गुजरात को महाराष्ट्र मत बनाइये @ राकेश अचल

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गुजरात को महाराष्ट्र मत बनाइये
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भाजपा कैसा भारत बनाना चाहती है इस बारे में कोई कुछ कहे या न कहे लेकिन मै भाजपा नेतृत्व से हाथ जोड़कर कहूंगा की वो महात्मागांधी और लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल के गुजरात को किसी भी कीमत पर महाराष्ट्र न बनने दें ,क्योंकि ऐसा होने से देश के दो महान नेताओं की आत्माओं को कष्ट होगा और अखंड भारत का दिवा स्वप्न हमेशा के लिए धूल-धूसरित हो जाएगा .
सावंरकांठा में बलात्कार के एक मामले में बिहार के एक मजदूर की संलिप्तता के बाद केवल बिहारियों पर ही नहीं बल्कि सभी गैर गुजरातियों के खिलाफ जानलेवा हमले शुरू हुए और इसका नतीजा गैर गुजरातियों का गुजरात से पलायन है .घृणा का ऐसा माहौल हम १९८४ में देख चुके हैं,महाराष्ट्र में तो शिव सेना और ठाकरे सेना की सियासत ही गई मराठियों का विरोध करने पर ज़िंदा है .
अभी हाल में देश में हुए तमाम आर्थिक घोटालों में लगातार एक के बाद एक गुजराती कारोबारियों का नाम आया,कुछ देश छोड़कर चले गए लेकिन किसी भी हिस्से में गुजरातियों का बहिष्कार नहीं किया गया,हालांकि ऐसा मुमकिन था और मुमकिन है ,लेकिन जहाँ समझदारी से काम लिया जाता है वहां घृणा के बीज नहीं पनपते .देश में राष्ट्रवाद का नारा देने वाली शक्तियों ने ही बीते चार साल में क्षेत्रवाद को हवा दी है .इस जहरीली हवा से दक्षिण के राज्य पहले से ग्रस्त थे ,और अब उत्तर में भी यही सब होने लगा है .
गुजरात में जो हो रहा है उसके लिए कौन जिम्मेदार है ,ये साफ़ नहीं है लेकिन राज्य सरकार की ये जिम्मेदारी अवश्य है की वो गैर गुजरातियों को पूरी सुरक्षा और संरक्षण के साथ ये भरोसा दिलाये की गुजरात केवल गुजरातियों का नहीं बल्कि सभी का है .जम्मू-कश्मीर में ऐसे ही दशकों पहले ब्राम्हणो को खदेड़ा गया ,वे आज तक वापस नहीं लौट पाए ,महाराष्ट्र में ऐसी तमाम कुत्सित कोशिशों को कामयाबी नहीं मिली,दक्षिण ने तो उत्तर का विरोध करते-करते आखिर हार ही मान ली.ऐसे में गुजरात से ये घृणा की हवा चलना ही नहीं चाहिए,क्योंकि देश के प्रधान सेवक गुजरात से ही आते हैं .
आज गुजरात की दशा 2002 के गुजरात जैसी तो नहीं है लेकिन माहौल पहले जैसा ही तनावपूर्ण और असुरक्षा का है.गैर गुजराती मजबूरी में गुजरात से पलायन कर रहे हैं,सरकार कुतर्क दे रही है की लोग त्यौहार की वजह से अपने राज्यों में जा रहे हैं.अगर ये ही सच है तो क्यूब पुलिस ने दर्जनों मामले दर्ज किये हैं,क्यों सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया है ?यानि हकीकत और अफ़साने में कोई मेल नहीं है .
देश के चार बड़े राज्यों में विधान सभा चुनाव के समय इस तरह की गड़बड़ी से जाहिर है की सियासत सही दिशा में आगे नहीं बढ़ रही है .यानी दूसरी बार गुजरात अपने ‘राजधर्म’से विचलित हो रहा है .पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने तो सोलह साल पहले दबी जुबान से गुजरात को राजधर्म पालन करने की नसीहत भी दे डाली थी किन्तु आज तो चौतरफा मौन है?क्या ही अच्छा होता की गुजरात के सभी बड़े राष्ट्रीय नेता अपने राजनितिक अभियानों को दो-चार दिन के लिए स्थगित कर गुजरात जाते और सरकार से राजधर्म का पालन कराने के साथ ही पलायन कर रहे गैर गुजरातियों को आश्वस्त करते ,लेकिन ऐसा कहाँ हो रहा है ?कौन कर रहा है ?
गुजरात की अर्थ व्यवस्था में गैर गुजरातियों की भूमिका का यदि विश्लेषण किया जाये तो वास्तविकता सामने आ जाएगी.बिना गैर गुजरातियों के सहयोग के गुजरात में विकास की गति तो धीमी पड़ेगी साथ ही गुजरात के चेहरे की चमक-दमक भी जाती रहेगी. अभी भी समय है,सम्हालिए हालात को.क्योंकि पटेल ने हमें जोड़ना सिखाया है तोड़ना नहीं .
@ राकेश अचल