क्या मरने के बाद भी जिंदा रहना चाहेगा इंसान….? तो यह है मरने के बाद जीने का ईकोफ्रेंडली तरीका ….! देखिये जरा…!!

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यह प्रक्रिया मृत शरीर को खाद में बदल देगी और मरने के बाद आप बन जाएंगे एक पेड़ . ​

दुनिया भर में जीवन और मृत्यु को लेकर तरह तरह के विचार हैं. अलग अलग धर्मों, देशों, प्रांतों, जनजातियों में मरने के बाद शरीर को अलग अलग तरीके से दफनाया या जलाया जाता है. मृत्यु के बाद की मान्यताएं भी अलग अलग हैं. कोई कहता है मरने के बाद शरीर स्वर्ग में जाता है या नर्क में. या हम मरने के बाद किसी जानवर का रूप ले लेते हैं.

ये सभी मान्यताएं पता नहीं कितने सच हैं और कितनी झूठ लेकिन एक सच जो है वो यह कि आप खुद के लिए या अपने परिजनों के जिए यह तय कर सकते हैं कि आप मरने के बाद कौनसा पेड़ बनना चाहते हैं.

ऑर्गेनिक ताबूत आपको बनाएंगे पेड़

यह सच है कि अब ऑर्गेनिक ताबूत आपको मरने के बाद पेड़ में तब्दील कर देंगे. जैसे मरने के बाद शरीरको ताबूत यानि कॉफिन में रखकर दफनाया जाता है, वैसे ही आर्गेनिक ताबूत में मृत शरीर को रखकर उसमें पेड़ उगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है.

यह मरने के बाद जीने का ईकोUफ्रेंडली तरीका है

किसी को नहीं पता कि मृत्यु के बाद क्या है. लेकिन पेड़ जब तक ज़िंदा रहता वह सांस लेता रहता है. अब सोचिये अगर कोई मरने के बाद पेड़ बन जाए तो वह हुआ न जीने का ईकोफ्रेंडली तरीका. मृत शरीर पेड़ों के जरिए सांस लेंगे और उस पेड़ को देखने वाले, लगाने वाले, उसकी छांव में बैठने वाले उसे अपनी बातों से ज़िंदा रखेंगे.

इटैलियन कंपनी कैप्सुला मुंडी ने बनाया प्लान
आपको जानकर हैरानी होगी कि ऐसा संभव है लेकिन इसके लिए इंसान के शरीर का इको-फ्रेंडली अंतिम संस्कार करना होगा. इटली के दो डिजाइनर्स ने एक प्रोजेक्ट की शुरुआत की है जिसका नाम है केप्स्यूला मुंडी. यह लैटिन भाषा का शब्द है जिसका मतलब है शरीर का प्रकृति के तीन तत्वों में बंट जाना. ये तीन तत्व हैं खनिज, वनस्पति और जीव. इटली के एन्ना सिटेली और राउल ब्रेजेल नाम के दो डिजाइनर्स ने केप्स्यूला मुंडी नाम से प्रोजेक्ट बनाया है.

इटली के एन्ना सिटेली और राउल ब्रेजेल

ताकि मरने वाले को याद रखा जा सके
यह खुद को अमर करने का एक भी एक नायाब तरीका है और आप भी ऐसा कर सकते हैं. हम मौत के बाद की दुनिया के बारे में बात कर लेते हैं, लेकिन मौत के बारे में बात करने से बचते हैं जबकि हमारे शास्त्रों में भी मृत्यु और उसके बाद के जीवन के बारे में बहुत कुछ लिखा गया है. अगर हम खुद मरने से पहले तय करें की हम कौनसा पेड़ बनना चाहते हैं तो मरने के बाद हम वैसे ही हो सकते हैं जैसा हम होना चाहते थे. याद रखे जाने का यह एक बेहतरीन तरीका है.

और पर्यावरण भी बचे

भारत में एक दाह संस्कार में करीब 100 किलो से ज्यादा लकड़ियां जला दी जाती हैं. अब इलेक्ट्रिक क्रीमेटोरियम भी स्थापित किए गए हैं, लेकिन बहुत कम लोग ही इसे अपना पाए हैं. पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए अगर इस इको फ्रेंडली अंतिम संस्कार को अपनाया जाता है, तो दुनिया को एक साल में लगभग 10 करोड़ से ज्यादा पेड़ मिलेंगे.
बॉडी को भ्रूण की तरह रखा जाएगा

मानव शरीर को एक अंडाकार ऑर्गेनिक पॉड में बिल्कुल उसी प्रकार रखा जाएगा जैसे गर्भस्थ शिशु गर्भ में होता है. इसके पॉड को बीज की तरह जमीन में बो दिया जाता है और इसके ऊपर वही पौधा लगाया जाता है, जिसका पेड़ वह इंसान बनना चाहता था. समय के साथ मानव शरीर मिट्टी में मिलता है और शरीर के पोषक तत्वों से पौधा बड़ा होता रहता है.

पौधा बड़ा होगा तो वहीं जड़ें भी जमेंगी

कैप्सूल में बीज या पौधा भी रखा जाएगा. यह प्रक्रिया मृत शरीर को खाद में बदल देगी. यह सब साथ में मिलकर एक पौधा बनाते हैं और कुछ महीनों बाद पौधा पेड़ की शक्ल ले लेगा. पेड़ की जड़ें शरीर को पेड़ के साथ बांधें रखेंगी. मरने के बाद आप बन जाएंगे एक पेड़.