हरियाली तीज , क्या है महत्व और जानें पूजा विधि…

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*हरियाली तीज , जानें पूजा विधि*

सुखद वैवाहिक जीवन के लिए करें यह व्रत! मुख्य रूप से सुहागन स्त्रियों का यह पर्व 13 अगस्त को धूमधाम से मनाया जाएगा।

सावन की रिमझिम फुहारों के बीच आने वाली हरियाली तीज का सुहागन स्त्रियों के लिए विशेष महत्व है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष में आने वाली तृतीया तिथि को हरियाली तीज कहा जाता है। यह पर्व पंजाब, उत्तर और मध्य भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से तीज के तीन पर्व मनाये जाते हैं। इनमें हरियाली तीज, कजरी तीज और हरतालिका तीज, जो कि हिन्दू पंचांग के अनुसार श्रावण और भाद्रपद मास में आती हैं। खास बात है कि ये तीनों पर्व सुहागन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। सावन मास में आने वाली हरियाली तीज में महिलाएं अपने पति और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करती हैं और व्रत रखती हैं।

इस साल हरियाली तीज 13 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी। वहीं इसी महीने 29 अगस्त को कजरी तीज भी मनाई जाएगी। यह पर्व हरियाली तीज के 15 दिन बाद मनाया जाता है। कजरी तीज को बड़ी तीज या सातूड़ी तीज भी कहा जाता है। राजस्थान में इस दिन तीज माता का भव्य जुलूस निकाला जाता है। इसमें महिलाएं भजन गाती हैं और नृत्य करती हैं।

*हरियाली तीज पर सिंजारा की परंपरा*

हरियाली तीज पर महिलाएँ अपने मायके आती हैं। इस अवसर पर ससुराल से उन्हें सिंजारा भेजे जाने की परंपरा है। दरअसल यह एक ऐसा उपहार है जिसमें नई चूड़ियां, मिठाई और सुहाग का सामान दिया जाता है। चूंकि इस दिन सिंजारा भेजे जाने की परंपरा है इसलिए कुछ स्थानों पर इस पर्व को सिंजारा तीज के नाम से भी जाना जाता है।

*पूजा के लिए ज़रूरी सामान*

बेल पत्र, केले के पत्ते, धतूरा, अंकव पेड़ के पत्ते, तुलसी, शमी के पत्ते, काले रंग की गीली मिट्टी, जनैव, धागा और नए वस्त्र। माता पार्वती जी के श्रृंगार के लिए चूडियां, महौर, खोल, सिंदूर, बिछुआ, मेहंदी, सुहाग पूड़ा, कुमकुम और कंघी। इसके अलावा पूजा में नारियल, कलश, अबीर, चंदन, तेल और घी, कपूर, दही, चीनी, शहद ,दूध और पंचामृत आदि भी लें।

*हरियाली तीज उत्सव और पूजा विधि*

इस दिन सुबह उठकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। इसके बाद काली मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की मूर्ति बनाएँ। थाली में सुहाग की सामग्री सजाएँ और इसके बाद विधिवत तरीके से पूजा की शुरुआत करें।

इस शुभ दिन के अवसर पर विवाहित स्त्री-पुरुष मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करते हैं और उन्हें लाल पुष्प अर्पित करते हैं। साथ ही भोग के अलावा माता पार्वती को सोलह श्रृंगार की सामग्री चढ़ाई जाती है और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना करते हैं। क्योंकि भगवान शिव और माँ पार्वती की कृपा से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

हिन्दू संस्कृति के अनुसार विवाहित महिला के ससुराल वाले इस दिन अपनी बहू को उपहार स्वरुप सुहाग की सामग्री भेजते हैं, जिसे सिंजारा कहा जाता है। इसमें फल, मिठाई, मेहंदी और चूड़ी आदि सामान होता है।

यह पर्व सावन के महीने में आता है इसलिए इस दिन महिलाएँ विशेष रूप से हरे रंग के पारंपरिक वस्त्र पहनती हैं। साथ ही बिंदी, मेहंदी और चूड़ी पहनकर सोलह श्रृंगार करती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएँ एकत्रित होकर खेत और बगीचे में एक साथ नाच-गाकर इस पर्व को मनाती हैं।

व्रत रखकर महिलाएं संध्या या रात्रि में चंद्रमा की पूजा करती हैं। चंद्रमा को दूध और पुष्प अर्पित किया जाता है। इस दौरान लोकगीत गाये जाते हैं।

*हरियाली तीज का पौराणिक महत्व*

तीज का पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के महत्व को दर्शाता है। हिन्दू पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन माता पार्वती के तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिये थे और उनसे विवाह किया था। इसलिए हरियाली तीज का यह पर्व सुहागन स्त्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता है। इस दिन महिलाएं व्रत और पूजन करके भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करती हैं।

कहा जाता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए 108 वर्षों तक कठोर तप किया था। एक अन्य पौराणिक मत के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए 107 बार जन्म लिया था और घोर तपस्या की थी। इसके बाद 108वें जन्म में उनके त्याग और भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसलिए तीज का त्यौहार माता पार्वती को समर्पित माना गया है और तीज माता के रूप में उनकी पूजा की जाती है।
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