SUCCESS STORY – संघर्षों की ऐसी कहानी जिसे जानकर आप रह जाएंगे हतप्रभ…..! (एक इंजीनियर की जिजीविषा की कहानी,उन्ही की कलम से…)

411

SUCCESS STORY

मेरे पिता के माता पिता यानि मेरे दादा ने मेरे पिता के बचपन मे ही देश में तत्समय बने हालातों के कारण प्राण गंवा दिए । दादाजी के असमय चले जाने के बाद दादी भी चल बसीं । मेरे पिता ने अपनी बड़ी बहन के पास रहकर पढ़ाई की और रामपुर जिले से पलायन कर मध्य प्रदेश के शिवपुरी में आ गए ।
मेरी माँ के पिता यानि मेरे नाना ग्रामीण खेती किसानी करने वाले गरीब व्यक्ति थे जो मेरी माँ के बचपन मे ही दुनिया छोड़ गए थे । मेरी नानी अंधी हो गयी थीं, हाथ की चक्की से गाँव के लोगों के गेहूं पीसकर अपना गुजारा करती थीं ।


मेरे माता पिता का पहला पुत्र किसी बीमारी से अल्पायु में ही भगवाम को प्यारा हो गया, कुछ वर्षों बाद मेरे बड़े भाई के रूप में मेरे माता पिता को फिर से पुत्र मिला । आठ साल बाद मेरा जन्म हुआ । मेरी 6 वर्ष की आयु के पहले ही मेरे पिता असमय ही परलोक गमन कर गए ।
एक मकान और दुकान छोड़ गए जो हमारे जीवन का सहारा बने ।
एक मां और दो बेटों की संघर्ष पूर्ण यात्रा प्रारंभ हुई, पिता के जाने के बाद । ईंधन के लिए चूल्हे में जलाने के लिए गोबर के कंडे लगते थे, तसला लेकर मोहल्ले के बच्चों के साथ गायों के चरने के स्थान पर जाना और गोबर का तसला सिर पर रखकर लाना मेरा ही काम था । कुंए पर रस्सी बाल्टी लेकर जाना और पानी भरना भी मेरा ही काम था, घर मे लाइट थी नहीं तो या तो लालटेन की रोशनी में पढ़ना या बाहर स्ट्रीट लाइट में पढ़ता था, 9 वीं कक्षा में रात के 2 बजे स्ट्रीट लाइट के नीचे पढ़ते समय एक बार एस पी की जीप पास में आकर रुकी, एस पी ने पूछताछ की, उन्हें घर बताया और घर मे बिजली ना होने की बात बताई, उन्होंने मेरे हाथ मे से किताब ले ली और फिर त्रिकोणमिति के कुछ सूत्र पूछे जो मेने सही सही सुनाए तो उन्होंने शाबाशी दी और चले गए । टॉफी बिस्कुट, पान बीड़ी सिगरेट की दुकान जिसे मैंने ही चलाया, बड़े भाई ने छोटी छोटी नोकरियाँ कीं, टाइपिंग की, प्रेस पर काम किया, मेने और मां ने कागज के लिफाफे बनाकर बेचने का काम किया । मैंने 13 साल की उम्र में शक्कर फेक्ट्री में काम किया जिसमें नाईट शिफ्ट में ट्रक से गन्ने उतारकर सिर पर रखकर अंदर लेजाकर रखने की मजदूरी भी की ।

पुरानी किताबों से पढ़ाई करके आठवीं बोर्ड परीक्षा प्रथम श्रेणी और प्रथम पोजिशन के साथ उत्तीर्ण की । अखवार में फोटो छपा, 9वीं कक्षा में गणित विज्ञान विषय के साथ प्रवेश लिया, साथ के बच्चे ट्यूशन जाते थे, टीचर भी ट्यूशन पर आने के लिए कहते थे लेकिन आर्थिक स्थिति इस लायक नहीं थी, खुद ही पढ़ाई की । पढ़ाई और दुकान साथ साथ । मैं कक्षा 10 में था तब बड़े भाई की शादी हो गयी । हायर सेकंडरी पास करने के बाद मुझे बी ई में प्रवेश मिल रहा था, लेकिन 5 वर्ष तक के लिए बाहर रहकर पढ़ना संभव नहीं लग रहा था इसलिए डिप्लोमा में प्रवेश लिया, मेरिट कम मीन्स स्कॉलरशिप मिली, सक्सेना मातेश्वरी ट्रस्ट से भी स्कॉलरशिप मिली और एक मुनीम के बही खाते लिखने और छुट्टियों में ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई के खर्चे खुद निकाले, भाईसाहब ने भी नियमित रूप से हर महीने जरूरत के अनुसार और सामर्थ्य के अनुसार पैसे पहुंचाए। ऑनर्स के साथ डिप्लोमा किया और नोकरी शुरु की । पहली नॉकरी ग्रामीण यंत्रिकी सेवा की पहली सूची के साथ की और ढाई महीने बाद सिंचाई विभाग में शुरू की । शादी के 14 महीने बाद पत्नी ने पुत्र को जन्म दिया जो शिवपुरी के अस्पताल में सही ट्रीटमेंट न मिलने से 3 दिन के बाद चल बसा, इसके बाद पत्नी का स्वास्थ्य खराब होने से और सरकारी स्कूल की नोकरी होने से लगातार एबोर्शन होने लगे । ईश्वर की कृपा से सही उपचार मिला और फिर मेरे बड़े पुत्र का जन्म हुआ । एक वर्ष में ही छोटे पुत्र का जन्म हुआ और इसके तीन साल के अंतर से प्रिमेच्योर पुत्री का जन्म हुआ जो ऑपरेशन से हुई और सेरेब्रल पाल्सी विकलांगता से पीड़ित है और उसके साथ अब पूरा परिवार उसके संघर्ष में उसके साथ है । मेने नोकरी में आने के बाद, बी ए, एल एल बी, एम ए, बी ई सिविल इंजीनियरिंग और इग्नू से ग्रामीण विकास में स्नातकोत्तर डिप्लोमा किया ।

मेरे संघर्ष पूर्ण जीवन मे कुछ अविस्मरणीय घटनाएं ये भी हैं कि एक बार पूरे घर मे आग लग गयी थी, सब सामान जल गया था, मोहल्ले वालों ने कुंए से पानी खींच खींच कर बाल्टियों से पानी डालकर आग बुझाई थी । ग्वालियर में पढ़ाई के लिए जिस किराए के कमरे में माँ के साथ रहता था वो पूरा मकान लगातार बारिश के कारण भरभराकर गिर पड़ा, जिसमे माँ दब गईं, जिन्हें मुश्किल से निकाल कर अस्पताल पहुंचाया, 72 टांके लगे थे, माँ लगभग एक माह बिस्तर पर रहने के बाद स्वस्थ हुयीं । इस जीवन यात्रा में छोटे-छोटे और भी कई वृतांत हैँ जिन्हें अलग से कभी लिखूंगा ।

(लेखक अवधेश सक्सेना जल संसाधन विभाग में इंजीनियर है और वर्तमान में शिवपुरी जिले के करेरा में पदस्थ है।उनके पुत्र अभिनव अभी हाल ही में सिबिल सेवा सर्विसेस के लिए चयनित हुये है)