CWG 2018 में मेडल जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी दीपक नहीं रखते मोबाइल

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CWG 2018 में मेडल जीतने वाले सबसे युवा खिलाड़ी दीपक नहीं रखते मोबाइल
गोल्ड कोस्ट : किस्मत के धनी भारत के युवा भारोत्तोलक दीपक लाठेर शुक्रवार को यहां 69 किग्रा भार वर्ग में कांस्य पदक जीत कर कॉमनवेल्थ गेम्स में देश के लिए पदक जीतने वाले सबसे युवा भारोत्तोलक बन गये. कॉमनवेल्थ गेम्स में पदार्पण कर रहे हरियाणा के 18 साल के लाठेर कुल 295 किग्रा (136 किग्रा+159 किग्रा) का भार उठाकर तीसरे स्थान पर रहे. उनके करीबी प्रतिद्वंदी वैपावा लोअने अंतिम दो भार नहीं उठा सके, जिससे उनका कुल भार 292 किग्रा ही रह गया.
पदक समारोह के बाद लाठेर ने हंसते हुए कहा, ‘मैं अंदर बैठ था और उम्मीद कर रहा था वह (लोअने) अपने प्रयास में विफल हो जाए. मुझे पता है किसी के लिए बुरा प्रार्थना करना अच्छी बात नहीं है, लेकिन ऐसा करने से खुद को रोक नहीं पाया.’
उन्होंने कहा, ‘मैं उम्मीद कर रहा था कि वह भार गिरा दे. किस्मत ने मेरा साथ दिया और ऐसा ही हुआ. उसने मुझे राष्ट्रमंडल चैम्पियनशिप में हराया है. उस प्रतियोगिता में मैं एक किलोग्राम से चूक गया था और मुझे कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा. मुझे नहीं पता कि उसने 175 किग्रा का भार उठाने की कोशिश क्यों की, शायद वह स्वर्ण जीतना चाहता था.’
लाठेर क्लीन और जर्क तकनीक में सुधार की बात करते हुए कहा, ‘मेरे लिए यह मुश्किल भरा दिन था और मुझे लगाता है कि मेरी किस्मत अच्छी थी जिससे मुझे पदक मिला. मैंने जो गलतियां की है उसमें सुधार करने की कोशिश करूंगा. कुछ तकनीकी खामियां है जिसमें मुझे सुधार करने की जरूरत है.’
इस स्पर्धा का स्वर्ण वेल्स के गारेथ ईवांस(299 किग्रा) और रजत श्रीलंका के इंदिका दिस्सानायके (297 किग्रा) के नाम रहा. लाठेर के नाम सबसे कम उम्र में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले में भी शामिल है. उन्होंने 15 साल की उम्र में 62 किग्रा वर्ग में राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया था.
सैन्य खेल संस्थान में चालक का प्रशिक्षण ले रहे लाठेर की प्रतिभा देख कोचों ने उन्हें भारोत्तोलन में हाथ आजमाने की सलाह दी. लाठेर ने कहा, ‘कोचों ने मुझे कहा कि हरियाणा के लोगों की शारीरिक बनावट चालक बनने के लिए नहीं होती. हम कुश्ती और भारोत्तोलन जैसी मुश्किल चीजों के लिए बने हैं.’
उन्होंने कहा, ‘शुरूआत में मुझे भारोत्तोलन पसंद नहीं था, लेकिन आज मैं काफी खुश हूं. यह शानदार है.’ पदक जीत के बाद जश्न मनाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि वह 2020 ओलंपिक तक कोई जश्न नहीं मनाएंगे. उन्होंने कहा, ‘मैंने अपने पिता से पिछले तीन महीने से बातचीत नहीं की है. सच कहूं तो मैं अपने साथ फोन भी नहीं रखता हूं, मैंने देखा है कि फोन से ध्यान भटकता है.’
उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में पूछा ‘क्या कोई मुझे फोन दे सकता है? ताकि मैं उनसे बात कर सकूं.’ लाठेर ने कहा, ‘मैं अभी जश्न नहीं मनाउंगा, 2020 में ओलंपिक पदक जीतने के बाद ही मैं जश्न मनाउंगा.’ इससे पहले भारोत्तोलन में मीराबाई चानू (48 किग्रा) और संजीता चानू (53 किग्रा) ने महिला वर्ग में स्वर्ण पदक जीता तो वही पी गुरूराजा ने 56 किग्रा पुरूष वर्ग में रजत पदक अपने नाम किया.भारतीय भारोत्तोलकों ने इन खेलों में अब तक चार पदक जीते हैं.