उन्मुक्त गगन

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हम उन्मुक्त गगन के बाशिंदे है।
कोई रोक नहीं हमारे इरादों पर।
हे चाह हमें गगन छूने की,
गर बेड़ियां न होती अपनों की।
तो चाह हमें थी गगन छूने की।।
Copyright~✍राजवर्धन सिंह