ग्वालियर – बहुचर्चित हिरनवन कोठी मामले में पूर्व मंत्री के पी सिंह सहित सारे आरोपी सबूतों के अभाव में बरी ….

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ग्वालियर।
बहुचर्चित हिरनवन कोठी मामले में आज अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। विशेष न्यायालय में लम्बी सुनवाई के बाद सबूतों के अभाव में समस्त आरोपी बरी हुए हैं। पैंतीस साल पुराने इस मामले में कुछ आरोपियों की मुकदमे के दौरान मृत्यु हो चुकी है। इनमें केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय माधवराव भी आरोपी थे लेकिन निधन के बाद उनका नाम मुकदमे से हटा लिया गया था।

1983 में हुई थी घटना

सन 1983 में राजमाता विजयाराजे सिंधिया के एडीसी सरदार संभाजीराव आंग्रे अपने परिवार के साथ हिरन वन कोठी में रहते थे। जब वे विदेश गए हुए थे , तब उनकी कोठी पर कब्जा कर लिया गया था।इस मामले में तत्कालीन सांसद नारायण कृष्ण शेजवलकर तथा पूर्व मंत्री शीतला सहाय ने झांसी रोड थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। घटना के बाद जिला प्रशासन ने संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया।
इस पर सरदार संभाजीराव आंग्रे ने फौजदारी व दीवानी मामला न्यायालय में पेश किया। जिसमें उनका कब्जा मानते हुए न्यायालय ने उनके पक्ष में डिक्री की। वहीं इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इन आरोपियों के खिलाफ डकैती का मामला दर्ज हुआ। इस मामले में जनवरी 2005 को सभी आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र प्रस्तुत किए गए थे।

इस मामले में अदालत के आदेश पर कांग्रेस नेताओं अशोक शर्मा, बाल खांडे, के पी सिंह (पूर्व मंत्री व विधायक), उदयवीर सिंह, अमर सिंह भोंसले, अरुण सिंह तोमर, राम भार्गव, विलास राव लाड, राजेंद्र सिंह तोमर, रविंद्र सिंह भदौरिया, रमेश शर्मा के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।