नेता बनने की दौड़ ने बुझा दिया घर का चिराग।

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नेता बनने की दौड़ ने बुझा दिया घर का चिराग।
मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा से पूर्व गुना शहर को बैनर और होर्डिंग्सों से पाट दिया गया।
आलम ये था कि शहर के हालात ये थे कि इंसान कम होर्डिंग्स ज्यादा।
प्रशाषन भी आंखे मूंदकर तैयार रहा कि कोई हादसा घटे।
रात करीब 10 बजे एक दुर्घटना जयस्तम्भ चौराहे पर घटी जिसने एक परिवार का आसरा ही छीन लिया।
गलती किसकी?
जिम्मेदार कौन?
क्या इस ह्रदय विदारक घटना के बाद कोई राजनेता यहबोलने की जहमत उठा पायेगा की वो अपने बेनर,पोस्टर नही लगवायेगा।

क्या महज एक जिंदगी सिर्फ गलतियों को सुधारने के लिये ईश्वर ने दी।

क्या मुआवजा मात्र किसी के जीवन की खुशियां,आसरा लौटा सकता है।