लावारिस शहर-28* – *जाके संग रहे संतोषा,ताये लगे न कोउ दोषा….!* *(भाजपा सांसद नंदकुमार का टोलकर्मी मारपीट प्रहसन)*

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*लावारिस शहर-28*
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*जाके संग रहे संतोषा,ताये लगे न कोउ दोषा….!*
*(भाजपा सांसद नंदकुमार का टोलकर्मी मारपीट प्रहसन)*
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*गाँव के लड़कों से बिल्ली मर गयी सो गाँववाले पंडितजी के पास जा पहुचे …..*
*ब्रत्तान्त सुनकर पंडितजी ने “घोर पाप” की उपमा देकर प्रायश्चित में गंगभोज के अलावा सोने की बिल्ली दान करने की नसीहत सारे दोषियों के लिये दे डाली…!*
*किन्तु यह जानते ही उनके माथे पर बल पड़ गये कि बिल्ली मारने बालो में उनका बेटा “संतोष” भी शामिल है….!*
*तत्काल पंचांग पलटा,गहन चिंतन किया और यकायक प्रसन्नचित होकर बोले…?*
वाह-वाह,इस महापाप से सभी बच गये क्यूंकि…*
*”जाके संग रहे संतोषा,ताये लगे न कोऊ दोषा….!!”*

यही स्थिति रही *टोलकर्मी मारपीट प्रहसन* में जिसमे टोलकर्मी को विशुद्ध गुंडई अंदाज़ में पीटा गया….,
पीटने बाले सत्तासीन दल भाजपा के सांसद एवम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंदू भैय्या व उनके सुरक्षकमी-समर्थक थे सो कोई दोष बन ही नही सकता…!
लिहाज़ा,चप्पे-चप्पे पर नज़र रखने का दावा करने बाली पुलिस को भी इसमें कोई गुनाह नज़र नही आया और मामला दर्ज तक नही हुआ…!कारण फरियादी का सामने न आना…!!
*प्रश्न उठता है कि-*
👉 *क्या टोलकर्मी ने पैसे मांगकर या कार्ड देखने की बात कहकर कोई गुनाह कर डाला जो नंदू भैय्या को इस हद तक नागवार गुजरा कि वे खुद मारपीट पर उतर आये…..?*
👉 *ठेठ गुंडई अंदाज़ में ऐसा करना क्या उन्हें शोभा देता है…? अथवा सत्ता मद में इतने चूर है कि वे इस हद तक भी जा सकते है….?*
👉 *माना कि टोलकर्मी ने परिचय मांगा,अथवा यह भी मान लिया कि कुछ गलत भी कह दिया तो क्या उनकी कानूनी एजेंसियां इतनी बोनी हो गयी कि खुद कानून हांथ में लें ले और सम्माननीय ओहदेदार होते हुये भी मारपीट पर उतारू हो जाये…!*
👉 *क्या पुलिस प्रशाशन सिर्फ इस वजह से कार्यवाही करने से हिचकेगा कि मारपीट करने बाले सत्तासीन दल के उनके माई-बाप -आका है….!*
*हद हो गयी ये तो…..!!*
ओर तो ओर सरकारी मुलाजिम भी दोषियों की नुमाइंदगी करते हुये पीड़ितों को ही चुप रहने में सार हे की नसीहत परोस चुके है एवं मौके पर चौका लगाने बाले स्वार्थजीवी सारा दोषारोपण टोलकर्मियों के मत्थे मड बैठे है….!*
*वाह रे गठबंधन…*
*”तुम करो तो लीला,कोई और करे तो चरित्र ढीला…!*
अरे,
*”देश भक्ति-जन सेवा के शूरवीरों”,*
*कुछ* तो अपने तमगों की कीमत समझो…
शायद ये मेहनत से हासिल किये होंगे,खैरात से नही…!*
कानून के रखबाले हो तो सही और गलत का फैसला कर कानूनी कार्यवाही करने का माद्दा तो रखो….!
ओर नंदू भैया,इस बौखलाहट के पीछे सिर्फ सत्तासुख की निरंकुशता ही है या जमीन खिसकने का अंदेशा भी….?
*बहरहाल,*
जो भी था ,लेकिन था तो बहुत *अशोभनीय…!*
ओर वैसे भी हम तो ठहरे ही उस क्षेत्र के बाशिंदे ,जहाँ…
*कोड़े खाते है,ओर*
*जयकारे लगाते है….!!*
*जय हो,जय जय हो…!*
*खुदा खैर करे…!*
*खुदा खैर करे….!!*
*ईश्वर,सद्बुद्धि दे….!*
*खैर करे…!*
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✒ *नाचीज-बृजेश तोमर*✒
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*नोट- मंदबुद्धि कलमकार विलंब से ही सही किन्तु इस प्रहसन पर लिखने को विवश हुआ।आंख बंद करके गलत को सही स्वीकार करना आदत में शुमार नही।खुदा सत्तासुख भोगी हुक्मरानों को सद्बुद्धि दे।खुदा, खैर करे……!!*
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