शिव जी का वरदान-धतूरा

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#धतूरा
धतूरा को कनक,उन्मत्त,धोत्रा, धोधरा,मानुल आदि नामो से जाना जाता है…।
भगवान #भोलेनाथ का अतिप्रिय फूल है धतूरा….जो फूल पत्ती किसी को पसंद नही होती वो भोलेनाथ को अर्पित होती है,,, भगवान शिव को वनस्पतियों के देवता भी कहा जाता है..।।
धतूरे का पौधा सारे भारत में सर्वत्र सुगमता के साथ मिलता है….. धतूरा सफेद, काला, नीला, पीला तथा लाल फूल वाला 5 जातियों का मिलता है……#धतूरा नशा अधिक लाता है और प्राणों का भी नाश कर देता है….धतूरे के पत्ते और बीज काफी विषैले होते हैं।

धतूरे की प्रकृति बहुत ही गर्म होती है,,, इसका अत्यधिक सेवन व्यक्ति को पागल तक कर देता है…।
धतूरे के पत्तों का धूँआ दमा शांत करता है…. वही धतूरे के पत्तों का अर्क कान में डालने से आँख का दुखना बंद हो जाता है….धतूरे की जड सूंघे तो मृगीरोग शाँत हो जाता है…..धतूरे के कोमल पत्तो पर तेल चुपडे और आग पर सेंक कर बालक के पेट पर बाँधे इससे बालक़ की सर्दी दूर हो जाती है वही फोडा पर बाँधने से फोडा अच्छा हो जाता है…..यदि शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन हो तो बस धतूरे के पत्तों को हल्का गुनगुना कर गर्म कर सूजन वाले स्थान पर बाँध दें निश्चित लाभ मिलेगा।
धतूरे का उपयोग बड़ी ही सावधानी से वैद्य की सलाह में करे,,यह बहुत ही जहरीला होता है…।

धतूरा कई क्षेत्रो से गायब हो गया है इसका संरक्षण और संवर्धन अति आवश्यक है…।।