश्चित हो। जैसेकि मतदाताओं को मतदान-प्रमाणपत्र दिया जाए। ड्राइविंग लाइसेन्स, राशन कार्ड, नौकरी हेतु आवेदन तथा पासपोर्ट बनवाने के लिए यह प्रमाणपत्र अनिवार्य हो। सरकार की किसी भी योजना से लाभान्वित होने के आकांक्षी वयस्कों के लिए मतदान-प्रमाणपपत्र आवश्यक हो। शासकीय सेवकों के लिए मतदान अनिवार्य कर दिया जाए और मतदान न करने वालों की वार्षिक वेतन-वृद्धि रोक दी जाए। इन चन्द उपायों से भी मतदान का प्रतिशत बढ़ सकता है! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! ! !
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