सावधान ! यदि इन बैंकों में है आपका खाता तो हो जाइये साबधान…? लग सकती है बड़ी चपत….!

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नई दिल्ली। देश में इस समय बैंकिंग सेक्टर के हालात खराब हैं। खासकर सरकारी बैंकों की हालत ज्यादा खस्ता है। बैंकों की लगातार खराब होते हालातों के बाद भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इस कारण बैंकों में खलबली मची हुई है। आरबीआई ने एनपीए की समय से घोषणा नहीं करने पर सार्वजनिक क्षेत्र के 11 बैंकों को प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (पीसीए) की लिस्ट में डाल दिया है। इससे बैंकों की हालत खराब हो गई है। आरबीआई के इस कदम के चलते बैंकों पर लागत कम करने का दबाव बना हुआ है। एेसे में पीसीए में डाले गए बैंकों ने धड़ाधड़ अपने एटीएम के शटर गिरा रहे हैं। यदि आपके खाता भी इन बैंकों में है तो सावधान हो जाएं, दूसरे बैंक के एटीएम के नकदी की निकासी पर आपको चपत लग सकती है।

ये बैंक बंद कर रहे अपने एटीएम

अंग्रेजी समाचार पत्र इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, आरबीआई की ओर से पीसीए लिस्ट में डाले गए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने तेजी से एटीएम के शटर बंद करने शुरू कर दिए हैं। इनमें से भी 7 बैंकों ने एटीएम के शटर बंद करने की तेजी दिखाई है, इसमें सेंट्रल बैंकइलाहाबाद बैंकइंडियन ओवरसीज बैंकबैंक ऑफ इंडियाबैंक ऑफ महाराष्ट्र, कॉरपोरेशन बैंक और यूको बैंक शामिल हैं।

किस बैंक ने कितने एटीएम बंद किए

आरबीआई के डाटा के हवाले से प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पीसीए में शामिल इंडियन ओवरसीज बैंक ने सबसे ज्यादा एटीएम बंद किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपने 15 फीसदी एटीएम बंद कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बैंक के एटीएम की संख्या अप्रैल 2017 के 3500 के मुकाबले घटकर अप्रैल 2018 में 3,000 रह गई ही। UCO बैंक और केनरा बैंक ने भी अपने 7.6 फीसदी ATM बंद कर दिए हैं। आरबीआई के डाटा के अनुसार पीसीए में आए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बीते साल 1,635 एटीएम बंद कर चुके हैं।

दूसरे बैंक उठा रहे फायदा

सार्वजनिक बैंकों की इस खस्ता हालत का निजी क्षेत्र के बैंक फायदा उठा रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल देश में कुल एटीएम की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़ों के अनुसार पिछले साल देश में एटीएम की कुल संख्या 2,07,813 से 107 बढ़कर इस साल 2,07,920 हो गई है। इससे माना जा रहा है कि पीसीए के दायरे में आए बैंकों की ओर से बंद किए गए एटीएम के बदले दूसरे या निजी क्षेत्र के बैंकों ने भरपाई की है।